Ranchi: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आजसू पार्टी ने खुलासा किया है कि उनके प्रमुख एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो का नाम उग्रवादियों की हिटलिस्ट में है। इस गंभीर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग पार्टी ने राज्य सरकार से की है।
पार्टी का आरोप है कि सरकार सुदेश महतो की सुरक्षा को लेकर लापरवाह है। केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर और हसन अंसारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि महतो की हत्या की साजिश के इनपुट कई बार सामने आ चुके हैं, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
पुलिस को नहीं मिली अब तक साजिश की वजह
प्रवीण प्रभाकर ने जानकारी दी कि हाल ही में गुमला जिले के कामडारा थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए पीएलएफआई कमांडर मार्टिन केरकेट्टा ने भी सुदेश महतो को टारगेट किया था। उसके पास से प्राप्त इनपुट में यह स्पष्ट हुआ कि वह 2023 में अनगड़ा क्षेत्र में हमले की योजना बना चुका था।
उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले 2005 में सिल्ली-पोगड़ा मार्ग पर केन बम लगाने की साजिश और 2013 में पीएलएफआई कमांडर जीदन गुड़िया द्वारा महतो की हत्या के लिए 5 करोड़ रुपये की सुपारी लेना, इस बात की पुष्टि करता है कि साजिश कोई नई नहीं है।

राजनीतिक साजिश के संकेत, पार्टी कराएगी उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मुलाकात
हसन अंसारी ने कहा कि यह जानना जरूरी है कि बार-बार सुदेश महतो को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि एक राजनीतिक षड्यंत्र के तहत उग्रवादियों को इस्तेमाल किया जा रहा है। जल्द ही पार्टी का प्रतिनिधिमंडल राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगा।
प्रेस वार्ता में मीडिया संयोजक परवाज खान भी मौजूद रहे और उन्होंने राज्य सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए। पार्टी ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को इस पूरे मामले की तह तक जाना चाहिए और साजिशकर्ताओं को बेनकाब करना चाहिए।
सिर्फ सुदेश ही नहीं, अन्य नेताओं की भी सुरक्षा पर संकट
आजसू नेताओं ने यह भी बताया कि 2014 में पार्टी के तत्कालीन केंद्रीय महासचिव तिलेश्वर साहू की हत्या भी पीएलएफआई द्वारा की गई थी। अब पार्टी के प्रधान महासचिव रामचंद्र सहिस की सुरक्षा भी हटा ली गई है, जो चिंता का विषय है।
नेताओं ने मांग की कि सहिस की सुरक्षा तत्काल बहाल की जाए और पूर्व में पार्टी में शामिल कराए गए उग्रवादियों की जांच भी की जाए। देव सिंह मुंडा का नाम उदाहरण के तौर पर सामने आया, जिसे साजिश के तहत आजसू में शामिल किया गया था।
आजसू पार्टी ने न सिर्फ अपने नेता सुदेश महतो की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है, बल्कि राज्य सरकार से मांग की है कि वह इस गंभीर मामले को हल्के में न ले। उग्रवादियों की हिटलिस्ट में नेताओं का नाम सामने आना सिर्फ आजसू के लिए नहीं, बल्कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी बड़ा सवाल है।








