सोशल मीडिया जगत में एक बड़ा भूचाल आ गया है। एलन मस्क के ‘X’ को सीधी चुनौती देने के लिए अब बाजार में Twitter Now नाम से एक नया प्लेटफॉर्म उतर चुका है।
नीली चिड़िया वाला वही पुराना क्लासिक लोगो और ‘ट्वीट’ का जाना-पहचाना अहसास वापस लाने का दावा करते हुए इसे लाइव कर दिया गया है।
हैरानी की बात यह है कि इसे शुरू करने वाला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि ट्विटर के पूर्व ट्रेडमार्क व लीगल मामलों के वकील स्टीफन कोट्स हैं। कानूनी तलवार लटकने के बावजूद इस कदम ने टेक जगत में भारी हलचल मचा दी है।
मस्क बनाम पूर्व वकील: ट्रेडमार्क पर कैसे फंसा कानूनी पेंच?
इस पूरे विवाद की जड़ में एक बेहद दिलचस्प कानूनी दांव-पेंच छुपा है। स्टीफन कोट्स की कंपनी ‘ऑपरेशन ब्लूबर्ड’ (Operation Bluebird) का तर्क है कि जब एलन मस्क ने आधिकारिक तौर पर नाम बदलकर ‘X’ किया, तो उन्होंने ‘Twitter’ और ‘Tweet’ जैसे ओरिजिनल ट्रेडमार्क को कानूनी रूप से त्याग (Abandon) दिया था।
इसी तकनीकी पहलू को आधार बनाकर कोट्स ने क्लासिक ब्लू बर्ड लोगो और पुराने नाम के साथ Twitter Now को रोलआउट कर दिया।
लीगल डेस्क से इनपुट: “एलन मस्क की कंपनी ‘X’ ने इसे खुला बौद्धिक संपदा उल्लंघन (Trademark Infringement) बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन मुकदमा दर्ज होने के बाद भी साइट को लाइव रखना एक बेहद आक्रामक दांव माना जा रहा है।”
VERA AI: फेक न्यूज़ पर लगाम और ट्रस्ट स्कोर का नया फॉर्मूला
मंच सिर्फ पुराने नाम का सहारा नहीं ले रहा, बल्कि इसका मुख्य यूएसपी इसका टेक इंफ्रास्ट्रक्चर है। प्लेटफॉर्म पर शेयर होने वाले हर कंटेंट की निगरानी के लिए VERA AI नाम का एक एडवांस्ड सिस्टम तैनात किया गया है।
- रियल-टाइम फैक्ट-चेकिंग: VERA AI हर पोस्ट को स्कैन करके उसे तुरंत एक ‘ट्रस्ट स्कोर’ (Trust Score) देता है।
- भ्रामक दावों पर सीधी चोट: अगर किसी पोस्ट में गलत तथ्य पाए जाते हैं, तो उसका स्कोर तुरंत गिरा दिया जाता है।
- यूजर के हाथ में कंट्रोल: यूजर्स अपनी फीड की सेटिंग्स खुद तय कर सकते हैं कि उन्हें कम भरोसेमंद (Low-Trust) कंटेंट देखना है या सिर्फ हाई-ट्रस्ट पोस्ट।
अर्ली एक्सेस के लिए 20 डॉलर की फीस, यूजर्स पर क्या होगा असर?
फिलहाल Twitter Now सभी के लिए फ्री में उपलब्ध नहीं है। कंपनी ने इसके लिए ‘अर्ली एक्सेस’ मॉडल अपनाया है, जिसके तहत यूजर्स को 20 डॉलर (लगभग 1,650 रुपये) चुकाने होंगे।
डिजिटल एक्सपर्ट्स का मानना है कि जो यूजर्स मौजूदा ‘X’ पर बॉट्स, अत्यधिक विज्ञापनों और अनियंत्रित एल्गोरिदम से परेशान हैं, उनके लिए यह एक सुरक्षित और प्रामाणिक विकल्प बन सकता है। हालांकि, भारतीय और वैश्विक स्तर पर आम यूजर्स इतनी फीस देकर जुड़ेंगे या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है।
What Next: ब्रांड की लड़ाई या सोशल मीडिया का नया भविष्य?
प्रशासनिक और कानूनी जानकारों की नजरें अब अमेरिकी अदालत के अगले आदेश पर टिकी हैं। यदि अदालत ‘ऑपरेशन ब्लूबर्ड’ के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो यह वैश्विक कॉर्पोरेट इतिहास में ट्रेडमार्क अधिकारों की सबसे बड़ी मिसालों में से एक होगा। वहीं अगर स्टे आर्डर (Stay Order) आता है, तो साइट को तुरंत बंद भी करना पड़ सकता है। क्या नीली चिड़िया सच में मस्क के ‘X’ को पछाड़ पाएगी या यह सिर्फ एक अल्पकालिक कानूनी प्रयोग बनकर रह जाएगा, इसका फैसला आने वाले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा।











