रांची: झारखंड की राजधानी में आज न्याय व्यवस्था सड़क पर उतरी, लेकिन किसी को सजा देने नहीं, बल्कि हर गरीब और बेबस को उसका हक दिलाने। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश पर रांची व्यवहार न्यायालय से एक ऐसी ‘प्रभात फेरी’ निकली, जिसने शहर को यह संदेश दिया कि कानून सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि आम आदमी के दरवाजे पर है।
90 दिनों तक चलने वाले इस ‘विधिक जागरूकता महाभियान’ का आगाज गुब्बारे उड़ाकर और प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया गया। यह सिर्फ एक सरकारी आयोजन नहीं है, बल्कि उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो कचहरी के चक्कर काटने से डरते हैं या सरकारी योजनाओं से अनजान हैं।
फिरायालाल चौक पर जब थम गईं नजरें: नुक्कड़ नाटक से ‘बाल विवाह’ पर प्रहार
जैसे ही यह प्रभात फेरी फिरायालाल चौक पहुंची, वहां का नजारा बदल गया। ‘रंगदर्पण’ टीम के कलाकारों ने जब बाल विवाह की कुरीति पर नुक्कड़ नाटक शुरू किया, तो राह चलते लोग ठिठक गए।
न्यायायुक्त श्री अनिल कुमार मिश्रा-1 ने दो टूक शब्दों में कहा, “जागरूकता ही वह हथियार है जिससे हम समाज की बुराइयों को खत्म कर सकते हैं। अगर आप जागरूक हैं, तभी सरकार की योजनाओं का लाभ आप तक पहुंचेगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के अभाव में लोग आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं, जिन्हें मुख्यधारा में लाना इस 90 दिवसीय अभियान का प्राथमिक लक्ष्य है।
आखिर क्यों जरूरी है यह 90 दिनों का प्लान?
रांची डालसा (DALSA) के सचिव श्री राकेश रोशन ने ग्राउंड जीरो की हकीकत बयां करते हुए कहा कि अक्सर गांव का आदमी वकील की फीस और कानूनी पेचीदगियों के डर से चुप रह जाता है।
- जन-जन तक न्याय: पीएलवी (PLV) और एलएडीसीएस (LADCS) के सदस्य अब सुदूर गांवों के हर घर की कुंडी खटखटाएंगे।
- मुफ्त कानूनी सहायता: जो लोग वकील नहीं कर सकते, उन्हें सरकारी स्तर पर कानूनी मदद दी जाएगी।
- सरकारी योजनाओं का सेतु: राशन, पेंशन और अन्य सरकारी लाभों में आ रही कानूनी अड़चनों को मौके पर सुलझाने की कोशिश होगी।
विद्यार्थी बने ‘न्याय के दूत’
इस अभियान की सबसे खास बात इसमें युवाओं की भागीदारी है। सीएम एक्सीलेंस स्कूल के छात्र-छात्राओं और एन.एस.एस (NSS) के वालंटियर्स ने हाथों में तख्तियां लेकर न्याय का नारा बुलंद किया। न्यायिक पदाधिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते इन छात्रों ने दिखाया कि भविष्य का भारत अपने अधिकारों के प्रति कितना सजग है।
आगे क्या? सिस्टम का अगला कदम
अगले 3 महीनों तक रांची के हर ब्लॉक, पंचायत और टोले में कैंप लगाए जाएंगे। विधिक सेवा प्राधिकार का लक्ष्य है कि इस अवधि के भीतर कम से कम 50,000 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रूप से कानूनी परामर्श और सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए। प्रशासन अब डिजिटल माध्यमों का भी सहारा ले रहा है ताकि ‘न्याय सबके लिए’ सिर्फ एक नारा न रहे, बल्कि हकीकत बने।










