रांची: झारखंड की राजधानी में मंगलवार की दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब उत्पाद विभाग की विशेष टीम ने ‘मौत के सौदागर’ कहे जाने वाले कुख्यात शराब माफिया नरेश सिंघानिया को नामकुम इलाके से धर दबोचा। यह वही नाम है, जिसका जिक्र आते ही साल 2017 के वो जख्म ताज़ा हो जाते हैं, जब रांची की सड़कों पर जहरीली शराब ने दर्जनों लाशें बिछा दी थीं। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद अब राज्य की सीमाओं पर चल रहे अवैध शराब के सिंडिकेट में खलबली मच गई है।
नामकुम में आधी रात का ऑपरेशन: भारी खेप बरामद
उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि नरेश सिंघानिया जेल से छूटने के बाद एक बार फिर अपना नेटवर्क सक्रिय कर चुका है। मंगलवार को विभाग की टीम ने नामकुम में घेराबंदी की और नरेश को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसकी निशानदेही पर गुप्त ठिकानों पर छापेमारी की गई, जहाँ से भारी मात्रा में अवैध और मिलावटी शराब बरामद हुई है।
अधिकारियों का मानना है कि यह शराब पंचायत चुनावों या आने वाले त्योहारों को देखते हुए खपाने की तैयारी थी, जो एक बार फिर बड़े हादसे का सबब बन सकती थी।
2017 का वो खौफनाक मंजर: जब जैप जवानों ने भी गंवाई थी जान
नरेश सिंघानिया कोई मामूली अपराधी नहीं है। इसका इतिहास रांची के सबसे काले अध्यायों में से एक से जुड़ा है।
- साल 2017: रांची में जहरीली शराब पीने से दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।
- जवानों की शहादत: इस त्रासदी में झारखंड आर्म्स पुलिस (JAP) के दो जवानों ने भी दम तोड़ दिया था, जिससे पूरे महकमे में आक्रोश फैल गया था।
- सिस्टम को चुनौती: 2017 के बाद वह लंबे समय तक फरार रहा। साल 2021 में उसे बड़ी मुश्किल से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जेल से बाहर आते ही उसने फिर से मौत की भट्ठी सुलगा ली।
ग्राउंड रिपोर्ट: जेल की दीवारें भी नहीं रोक पाईं सिंडिकेट
हमारी पड़ताल बताती है कि नरेश सिंघानिया का नेटवर्क इतना गहरा है कि जेल जाने के बाद भी उसके गुर्गे सक्रिय रहे। स्थानीय लोगों के अनुसार, नामकुम और आसपास के इलाकों में अवैध शराब की सप्लाई चेन फिर से मजबूत हो रही थी। सवाल यह उठता है कि आखिर बार-बार जेल जाने के बावजूद यह माफिया इतना बेखौफ कैसे है? क्या इसे सिस्टम में बैठे किसी सफेदपोश का संरक्षण प्राप्त है?
‘जहरीली शराब’ यानी धीमी मौत
डॉक्टरों और फोरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की अवैध शराब में मिथाइल अल्कोहल की मात्रा बढ़ जाने से यह सीधे नर्वस सिस्टम पर हमला करती है। नरेश जैसे माफिया मुनाफे के चक्कर में लोगों की जिंदगी से खेलते हैं। उत्पाद विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “इस बार हम चार्जशीट इतनी मजबूत बनाएंगे कि उसे आसानी से जमानत न मिल सके।”










