बारिश बनी आफत: झारखंड में बाढ़ जैसी तबाही, 4 की मौत, 13 घायल

बारिश बनी आफत: झारखंड में बाढ़ जैसी तबाही, 4 की मौत, 13 घायल

रांची: झारखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने तबाही मचा दी है। बीते पांच दिनों से रुक-रुक कर हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। कई जिलों में हालात गंभीर होते जा रहे हैं और नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है।

अब तक इस आपदा में 4 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें तीन बच्चे शामिल हैं। 13 से अधिक लोग घायल हुए हैं, कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। कई पुल बह चुके हैं और सैकड़ों वाहन पानी में फंसे हुए हैं।

रेड अलर्ट पर झारखंड: दक्षिणी हिस्सों में भारी खतरा

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रांची, खूंटी, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और आसपास के इलाकों में रेड अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।

विभाग का कहना है कि यह बारिश सामान्य मौसमी गतिविधियों से कहीं अधिक तीव्र है, जो जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। विशेषज्ञों ने चेताया है कि ऐसी स्थिति आगे और बिगड़ सकती है।

इसे भी पढ़ें: झारखंड के 24 जिलों में भारी बारिश का कहर, ऑरेंज अलर्ट जारी

हर जिले से आ रही हैं दर्दनाक खबरें

चाईबासा: चक्रधरपुर में एक मिट्टी का मकान ढह गया, जिसमें एक महिला की मौत हो गई और तीन बच्चे घायल हो गए।
रांची: तमाड़ इलाके में घर गिरने से छह साल की बच्ची की जान चली गई।
खूंटी: मुरहू में निर्माणाधीन कुएं में दो बच्चे दब गए, तोरपा-सिमडेगा रोड पर पुल भी ध्वस्त हो गया।
जमशेदपुर: टाटा-रांची हाईवे पूरी तरह जलमग्न हो गया है। आशियाना वुडलैंड कॉलोनी में नाव से लोगों को निकाला गया।
रामगढ़: भैरवी नदी उफान पर है और छिलका पुल के ऊपर से पानी बह रहा है।
हजारीबाग: एक बस हादसे में 10 लोग घायल हो गए हैं, जिनमें तीन की हालत गंभीर है।

प्रशासन की अपील: घर में रहें, सतर्क रहें

राज्य प्रशासन ने आपात राहत अभियान तेज कर दिया है। एनडीआरएफ और SDRF की टीमें फील्ड में तैनात हैं। जिन इलाकों में जलभराव है, वहां नाव और ट्रैक्टर की मदद से लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजा जा रहा है।

प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि जब तक बेहद जरूरी न हो, तब तक घर से बाहर न निकलें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।

जलवायु परिवर्तन से बढ़ती बाढ़ की घटनाएं

“जर्नल ऑफ क्लाइमेट” में छपी 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया में मॉनसून पहले से ज्यादा अनियमित और उग्र होता जा रहा है। झारखंड जैसी पहाड़ी और नदीनुमा भूभाग वाले राज्यों में इसका असर सबसे अधिक दिख रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमनदों का पिघलना और वर्षा पैटर्न में बदलाव इस आपदा को और भयावह बना रहे हैं।

झारखंड इस समय एक बड़ी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। प्रशासन, बचाव टीमें और आम जनता को मिलकर इस संकट से लड़ना होगा। अगले 48 घंटे और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। मौसम अपडेट और सरकारी निर्देशों के लिए जुड़े रहें।

Subhash Shekhar

एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार, कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट और SEO-फोकस्ड न्यूज़ राइटर हैं। वे झारखंड और बिहार से जुड़े राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य और करंट अफेयर्स पर तथ्यपरक और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment