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Jharkhand News

रांची: ‘भगवान के घर’ में ‘भक्तों’ का महासंग्राम! 14 लाख का वो ‘रहस्य’ जिसने पहाड़ी मंदिर को बनाया अखाड़ा

रांची। अगर आप सोच रहे थे कि पहाड़ी मंदिर की सीढ़ियां सिर्फ सांसें फुलाने के काम आती हैं, तो सोमवार को वहां कुछ और ही ‘हाइ-वोल्टेज’ ड्रामा चल रहा था। रांची का गौरव और आस्था का केंद्र ‘पहाड़ी मंदिर‘ सोमवार को किसी पवित्र धाम जैसा नहीं, बल्कि किसी ‘बॉलीवुुड एक्शन फिल्म’ के सेट जैसा नजर आया। शिव के दरबार में शांति की जगह ‘तू-तू, मैं-मैं’ और ‘हाय-हाय’ के जयकारे गूंज रहे थे।

जब ‘भोले की फौज’ ने किया ‘सिस्टम’ को घेरा

दोपहर का वक्त था, सूरज चढ़ रहा था, लेकिन उससे ज्यादा पारा चढ़ा हुआ था ‘भोले की फौज’ का। हिंदूवादी नेता भैरव सिंह की अगुवाई में समर्थकों का हुजूम जब मंदिर पहुंचा, तो लगा मानो कोई मोर्चा जीतने आए हों। मुद्दा था— ‘प्रसाद का पैसा और 14 लाख का गबन!’

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आरोप लगाया गया कि मंदिर के न्यास बोर्ड (Trust Board) ने करीब 14 लाख रुपये की ऐसी ‘जादुई’ निकासी की है, जिसका हिसाब-किताब ढूंढने पर भी नहीं मिल रहा। भक्तों का सीधा सवाल— “हमने तो दान दिया था मंदिर की पेंट-पॉलिश और विकास के लिए, ये पैसा व्यक्तिगत नामों पर ‘फुर्र’ कैसे हो गया?”

‘हम शरीफ क्या हुए, आपने तो गबन ही कर लिया!’

दूसरी तरफ ‘मंदिर विकास समिति’ अपनी फाइलों और कागजों के साथ किला लड़ाने को तैयार थी। उनका कहना है, “भाई साहब, हम कोई नौसिखिए नहीं हैं। एक-एक चवन्नी का टेंडर हुआ है, सरकारी मुहर लगी है।”

  • सीन 1: एक तरफ से नारेबाजी— “न्यास बोर्ड भ्रष्टाचार बंद करो!”
  • सीन 2: दूसरी तरफ से जवाब— “सारे पेपर मौजूद हैं, आरोप लगाने से पहले चश्मा लगाओ!”
  • क्लाइमेक्स: पुलिस बीच में खड़ी होकर बस ये मना रही थी कि बात बातों से आगे न बढ़े।

क्या है 14 लाख का वो ‘सीक्रेट’ ट्रांजैक्शन?

खबर की गहराई में उतरें तो पता चलता है कि विवाद पिछले एक साल के खर्चे को लेकर है। आरोप है कि न्यास बोर्ड के कुछ सदस्यों के नाम पर मोटी रकम ट्रांसफर हुई। अब भक्तों का तर्क ये है कि अगर पैसा मंदिर के लिए था, तो खातों में ‘नाम’ इंसानों के क्यों हैं? वहीं प्रशासन की तरफ से अब तक सिर्फ ‘जांच की घुट्टी’ पिलाई गई है, ठोस कार्रवाई के नाम पर फिलहाल सन्नाटा है।

क्या अब ‘ऑडिट’ ही बनेगा असली ‘त्रिशूल’?

मामला अब सिर्फ 14 लाख का नहीं रह गया है, ये साख और आस्था का ‘कॉकटेल’ बन चुका है। रांची की जनता अब पूछ रही है कि उनके द्वारा श्रद्धा से डाला गया एक-एक रुपया कहां जा रहा है? अगर प्रशासन ने जल्दी ही ‘पारदर्शी ऑडिट’ का ताला नहीं खोला, तो पहाड़ी मंदिर की सीढ़ियों पर विरोध का शोर और तेज होने वाला है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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