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झारखंड में जल सहियाओं को मिलेगी प्लंबर ट्रेनिंग

Ranchi | झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पेयजल संकट और जल जीवन मिशन की सुस्त रफ्तार पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जनता के जीवन से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अधिकारियों की किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

झारखंड मंत्रालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सीएम सोरेन ने राज्य के हर ग्रामीण परिवार तक शुद्ध पानी पहुंचाने की समय-सीमा तय कर दी है। विभाग की इस समीक्षा बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद सहित राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार भी मौजूद रहे, जहां राज्य की वाटर सप्लाई चेन को दुरुस्त करने का पूरा रोडमैप बदला गया।

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समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
झारखंड में जल सहियाओं को मिलेगी प्लंबर ट्रेनिंग 2

दिसंबर 2028 तक का डेडलाइन: हर घर नल से जल का लक्ष्य

मंत्रालय से आ रही ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने ‘जल जीवन मिशन’ के तहत राज्य के शत-प्रतिशत ग्रामीण घरों तक दिसंबर 2028 तक पाइपलाइन के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। बैठक में सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि काम में पारदर्शिता और गति लाने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाए।

सीएम सोरेन ने डिजिटल मॉनिटरिंग का एक अनोखा और सख्त फॉर्मूला पेश किया है। अब राज्य में चल रही बड़ी जलापूर्ति योजनाओं के ठेकेदारों (कांट्रैक्टरों) का एक विशेष व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाएगा। इस ग्रुप में प्रतिदिन की कार्य प्रगति (डेली प्रोग्रेस रिपोर्ट) को रियल टाइम अपडेट करना अनिवार्य होगा, ताकि सीधे रांची से इसकी लाइव मॉनिटरिंग की जा सके।

जल सहिया अब खराब चापाकल खुद सुधारेंगी

ग्राउंड जीरो पर पानी की किल्लत और खराब पड़े चापाकलों की समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री ने एक बेहद व्यावहारिक और क्रांतिकारी फैसला लिया है। सरकार अब राज्य की ‘जल सहियाओं’ को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें तकनीकी रूप से सशक्त करने जा रही है।

सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा फैसला:

“राज्य की जल सहियाओं को समूहवार औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) में समय-समय पर प्लंबर का वोकेशनल प्रशिक्षण दिया जाए। उन्हें खराब चापाकलों को बनाने और सौर ऊर्जा वाटर सप्लाई की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बेहतर काम करने वाली जल सहियाओं को पुरस्कृत भी किया जाएगा।”

[ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की जांच करती जल सहिया की फाइल फोटो यहाँ देखें]

गिरते भू-जल स्तर को रोकने के लिए ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ आइडिया

झारखंड के कई जिलों में तेजी से गिरता भू-जल स्तर (Groundwater Level) प्रशासन के लिए सिरदर्द बना हुआ है। इस संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आउट ऑफ द बॉक्स सोचने की सलाह दी है। इसके तहत राज्य में जितने भी अनुपयोगी या सूख चुके चापाकल हैं, उनके बोरिंग को अब ‘रिचार्ज पीट’ (Recharge Pit) के रूप में बदला जाएगा।

इस तकनीक से मानसून के दौरान वर्षा जल सीधे जमीन के नीचे जाएगा, जिससे वाटर टेबल में सुधार होगा। इसके अलावा, घरों से निकलने वाले वेस्ट पानी को सहेजने के लिए ग्रामीण स्तर पर सोक-पीट (शॉक पीट) बनाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

‘प्लास्टिक मुक्त गांव’ बनाने पर मिलेगा सीधे सरकारी इनाम

मुख्यमंत्री ने जल गुणवत्ता के साथ-साथ पर्यावरण और स्वच्छता पर भी विशेष जोर दिया है। उन्होंने कहा कि झारखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों को भी शहरों की तर्ज पर सुविधाएं मिलनी चाहिए।

  • आंगनबाड़ी केंद्रों पर फोकस: राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में प्राथमिकता के आधार पर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
  • प्लास्टिक मुक्त गांव: जो गांव खुद को पूरी तरह प्लास्टिक कचरे से मुक्त करेंगे, उन्हें सरकार और विभाग के स्तर पर विशेष रूप से पुरस्कृत और सम्मानित किया जाएगा।
  • समीक्षा के मुख्य बिंदु: बैठक में ओडीएफ प्लस गांव, ठोस व तरल कचरा प्रबंधन, गोबरधन योजना और स्वच्छ भारत मिशन की योजनाओं की भी गहन समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की इस हाई-लेवल मीटिंग के बाद अब गेंद पूरी तरह से नौकरशाही के पाले में है। व्हाट्सएप ग्रुप मॉनिटरिंग और दिसंबर 2028 की डेडलाइन यह साफ बताती है कि सरकार अब कागजी दावों से आगे बढ़कर जमीनी हकीकत बदलना चाहती है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि राज्य का प्रशासनिक अमला अनुपयोगी चापाकलों को रिचार्ज पीट में बदलने और जल सहियाओं की ट्रेनिंग को कितनी तेजी से धरातल पर उतार पाता है। झारखंड के प्यासे गांवों के लिए यह योजनाएं जीवन रेखा साबित हो सकती हैं।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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