Kolkata | तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष पर पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से निकलते समय अचानक कथित हमला हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल घटना के बाद पूरे राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मच गया है। कुणाल घोष ने तुरंत इस मामले की शिकायत कालीघाट पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के ठीक बाहर हुई इस सुरक्षा चूक ने कोलकाता पुलिस और खुफिया तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के समय इलाके में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात थे, फिर भी हमलावर कुणाल घोष के करीब पहुंचने में कामयाब रहे।
शुरुआती इनपुट्स के मुताबिक, कुणाल घोष पार्टी की एक अहम सांगठनिक बैठक में हिस्सा लेने के बाद कालीघाट से बाहर निकल रहे थे। इसी दौरान कुछ अज्ञात तत्वों ने उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

कालीघाट में सुरक्षा चूक: ग्राउंड जीरो से लाइव अपडेट
हमारे ग्राउंड रिपोर्टर के मुताबिक, कालीघाट इलाका कोलकाता के सबसे सुरक्षित क्षेत्रों में से एक माना जाता है, क्योंकि यहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आवास है। इस वीवीआईपी जोन में अचानक टीएमसी के ही एक बड़े चेहरे पर हमला होना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
घटना के तुरंत बाद कालीघाट पुलिस स्टेशन के बाहर पत्रकारों और पार्टी समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई। कुणाल घोष ने थाने के भीतर जाकर अपनी लिखित शिकायत दर्ज करवाई और पुलिस के आला अधिकारियों से हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
“मैं पार्टी प्रमुख के आवास से बैठक खत्म करके निकल रहा था, तभी अचानक मुझ पर हमला करने का प्रयास किया गया। वीवीआईपी सुरक्षा वाले इस क्षेत्र में ऐसी घटना होना बेहद गंभीर बात है। मैंने कालीघाट थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और मुझे उम्मीद है कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपियों को जल्द पकड़ेगी।”
— कुणाल घोष, टीएमसी नेता (कालीघाट पुलिस स्टेशन के बाहर दिया गया बयान)
राजनीतिक घमासान और स्थानीय प्रभाव
इस कथित हमले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर आंतरिक गुटबाजी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। स्थानीय जनता और टीएमसी कार्यकर्ताओं में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। कालीघाट के संवेदनशील चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
क्या यह आंतरिक गुटबाजी का नतीजा है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी के घर के ठीक बाहर इस तरह की घटना को अंजाम देना किसी बड़ी साजिश या आंतरिक मतभेद का हिस्सा हो सकता है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या हमलावर पहले से ही कुणाल घोष के बाहर निकलने का इंतजार कर रहे थे।
प्रशासन के लिए अब सबसे पहला और बड़ा कदम हमलावरों की पहचान करना है। कोलकाता पुलिस ने कालीघाट रूट के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है। मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा को और कड़ा कर दिया गया है और आने-जाने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति की सघन चेकिंग की जा रही है। देखना होगा कि इस मामले में पुलिस कब तक पहली गिरफ्तारी कर पाती है और पार्टी के भीतर इसका क्या असर होता है।











