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“या तो डील होगी या फिर युद्ध…”: ईरान को ट्रंप की सीधी चेतावनी, क्या मोदी की दोस्ती बचा पाएगी दुनिया को महाविनाश से?

वॉशिंगटन/नई दिल्ली | अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही बातचीत के बीच अब तक का सबसे बड़ा और खतरनाक अल्टीमेटम दे दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल बातों के लिए बातें नहीं कर रहे हैं। पीएम मोदी को अपना दोस्त बताने और तेल की कीमतें कम होने की खुशखबरी देने के ठीक बाद ट्रंप ने तेवर बदलते हुए कहा, “अगर कोई डील नहीं हुई, तो लड़ाई फिर से शुरू हो जाएगी।”

महीनों के तनाव और युद्ध की धमकियों के बाद, ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान न केवल परमाणु हथियार न बनाने पर ‘जोरदार तरीके से’ राजी हो गया है, बल्कि वह अमेरिका को वह “न्यूक्लियर डस्ट” (परमाणु धूल) भी वापस करने जा रहा है जो अमेरिकी हमलों के बाद मलबे में दबी थी।

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यह खबर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि इसमें पहली बार उस सीक्रेट सैन्य ऑपरेशन के नतीजों का जिक्र किया गया है जिसने ईरान के परमाणु बेस को मलबे में तब्दील कर दिया था।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वैश्विक राजनीति के केंद्र में भारत और उनके ‘दोस्त’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्या अहमियत है। अमेरिकी समाचार एजेंसियों के मुताबिक ट्रंप ने न केवल पीएम मोदी की जमकर तारीफ की, बल्कि ईरान के साथ जारी तनाव और न्यूक्लियर डील को लेकर भी ऐसी बात कह दी है, जिससे पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

मोदी मेरे दोस्त, भारत बहुत अच्छा कर रहा है: ट्रंप

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब डोनाल्ड ट्रंप से भारत और पीएम मोदी के साथ उनके संबंधों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के अपनी गर्मजोशी जाहिर की। ट्रंप ने कहा, “मेरी पीएम मोदी से बहुत अच्छी बातचीत हुई है। वह मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं और भारत उनके नेतृत्व में शानदार काम कर रहा है।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया दो गुटों में बंटी नजर आ रही है। ट्रंप और मोदी की यह ‘केमिस्ट्री’ केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका के रणनीतिक रिश्तों की नई मजबूती का संकेत है।

“तेल सस्ता होगा और बाजार बढ़ेगा”: ट्रंप की दोतरफा जीत

व्हाइट हाउस के बाहर मीडिया से रूबरू होते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आर्थिक सफलताओं का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। ट्रंप ने आत्मविश्वास के साथ कहा, स्टॉक मार्केट बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तेल की कीमतें नीचे आ रही हैं और यह सब बहुत अच्छा लग रहा है।” विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान सीधे तौर पर मिडिल ईस्ट में कम होते तनाव की ओर इशारा है। अगर तेल की कीमतें गिरती हैं, तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह किसी दिवाली गिफ्ट से कम नहीं होगा।

ईरान के साथ सीजफायर पर ट्रंप का चौंकाने वाला रुख

मिडल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ट्रंप ने ईरान के मुद्दे पर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ईरान के साथ सीजफायर (युद्धविराम) की अवधि बढ़ाएंगे, तो ट्रंप का जवाब सीधा और सख्त था।

  • डील की तैयारी: ट्रंप ने कहा, “ईरान अब एक डील करना चाहता है। वे आज उन शर्तों पर बात करने को तैयार हैं, जिनके लिए वे 2 महीने पहले राजी नहीं थे।”
  • नो न्यूक्लियर वेपन: राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका की सबसे बड़ी शर्त यही है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।
  • सीजफायर बढ़ाने की जरूरत नहीं: ट्रंप का मानना है कि हालात अब उनके नियंत्रण में हैं और ईरान दबाव में आकर बातचीत की मेज पर आ रहा है, इसलिए सीजफायर को जबरन खींचने की आवश्यकता नहीं है।

ग्राउंड रिपोर्ट: इस बयान का आम आदमी और दुनिया पर क्या होगा असर?

1. कच्चे तेल की कीमतों पर असर: ईरान और अमेरिका के बीच अगर डील होती है, तो ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई सामान्य होगी। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे महंगाई से राहत की उम्मीद बढ़ेगी।

2. भारत की मध्यस्थ भूमिका: ट्रंप का मोदी को अपना दोस्त बताना संकेत देता है कि आने वाले समय में ईरान और अमेरिका के बीच सुलह कराने में भारत एक ‘ब्रिज’ (पुल) का काम कर सकता है।

3. न्यूक्लियर सुरक्षा: ट्रंप ने साफ किया है कि “न्यूक्लियर वेपन” सबसे बड़ा फैक्टर है। अगर ईरान परमाणु कार्यक्रम रोकता है, तो दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के खतरे से एक कदम दूर हो जाएगी।

क्यों बदले ईरान के सुर?

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ पॉलिसी ने ईरान को घुटनों पर ला दिया है। 2 महीने पहले तक जो ईरान झुकने को तैयार नहीं था, वह अब ‘डील’ की बात कर रहा है। ट्रंप की यह कूटनीतिक जीत उनके दूसरे कार्यकाल के सबसे बड़े फैसलों में से एक साबित हो सकती है।

आगे क्या होगा?

अब पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले आधिकारिक बयान पर टिकी हैं। क्या ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़कर अमेरिका की शर्तों पर हाथ मिलाएगा? वहीं, पीएम मोदी और ट्रंप की यह दोस्ती आने वाले हफ्तों में डिफेंस और ट्रेड के क्षेत्र में किसी बड़े समझौते में बदल सकती है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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