Ranchi | रांची में ट्रैफिक की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए आज बड़ी राहत की खबर आई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में रांची के नामकुम से डोरंडा पथ के चौड़ीकरण को अंतिम मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही राज्य में रोजगार, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े दो दर्जन से अधिक प्रस्तावों को पास किया गया है।
कैबिनेट के इन फैसलों का सीधा असर राजधानी की जनता, सरकारी कर्मचारियों और राज्य के राजस्व पर पड़ने वाला है। रांची के इस मुख्य मार्ग को फोर-लेन में बदलने के लिए सरकार ने 162 करोड़ से अधिक की राशि को संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति दी है।
रांची को 162 करोड़ की सौगात, इन कोल ब्लॉक्स में शुरू होगा खनन
सड़क निर्माण के अलावा इस बैठक में झारखंड के खनिज संसाधनों के सही इस्तेमाल को लेकर बड़े निर्णय लिए गए हैं। बोकारो के पर्वतपुर कोल ब्लॉक की 2174 एकड़ भूमि पर और सीतानाला कोल ब्लॉक पर कोयला खनन पट्टे को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा गोड्डा के जीतपुर कोल ब्लॉक में भी अब खनन का रास्ता साफ हो गया है, जिससे राज्य में भारी मात्रा में निवेश और स्थानीय रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
कैबिनेट के 5 सबसे बड़े फैसले जो डालेंगे सीधा असर:
- सड़क कनेक्टिविटी: नामकुम-डोरंडा मार्ग (6.70 किमी) अब फोर-लेन बनेगा। उपयोगिता शिफ्टिंग (Utility Shifting) और भू-अर्जन का काम तेज होगा।
- डिजिटल झारखंड: JharNet 2.0 परियोजना की अवधि को वित्तीय वर्ष 2026-27 (31 जुलाई 2026) तक के लिए बढ़ा दिया गया है, जिस पर 65.50 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
- पलामू को पानी: अमानत बराज योजना के लिए 947.26 करोड़ रुपये के तीसरे संशोधित प्राक्कलन (Estimates) को मंजूरी दी गई है, जिससे सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी।
- सरकारी कर्मचारियों को तोहफा: राज्य सरकार के कंप्यूटर ऑपरेटरों के वेतनमान और संविदा राशि में सुधार के साथ-साथ कर्मचारियों के लिए क्रेडिट सुविधा, अग्रिम वेतन और बीमा उत्पादों को हरी झंडी मिली है।
- रोजगार नियमितीकरण: गोड्डा और बोकारो समाहरणालय में अनियमित रूप से कार्यरत कर्मियों की सेवा को स्थाई (नियमित) करने का फैसला लिया गया है।
वन्यजीवों के हमले पर मुआवजा नीति में बदलाव और बांधों की सुरक्षा
प्रशासनिक गलियारों और जमीनी स्तर पर इस कैबिनेट को काफी अहम माना जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में जंगली जानवरों के हमले से होने वाले नुकसान को देखते हुए सरकार ने मुआवजा भुगतान संबंधी आदेश में संशोधन किया है। अब प्रभावित परिवारों को राहत राशि मिलने में आसानी होगी।
वहीं, ‘बाँध सुरक्षा अधिनियम 2021’ के तहत राज्य के बड़े और मध्यम बांधों व जलाशयों की सुरक्षा की निगरानी के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों का एक पैनल (Independent Panel of Experts) गठित करने की मंजूरी दी गई है। यह पैनल राज्य के प्रमुख जलाशयों की स्थिति की समीक्षा करेगा ताकि भविष्य में बाढ़ या बांध टूटने जैसी आपदाओं से बचा जा सके।
इसके साथ ही, झारखंड लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के लंबित मामलों के तहत मोटरयान निरीक्षक के पद पर अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता भी साफ कर दिया गया है।
सिस्टम को कसने की तैयारी?
हेमंत सरकार के इन फैसलों को राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास और पेंडिंग पड़े कामों को तेजी से निपटाने की कसरत के रूप में देखा जा रहा है। नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और राज्य वित्त पर तैयार रिपोर्ट को आगामी विधानसभा सत्र में पटल पर रखा जाएगा। इन कदमों से यह साफ है कि सरकार विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने के साथ-साथ प्रशासनिक पारदर्शिता को भी मजबूत करना चाहती है।
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