क्या झारखंड में छिन जाएगा आपका वोट? सीएम हेमंत सोरेन की बड़ी चेतावनी, मतदाता सूची में गड़बड़ी को बताया ‘लोकतंत्र पर हमला’

क्या झारखंड में छिन जाएगा आपका वोट? सीएम हेमंत सोरेन की बड़ी चेतावनी, मतदाता सूची में गड़बड़ी को बताया 'लोकतंत्र पर हमला'

रांची: झारखंड की राजनीति में इस वक्त एक नया उबाल आ गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सीधे तौर पर आगाह किया है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में आपके लोकतांत्रिक अधिकारों को खत्म करने की एक बड़ी साजिश रची जा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक भी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से कटना नहीं चाहिए। यह केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आपके वजूद और आपकी पेंशन, राशन जैसे बुनियादी हक को बचाने की लड़ाई है।

कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पर बुधवार को आयोजित एक हाई-प्रोफाइल बैठक में झामुमो (JMM) ने चुनावी रणभेरी फूँक दी है। 12 जिलों के सांसदों, विधायकों और जिला पदाधिकारियों के साथ हुई इस मैराथन बैठक में ‘वोट बैंक’ की सुरक्षा को लेकर विस्तृत रणनीति बनाई गई। सोरेन ने पार्टी कार्यकर्ताओं को आदेश दिया है कि वे गांव-गांव जाकर हर एक आदिवासी, मूलवासी और वंचित नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में सुरक्षित कराएं।

झामुमो का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस पुनरीक्षण कार्यक्रम के जरिए पिछड़ों और वंचितों को उनके संवैधानिक अधिकारों से बेदखल करने का षड्यंत्र रच रही है। पार्टी का मानना है कि अगर नाम वोटर लिस्ट से कटा, तो भविष्य में राशन कार्ड और पेंशन जैसे सरकारी लाभों से भी हाथ धोना पड़ सकता है। ऐसे में झामुमो ने अब बूथ स्तर तक ‘डिफेंस मोड’ में काम करने का फैसला लिया है।

‘एक भी वोटर छूटा, तो समझो लोकतंत्र टूटा’

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए संगठन को बेहद सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा कि “जागरूक बनें, भागीदारी बढ़ाएं, एक भी वोटर छूटे नहीं।”

बूथ स्तर पर ‘किलाबंदी’ की तैयारी

झामुमो अब अपने संगठन को केवल जिला स्तर पर नहीं, बल्कि बूथ, पंचायत और प्रखंड स्तर पर ‘धारदार’ बनाने जा रहा है। बैठक में यह तय हुआ कि:

  • SIR प्रशिक्षण: 12 जिलों के कार्यकर्ताओं को मतदाता सूची की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया गया है।
  • त्रुटि सुधार: नाम में गलती या पते की अशुद्धि को तुरंत ठीक कराने का अभियान चलेगा।
  • नई एंट्री: 18 साल पूरे कर चुके युवाओं और छूटे हुए योग्य नागरिकों का नाम प्राथमिकता पर जोड़ा जाएगा।

भाजपा की नीति और नीयत पर उठा सवाल

बैठक के दौरान झामुमो महासचिव विनोद कुमार पांडेय और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी का तर्क है कि बिहार और बंगाल में हुए पिछले अनुभवों को देखते हुए झारखंड में सतर्कता जरूरी है। झामुमो का मानना है कि मतदाता सूची से नाम कटना केवल राजनीतिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह उन गरीबों पर हमला है जो पूरी तरह सरकारी योजनाओं पर निर्भर हैं।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का असर: आम आदमी पर क्या होगा प्रभाव?

यह मुद्दा केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। अगर मतदाता सूची में आपका नाम नहीं है, तो इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं:

  1. सरकारी योजनाओं का लाभ: झारखंड में अधिकांश कल्याणकारी योजनाएं आधार और वोटर आईडी के डेटाबेस से जुड़ी हैं।
  2. नागरिकता और पहचान: मतदाता सूची में नाम होना एक मजबूत पहचान पत्र का काम करता है।
  3. लोकतांत्रिक भागीदारी: पंचायत से लेकर विधानसभा चुनाव तक, आपका एक वोट सरकार चुनने की ताकत रखता है।

“भाजपा एसआईआर की आड़ में आदिवासी, मूलवासी और वंचित समाज का मताधिकार छीनना चाहती है। हम ऐसा होने नहीं देंगे। झामुमो का हर सिपाही इस षड्यंत्र के खिलाफ मैदान में है।” — हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखंड

आगे क्या? प्रशासन और सरकार का रुख

बैठक में रांची, धनबाद, जमशेदपुर, और बोकारो जैसे बड़े शहरों के अलावा पलामू और कोल्हान के जिलों पर विशेष फोकस रहा। आने वाले दिनों में झामुमो के कार्यकर्ता डोर-टू-डोर कैंपेन चला सकते हैं। वहीं, नगर और महानगर कमेटियों को और अधिक ‘सक्रिय’ होने का टास्क दिया गया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि हेमंत सोरेन का यह कदम आगामी चुनावों और संभावित जनगणना को लेकर अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस प्रक्रिया को कितनी पारदर्शिता के साथ पूरा करता है और भाजपा इन आरोपों पर क्या पलटवार करती है।

इसे भी पढ़ें: JMM Meeting: जनगणना और SIR पर हेमंत सोरेन का बड़ा फैसला

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment