संजय दत्त की ‘आख़िरी सवाल’ ने जीता दिल: अब साइन लैंग्वेज में रिलीज़ हुआ टीज़र

संजय दत्त की 'आख़िरी सवाल' ने जीता दिल: अब साइन लैंग्वेज में रिलीज़ हुआ टीज़र

Mumbai | बॉलीवुड के ‘बाबा’ यानी संजय दत्त एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई एक्शन सीन नहीं, बल्कि एक ऐसा इमोशनल कदम है जिसने सिनेमा जगत की सोच बदल दी है। अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘आख़िरी सवाल’ के जरिए इतिहास की अनकही परतों को उघाड़ने की तैयारी कर रहे मेकर्स ने अब इसका टीज़र ‘इंडियन साइन लैंग्वेज’ (ISL) में जारी कर दिया है। हनुमान जन्मोत्सव पर आए टीज़र ने पहले ही RSS के इतिहास को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी थी, और अब इस समावेशी (Inclusive) कदम ने आम आदमी से लेकर फिल्म क्रिटिक्स तक को झकझोर कर रख दिया है।

क्या है इस ‘इशारों वाली भाषा’ के पीछे का असली मकसद?

अक्सर बड़े बजट की फ़िल्में सिर्फ बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के पीछे भागती हैं, लेकिन ‘आख़िरी सवाल’ के मेकर्स ने एक नई लकीर खींच दी है। नेशनल अवॉर्ड विजेता निर्देशक अभिजीत मोहन वारंग और निर्माता निखिल नंदा व संजय दत्त का यह फैसला महज एक मार्केटिंग स्टंट नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के प्रति संवेदनशीलता है जो सुन नहीं सकते।

मेकर्स का स्पष्ट संदेश है: “भारत के इतिहास की यह महान गाथा हर भारतीय के लिए है, चाहे वह सुन सके या नहीं।” इस टीज़र के जरिए उन मूक-बधिर दर्शकों को भी सिनेमाई मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की गई है, जिन्हें अक्सर इग्नोर कर दिया जाता है।

RSS के अनछुए पन्नों पर आधारित है ‘आख़िरी सवाल’

फिल्म की कहानी दुनिया के सबसे बड़े संगठन RSS के उस इतिहास को खंगालती है, जिसे अब तक मुख्यधारा के सिनेमा ने छूने की हिम्मत नहीं की। उत्कर्ष नैथानी द्वारा लिखित इसकी पटकथा और डायलॉग्स इतने गहरे हैं कि टीज़र के हर सीन में एक सवाल छिपा है।

  • इंपैक्ट: यह फिल्म न केवल एक ऐतिहासिक ड्रामा है, बल्कि राष्ट्रवाद और संगठन की विचारधारा को लेकर उठने वाले सवालों का एक सिनेमाई जवाब भी हो सकती है।
  • ग्राउंड रिपोर्ट: फिल्म इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि ‘साइन लैंग्वेज’ वर्जन आने के बाद इस फिल्म की पहुँच देश के सुदूर इलाकों और दिव्यांग समुदायों तक गहराई से होगी।

कब होगी रिलीज और क्या हैं उम्मीदें?

8 मई 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली इस फिल्म को लेकर अभी से माहौल गरमाया हुआ है। पुनीत नंदा, डॉ. दीपक सिंह, गौरव दुबे और उज्जवल आनंद जैसे दिग्गजों का इस प्रोजेक्ट से जुड़ना इसकी भव्यता को दर्शाता है। संजय दत्त के लिए यह फिल्म उनके करियर का एक नया माइलस्टोन साबित हो सकती है, क्योंकि यहाँ वह एक अभिनेता के साथ-साथ एक ऐसे निर्माता के रूप में उभर रहे हैं जो ‘कंटेंट’ के साथ ‘कॉज’ (Cause) को भी तवज्जो दे रहा है।

आगे क्या होगा? जैसे-जैसे रिलीज की तारीख नजदीक आएगी, ‘आख़िरी सवाल’ को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विमर्श और तेज होने की उम्मीद है। क्या यह फिल्म बॉलीवुड में समावेशी सिनेमा (Inclusive Cinema) के एक नए युग की शुरुआत करेगी? यह देखना दिलचस्प होगा।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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