Ranchi | झारखंड में महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध बढ़ते यौन अपराधों को लेकर सियासत गरमा गई है। आजसू पार्टी के सुप्रीमो और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो ने राज्य सरकार को घेरते हुए कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बिल्कुल भी सजग नहीं है।
यह तीखा हमला उन्होंने राँची के रिंग रोड स्थित ट्रेडिशन बैंक्वेट हॉल में आयोजित अखिल झारखंड महिला संघ के राज्य स्तरीय एकदिवसीय प्रतिनिधि सम्मेलन में बोला। मंच से हुंकार भरते हुए महतो ने राज्य के हालिया अपराध आंकड़ों का हवाला देकर सरकार की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया।
सुदेश महतो ने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए बताया कि झारखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराध किस कदर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस राज्य के निर्माण में महिलाओं ने अपनी लाठियां और अपनी जान दांव पर लगा दी, आज उसी राज्य में वे खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं।
चौंकाने वाले आंकड़े: हर महीने दर्ज हो रहे औसतन 145 दुष्कर्म के मामले
सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री ने आधिकारिक आंकड़ों के जरिए राज्य की एक डरावनी तस्वीर पेश की। मैदान में मौजूद सैकड़ों महिला प्रतिनिधियों के सामने उन्होंने कहा:
“वर्ष 2025 में पूरे झारखंड में कुल 1,735 दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए। इसका सीधा मतलब है कि राज्य में हर महीने औसतन लगभग 145 महिलाएं या बच्चियां दरिंदगी का शिकार हुईं।”

बात यहीं खत्म नहीं होती, सुदेश महतो ने साल 2026 के शुरुआती रुझानों को और भी ज्यादा भयानक बताया। उन्होंने आगाह किया कि वर्ष 2026 के शुरुआती तीन महीनों (जनवरी, फरवरी और मार्च) में ही अब तक 410 दुष्कर्म के मामले दर्ज हो चुके हैं। अगर अपराध की यही रफ्तार जारी रही, तो साल 2026 पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रशासन इन आंकड़ों को देखकर भी चुप क्यों बैठा है?
‘चौखट और घूँघट’ से निकालकर महिलाओं को दिया 50% आरक्षण
आजसू प्रमुख ने पार्टी के इतिहास और महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को याद करते हुए कहा कि आजसू ने हमेशा महिलाओं को पुरुषों के समकक्ष खड़ा किया है। उन्होंने जोर देकर कहा:
- नेतृत्व की मुख्यधारा: आजसू वह राजनीतिक ताकत है जिसने महिलाओं को केवल चौखट और घूँघट तक सीमित नहीं रहने दिया।
- ऐतिहासिक भागीदारी: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिलाकर उन्हें नेतृत्व की मुख्यधारा में लाने का काम आजसू ने किया।
- केंद्रीय पहल की सराहना: उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले को एक ऐतिहासिक कदम बताया।
दिग्गज नेताओं का जुटा जमावड़ा, सरकार के खिलाफ रणनीति तैयार
इस राज्य स्तरीय सम्मेलन में आजसू के कई शीर्ष नेताओं ने भी अपनी बात रखी और धरातल पर महिलाओं की स्थिति को लेकर चिंता जताई।
| नेता का नाम | पद / क्षेत्र |
| निर्मल महतो | मांडू विधायक |
| डॉ. लंबोदर महतो | पूर्व विधायक, गोमिया |
| डॉ. देवशरण भगत | मुख्य प्रवक्ता |
| प्रवीण प्रभाकर | केंद्रीय उपाध्यक्ष |
| संजय मेहता | केंद्रीय महासचिव |
बैठक में राँची जिला परिषद अध्यक्ष निर्मला भगत, उपाध्यक्ष वीणा देवी, बोकारो जिप उपाध्यक्ष बबीता कुमारी समेत राज्यभर से आईं हजारों महिला कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। सभी नेताओं ने एक सुर में कहा कि राज्य में आधी आबादी की सुरक्षा के लिए अब चुप नहीं बैठा जा सकता और इसके खिलाफ ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
आगे क्या? (What Next)
आजसू के इस कड़े रुख और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध के आंकड़ों ने हेमंत सोरेन सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सड़क से लेकर सदन तक गूंजने वाला है। कानून-व्यवस्था को लेकर घिरी सरकार को अब इन आंकड़ों पर जवाब देना होगा। देखना यह होगा कि बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए प्रशासन क्या कड़े कदम उठाता है और विपक्षी दल इस मुद्दे को जनता के बीच कितनी मजबूती से ले जा पाते हैं।










