रांची। झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत में भारी हलचल पैदा कर दी है। एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने शानदार जीत दर्ज कर एक बार फिर साबित कर दिया है कि झारखंड की चुनावी बिसात पर एनडीए का गणित कितना मजबूत है। इस करारी शिकस्त के साथ ही विपक्षी खेमे, खासकर कांग्रेस की पूरी चुनावी रणनीति ताश के पत्तों की तरह बिखर गई है।
इस जीत के बाद राजधानी रांची के सियासी गलियारों में भारी उत्साह है। विधानसभा से लेकर भाजपा के प्रदेश कार्यालय तक ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ जश्न का माहौल देखा जा रहा है। [जीत के जश्न और भाजपा दफ्तर में माल्यार्पण की तस्वीर यहाँ देखें]
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि परिमल नाथवानी की यह जीत केवल एक सीट का परिणाम नहीं है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एनडीए की एकजुटता का एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन है। कांग्रेस के तमाम दावों और अफवाहों को दरकिनार करते हुए एनडीए के विधायकों ने एकजुट होकर मतदान किया, जिसने विपक्ष के हौसले पस्त कर दिए हैं।
‘कर्मभूमि’ लौटे परिमल नाथवानी: ग्रामीण विकास और कौशल पर रहेगा जोर
जीत के बाद भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे परिमल नाथवानी का पार्टी कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद उन्होंने भावुक अंदाज में जनता और विधायकों का आभार जताया।
“साल 2008 से 2020 के बीच झारखंड से राज्यसभा सांसद के रूप में मेरा कार्यकाल बेहद खास रहा। यह राज्य मेरे लिए नया नहीं है, यह मेरी कर्मभूमि है। मैं यहाँ के विकास में योगदान देने के लिए वापस लौटा हूँ।” – परिमल नाथवानी, नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद
उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मुख्य ध्यान ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और शिक्षा के स्तर को सुधारने पर रहेगा। इसके साथ ही, वे कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए युवाओं के लिए स्थायी आजीविका और कुटीर उद्योगों को पुनर्जीवित करने की दिशा में जमीनी स्तर पर काम करेंगे। नाथवानी ने इस ऐतिहासिक वापसी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व सहित एनडीए के सभी विधायकों का धन्यवाद किया।
“यह तो बस शुरुआत है, कांग्रेस को जनता ने पूरी तरह नकारा” – आदित्य साहू
झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने इस जीत को एनडीए के सशक्त संगठन और पीएम मोदी की जनहितैषी नीतियों की जीत बताया है। मैदान से आ रही खबरों के मुताबिक, भाजपा खेमा इस जीत को आगामी चुनावों के लिए एक टॉनिक की तरह देख रहा है।
आदित्य साहू ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “देश की जनता तो पहले ही कांग्रेस को नकार चुकी थी, आज झारखंड ने भी उस पर पूरी तरह से मुहर लगा दी है। जिस पार्टी को चुनाव में अपना स्थानीय पोलिंग एजेंट तक नसीब नहीं हुआ, उसके दावों की हवा निकलनी तय थी। एनडीए विधायकों की एकजुटता ने उन ताकतों को करारा जवाब दिया है जो अफवाहें फैला रहे थे। यह तो सिर्फ जीत की शुरुआत है, आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा।”
“परिणाम अप्रत्याशित नहीं, नाथवानी का ट्रैक रिकॉर्ड ही उनकी ताकत” – बाबूलाल मरांडी
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह परिणाम बिल्कुल भी चौंकाने वाला नहीं है। परिमल नाथवानी पिछले 12 वर्षों से झारखंड की राजनीति और विकास में सक्रिय रहे हैं, जिसके कारण राज्य के सभी 81 विधायक उन्हें और उनके काम करने के तरीके को अच्छे से जानते थे।
बाबूलाल मरांडी ने कहा, “जब एक पार्टी को अपने ही विधायकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं पर भरोसा न हो, तो वह जीत की उम्मीद कैसे कर सकती है? विधायकों ने राज्यहित और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों को सर्वोपरि रखते हुए अपने विवेक से मतदान किया है। परिमल नाथवानी पहले भी बेहतरीन सांसद साबित हुए हैं और इस बार भी वे राज्य में निवेश संवर्धन और जनहित के मुद्दों को मजबूती से देश के सामने रखेंगे।”
संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने भी इस जीत को ‘संकल्प और संगठन’ की सामूहिक शक्ति का परिणाम बताया।
रघुवर दास, चंपाई सोरेन सहित तमाम दिग्गज नेताओं ने दी बधाई
इस ऐतिहासिक जीत पर झारखंड के राजनीतिक दिग्गजों का तांता लग गया है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, विधायक चंपाई सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा, आजसू अध्यक्ष सुदेश महतो, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी और संजय सेठ ने परिमल नाथवानी को बधाई दी। इसके अलावा जदयू विधायक सरयू राय, लोजपा प्रदेश अध्यक्ष बीरेंद्र प्रधान सहित एनडीए खेमे के दर्जनों विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने इस जीत को झारखंड के विकास के लिए एक नया अध्याय बताया।
What Next: अब क्या होगा झारखंड की सियासत पर असर?
इस राज्यसभा चुनाव के परिणाम ने झारखंड की भविष्य की राजनीति की एक साफ तस्वीर पेश कर दी है। ‘व्हाट नेक्स्ट’ की बात करें तो इस जीत से एनडीए का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है, वहीं विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A.) के अंदरूनी मतभेद और कमजोरी खुलकर सामने आ गई है। प्रशासन और चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान संपन्न करा लिया है, लेकिन अब असल परीक्षा नवनिर्वाचित सांसद की होगी कि वे अपने वादे के मुताबिक झारखंड के ग्रामीण इलाकों और कौशल विकास को किस तरह नई ऊंचाई पर ले जाते हैं।
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