18 दिसंबर 2025 को बाजीराव मस्तानी के 10 साल पूरे हो रहे हैं। यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में दर्ज एक ऐसी उपलब्धि है, जिसने भव्यता, भावनाओं और कला के उच्चतम स्तर को परिभाषित किया। बाजीराव मस्तानी के 10 साल पूरे होने के साथ यह साफ हो जाता है कि यह फिल्म आज भी उतनी ही प्रभावशाली, जीवंत और प्रेरणादायक है, जितनी अपनी रिलीज़ के वक्त थी। संजय लीला भंसाली के विज़न, भव्य सेट्स, कालजयी संगीत और दमदार अभिनय ने इस फिल्म को एक मॉडर्न क्लासिक बना दिया।
इस लेख में हम बाजीराव मस्तानी के 10 साल के मौके पर जानेंगे फिल्म से जुड़े 10 ऐसे दिलचस्प किस्से, जो इसे सिनेमा प्रेमियों के लिए और भी खास बनाते हैं।
संजय लीला भंसाली और ऐतिहासिक प्रेम गाथाओं का जादू
जब भी भारतीय सिनेमा में भव्य ऐतिहासिक प्रेम कहानियों की बात होती है, तो संजय लीला भंसाली का नाम सबसे पहले लिया जाता है। बाजीराव मस्तानी के 10 साल इस बात का प्रमाण हैं कि भंसाली सिर्फ फिल्में नहीं बनाते, बल्कि इतिहास, संगीत और भावनाओं को कैनवास पर जीवंत कर देते हैं।
गुरु दत्त की भावनात्मक गहराई और राज कपूर की भव्यता—इन दोनों का अद्भुत संगम भंसाली के सिनेमा में साफ दिखता है। बाजीराव मस्तानी के 10 साल इस बात को दोहराते हैं कि भंसाली की सिनेमाई भाषा समय से परे है।
सालों से सजा एक सपना: बाजीराव मस्तानी का जन्म
बाजीराव मस्तानी संजय लीला भंसाली का दशकों पुराना सपना था। बाजीराव मस्तानी के 10 साल पूरे होने पर यह जानना दिलचस्प है कि भंसाली ने इस कहानी को जल्दबाज़ी में परदे पर नहीं उतारा।
उन्होंने सही समय, सही तकनीक और सबसे अहम—सही कलाकारों का इंतज़ार किया। उनका मानना था कि पेशवा बाजीराव और मस्तानी की प्रेम गाथा को वही भव्यता मिलनी चाहिए, जिसकी वह हकदार है। बाजीराव मस्तानी के 10 साल इस धैर्य और समर्पण की जीत हैं।

रणवीर सिंह का ऐतिहासिक ट्रांसफॉर्मेशन
पेशवा बाजीराव के रूप में रणवीर सिंह
बाजीराव मस्तानी के 10 साल पूरे होने पर रणवीर सिंह का नाम इस फिल्म के बिना अधूरा लगता है। पेशवा बाजीराव बनने के लिए रणवीर सिंह ने खुद को शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से पूरी तरह बदल लिया।
उन्होंने तलवारबाज़ी, घुड़सवारी और मराठा योद्धाओं की जीवनशैली को गहराई से समझा। बाजीराव मस्तानी के 10 साल इस बात के गवाह हैं कि रणवीर का यह किरदार उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
रणवीर सिंह का अभिनय सिर्फ संवादों तक सीमित नहीं था, बल्कि उनकी आंखों, हाव-भाव और ऊर्जा में बाजीराव की आत्मा झलकती थी।
मस्तानी के रूप में दीपिका पादुकोण की गरिमा
एक योद्धा और प्रेमिका का संगम
बाजीराव मस्तानी के 10 साल हमें दीपिका पादुकोण की उस परफॉर्मेंस की याद दिलाते हैं, जिसने मस्तानी को अमर बना दिया। दीपिका ने मस्तानी को सिर्फ प्रेम में डूबी एक स्त्री नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और साहस से भरी योद्धा के रूप में पेश किया।
उनकी आंखों की खामोशी, चाल की शालीनता और संवादों की गंभीरता ने मस्तानी को एक शक्तिशाली किरदार बना दिया। बाजीराव मस्तानी के 10 साल में मस्तानी आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है।
काशीबाई के रूप में प्रियंका चोपड़ा की भावनात्मक ताकत
संयम, दर्द और गरिमा की मिसाल
प्रियंका चोपड़ा का काशीबाई वाला किरदार बाजीराव मस्तानी के 10 साल में सबसे ज्यादा सराहे गए पहलुओं में से एक है। काशीबाई का दर्द, उसका आत्मसंयम और उसका त्याग—प्रियंका ने हर भावना को बेहद सादगी से निभाया।
“पिंगा” और “दीवानी मस्तानी” जैसे गीतों में प्रियंका की मौजूदगी ने कहानी के भावनात्मक टकराव को और भी गहरा कर दिया। बाजीराव मस्तानी के 10 साल में काशीबाई आज भी एक मजबूत स्त्री पात्र के रूप में याद की जाती है।
दिलवाले से बॉक्स ऑफिस टकराव
2015 में जब बाजीराव मस्तानी रिलीज़ हुई, तब इसकी सीधी टक्कर शाहरुख खान और काजोल की फिल्म दिलवाले से थी। बाजीराव मस्तानी के 10 साल पूरे होने पर यह साफ है कि यह मुकाबला सिर्फ बॉक्स ऑफिस का नहीं, बल्कि कंटेंट और भव्यता का भी था।
कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद, बाजीराव मस्तानी ने दर्शकों और समीक्षकों का दिल जीत लिया। यह फिल्म साबित करती है कि मजबूत कहानी और शानदार प्रस्तुति के आगे स्टार पावर भी झुक जाती है।
भव्य सेट्स और ऐतिहासिक दुनिया की रचना
हर फ्रेम में कला
बाजीराव मस्तानी के 10 साल में फिल्म के भव्य सेट्स आज भी उतने ही प्रभावशाली लगते हैं। मराठा साम्राज्य के महल, दरबार और युद्ध के मैदान—सब कुछ विशेष रूप से डिजाइन किया गया था।
भंसाली ने हर छोटे-बड़े डिटेल पर ध्यान दिया, ताकि दर्शक खुद को उस दौर में महसूस कर सकें। बाजीराव मस्तानी के 10 साल इस बात का सबूत हैं कि सेट डिज़ाइन भी कहानी कह सकता है।
दीवानी मस्तानी: महीनों की मेहनत का नतीजा
एक गीत, एक दृश्य कविता
“दीवानी मस्तानी” सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि एक दृश्य कविता है। बाजीराव मस्तानी के 10 साल में यह गीत आज भी उतना ही लोकप्रिय है।
इस गाने की शूटिंग कई दिनों तक चली। रोशनी, कोरियोग्राफी और भारी-भरकम कॉस्ट्यूम—हर चीज़ पर बारीकी से काम किया गया। यही वजह है कि यह गाना हिंदी सिनेमा के सबसे भव्य गीतों में गिना जाता है।

संजय लीला भंसाली: संगीतकार के रूप में जादू
बाजीराव मस्तानी के 10 साल में संगीत की भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। संजय लीला भंसाली ने एक बार फिर साबित किया कि वह सिर्फ निर्देशक ही नहीं, बल्कि बेहतरीन संगीतकार भी हैं।
“मल्हारी”, “पिंगा” और “मोहे रंग दो लाल” जैसे गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं। बाजीराव मस्तानी के 10 साल में ये गाने फिल्म की आत्मा बन चुके हैं।
नेशनल अवॉर्ड और ऐतिहासिक सम्मान
बाजीराव मस्तानी ने कई बड़े पुरस्कार अपने नाम किए, जिनमें नेशनल फिल्म अवॉर्ड और कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स शामिल हैं। बाजीराव मस्तानी के 10 साल पूरे होने पर यह साफ है कि यह फिल्म अपने दशक की सबसे सम्मानित फिल्मों में से एक है।
इन पुरस्कारों ने फिल्म की तकनीकी, कलात्मक और भावनात्मक श्रेष्ठता को आधिकारिक मान्यता दी।
भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान
बाजीराव मस्तानी के 10 साल इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय सिनेमा सिर्फ देश तक सीमित नहीं है। इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खूब सराहा गया।
भव्य दृश्य, भारतीय संस्कृति की झलक और भावनात्मक कहानी ने विदेशी दर्शकों को भी प्रभावित किया। बाजीराव मस्तानी के 10 साल भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहचान का प्रतीक हैं।
एक दशक बाद भी अमर है बाजीराव मस्तानी
बाजीराव मस्तानी के 10 साल पूरे होने के बाद भी यह फिल्म सिर्फ एक सिनेमाई अनुभव नहीं, बल्कि एक भावना है। दमदार अभिनय, कालजयी संगीत और संजय लीला भंसाली की अनोखी सोच ने इसे अमर बना दिया।
यह फिल्म आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी और यही इसकी सबसे बड़ी जीत है। बाजीराव मस्तानी के 10 साल भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास का एक चमकता हुआ अध्याय हैं।











