झारखंड अवैध वेतन निकासी घोटाला: 3 और जिलों की जांच करेगी CID

Subhash Shekhar
6 Min Read

Ranchi | झारखंड में सरकारी खजाने में सेंधमारी करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों और बाबुओं की अब खैर नहीं है। बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा के बाद अब राजधानी रांची, रामगढ़ और देवघर में भी अवैध वेतन निकासी घोटाले की परतें खुलेंगी।

अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) जल्द ही इन तीनों जिलों के मामलों को टेकओवर करने जा रही है। इसके साथ ही CID के पास अब इस महाघोटाले से जुड़ी कुल छह प्राथमिकियों (FIR) की जांच का जिम्मा होगा, जिससे सचिवालय से लेकर जिला मुख्यालयों तक हड़कंप मच गया है।

नया मोड़ तब आया जब रांची और रामगढ़ के पशुपालन विभाग तथा देवघर के स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रुपये की हेराफेरी पकड़ी गई। CID थाना रांची में इन तीनों मामलों को री-रजिस्टर करने की तैयारी अंतिम चरण में है, जिसके बाद बड़े चेहरों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।

रांची में कुबेर पोर्टल से उड़ाए 2.94 करोड़, लेखापाल पहुंचा जेल

राजधानी रांची के जिला कोषागार से पशुपालन विभाग के नाम पर कुल $2.94$ करोड़ रुपये की अवैध निकासी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह पूरा खेल कांके स्थित ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन’ से जुड़ा है।

ग्राउंड से मिली जानकारी के मुताबिक, संस्थान के लेखापाल मुनिन्द्र कुमार और एक अन्य कर्मी संजीव कुमार ने सरकारी सिस्टम ‘कुबेर पोर्टल’ में ही सेंध लगा दी। इन दोनों ने वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के वेतन विपत्रों (Salary Bills) में बड़ी चालाकी से छेड़छाड़ की और मूल वेतन बढ़ाकर अंतर की राशि सीधे अपने पर्सनल बैंक खातों में ट्रांसफर कर ली।

किसके खाते में कितनी गई रकम:

  • लेखापाल मुनिन्द्र कुमार: $1,52,43,572$ रुपये
  • कर्मी संजीव कुमार: $1,41,79,480$ रुपये
  • कुल गबन: $2,94,23,052$ रुपये

[कांके स्थित पशुपालन संस्थान के बाहर मुस्तैद पुलिस और फाइलें खंगालते अधिकारियों की तस्वीर यहाँ देखें]

इस मामले में रांची सदर के कार्यपालक दंडाधिकारी जफर हसनात ने कोतवाली थाने में FIR दर्ज कराई थी। रांची पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी मुनिन्द्र कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि दूसरा आरोपी संजीव कुमार अभी भी फरार है। अब CID इस पूरे नेक्सस को तोड़ेगी।

देवघर में स्वास्थ्य कर्मियों के नाम पर 99 लाख का फर्जीवाड़ा

बाबा नगरी देवघर भी इस घोटाले से अछूती नहीं रही। देवघर के सारवां थाना इलाके में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की रिपोर्ट पर एक बड़ा खुलासा हुआ। यहाँ स्वास्थ्य विभाग की तत्कालीन लेखा लिपिक (Account Clerk) सविता कुमारी ने सरकारी पैसों पर डाका डाला।

आरोप है कि सविता कुमारी ने वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-19 के दौरान फर्जी मेडिकल और वेतन विपत्र तैयार किए। उन्होंने विभाग के ही कर्मचारी जैसे आलोक बनर्जी, सुलोचना कुमारी, कुमारी लक्खी, जिबलाल मेहरा, सुरसरी देवी, प्रभात कुमार और प्रियंका कुमारी के नाम और बैंक खातों का गलत इस्तेमाल कर कुल $99,06,762$ रुपये का गबन कर लिया।

देवघर पुलिस आरोपी सविता कुमारी को पहले ही सलाखों के पीछे भेज चुकी है। लेकिन अब मामला CID के पास जाने से यह साफ हो गया है कि इस खेल में शामिल ऊपरी कड़ियों और बैंकों के साथ मिलीभगत की भी गहराई से जांच होगी।

रामगढ़: पशुपालन कार्यालय में बाबुओं की मिलीभगत से 34 लाख पार

तीसरा नया मामला रामगढ़ जिले से जुड़ा है, जहाँ पशुपालन कार्यालय में विभागीय ऑडिट के दौरान अधिकारियों और बाबुओं की मिलीभगत की पोल खुली। आंतरिक जांच में स्पष्ट हो चुका है कि यहाँ नियमों को ताक पर रखकर $34.25$ लाख रुपये की अवैध व फर्जी निकासी की गई थी।

रामगढ़ में स्थानीय स्तर पर मामला तो दर्ज था, लेकिन अब CID इस केस को री-रजिस्टर कर जांच का दायरा बढ़ाने वाली है। स्थानीय लोगों और सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि अगर रामगढ़ और रांची के पशुपालन विभाग के मामलों के तार आपस में जुड़े मिलते हैं, तो यह राज्य का एक और बड़ा ‘वेतन घोटाला’ रूप ले सकता है।

[झारखंड सीआईडी मुख्यालय (रांची) के बाहर की हलचल और एसआईटी अधिकारियों की विजुअल यहाँ देखें]

सिस्टम की तैयारी: अब आगे क्या? (What Next)

झारखंड में पुलिस विभाग के बाद अब पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग में जिस तरह से डिजिटल पोर्टल (कुबेर) का दुरुपयोग कर अवैध वेतन निकासी की गई है, उसने राज्य की वित्तीय सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन का अगला कदम:

CID की SIT अब इन तीनों नए मामलों को अपने हाथ में लेकर फाइलों को नए सिरे से खंगालेगी। फरार आरोपियों (जैसे रांची के संजीव कुमार) की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज की जाएगी। इसके अलावा, राज्य सरकार इस तरह के डिजिटल गबन को रोकने के लिए ‘कुबेर पोर्टल’ के ऑडिट ट्रेल (Audit Trail) और सिक्योरिटी फीचर्स को और मजबूत करने पर विचार कर रही है ताकि भविष्य में कोई भी क्लर्क या लेखापाल सैलरी बिलों में छेड़छाड़ न कर सके।

Share This Article
Follow:
सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।