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यह खबर कहाँ की हैझारखंड

पेपर लीक पर भड़का गुस्सा: रांची से दिल्ली तक ‘छात्रों की गूंज’ आंदोलन तेज

Ranchi | देशभर के करोड़ों छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। नीट (NEET) में गड़बड़ी और ताबड़तोड़ पेपर लीक के खिलाफ कांग्रेस ने “छात्रों की गूंज” अभियान के तहत केंद्र सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है।

रांची के ऐतिहासिक निर्मला कॉलेज में आयोजित छात्र संवाद में युवाओं का दर्द छलक पड़ा। दिल्ली में शांतिपूर्ण संसद मार्च पर हुए लाठीचार्ज और राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने के विरोध में अब झारखंड की राजधानी से लेकर देश भर के 100 से अधिक शहरों में विरोध की आग सुलग रही है।

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आइए समझते हैं कि आखिर इस पूरे विवाद के केंद्र में क्या है और क्यों देश का युवा आज सड़कों पर उतरने को मजबूर हुआ है।

ग्राउंड रिपोर्ट: रांची में गूंजी ‘छात्रों की आवाज’, शाम को निकलेगा मशाल जुलूस

[इस घटना से जुड़ी तस्वीर/वीडियो यहाँ देखें]

शाम को निकलेगा मशाल जुलूस

निर्मला कॉलेज परिसर में छात्र संवाद के दौरान माहौल बेहद गरम नजर आया। बेरमो से विधायक श्री कुमार जयमंगल सिंह और अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक शशि पन्ना की मौजूदगी में सैकड़ों छात्रों ने परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

कार्यक्रम में मौजूद बेरमो विधायक कुमार जयमंगल सिंह ने सीधा हमला बोलते हुए कहा:

“छात्र कोई अनुचित मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि परीक्षाएं निष्पक्ष हों, भविष्य सुरक्षित हो और पेपर लीक के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। जब दिल्ली में राहुल गांधी जी युवाओं की आवाज बनकर पीएम आवास की तरफ बढ़े, तो सरकार ने संवाद की जगह पुलिस का दमनकारी रास्ता चुना। हम इस तानाशाही का विरोध शाम को मशाल जुलूस निकालकर करेंगे।”

स्थानीय स्तर पर इस आंदोलन का असर अब झारखंड के सभी बड़े कोचिंग हब और विश्वविद्यालयों में दिखने लगा है।

NTA की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल: 595 अंक वाले छात्र को मिले सिर्फ 60?

इस पूरे आंदोलन की सबसे बड़ी वजह राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली बनी है। री-नीट (Re-NEET 2026) के बाद जो नतीजे सामने आए हैं, उसने छात्रों को स्तब्ध कर दिया है।

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ग्राउंड पर कई अभ्यर्थियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि NTA द्वारा अपलोड की गई ओएमआर (OMR) शीट और अंतिम स्कोरकार्ड में जमीन-आसमान का अंतर है:

  • केस 1: जहां छात्र को 595 अंक की उम्मीद थी, वहां स्कोरकार्ड में मात्र 60 अंक दर्ज मिले।
  • केस 2: 609 अंक की जगह 167 अंक थमा दिए गए।
  • केस 3: 702 अंक पाने वाले मेधावी छात्र का स्कोर घटाकर 87 अंक कर दिया गया।

हद तो तब हो गई जब आपत्तियां दर्ज कराने के नाम पर प्रति प्रश्न ₹200 की भारी-भरकम फीस वसूली गई। एक छात्र ने अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए ₹27,800 खर्च किए, जिसके बदले उन्हें कथित तौर पर कानूनी कार्रवाई की धमकियां दी गईं।

12 साल, 152 पेपर लीक और 7.5 करोड़ भविष्य दांव पर

यह संकट केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश में परीक्षा प्रणाली किस कदर चरमरा चुकी है:

आंकड़ा / मुद्दाप्रभाव और विवरण
पेपर लीक घटनाएंबीते 12 वर्षों में कम से कम 152 बार पेपर लीक की घटनाएं दर्ज की गईं।
प्रभावित छात्रदेश भर के 7.5 करोड़ से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका।
मानसिक तनावरी-नीट से पहले केवल तनाव के कारण 21 NEET अभ्यर्थियों ने आत्महत्या जैसी दुखद राह चुनी।
अन्य गड़बड़ियांOdisha में नई किताबों में 1,678 कमियां, UGC-NET लीक और CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग में धुंधली कापियों का विवाद।

कांग्रेस की आर-पार की जंग: NTA को भंग करने समेत ये हैं 8 मुख्य मांगें

राहुल गांधी द्वारा कोटा और देहरादून से शुरू किए गए “छात्रों की गूंज” अभियान को अब 100 शहरों तक विस्तार दिया जा रहा है। विपक्षी दल ने सरकार के सामने आठ स्पष्ट मांगें रखी हैं:

  • 1. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा लिया जाए।
  • 2. NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) को तुरंत भंग किया जाए।
  • 3. छात्र लाठीचार्ज पर गृह मंत्री संसद में अपना आधिकारिक बयान दें।
  • 4. परीक्षाओं और भर्तियों के लिए कानूनन बाध्यकारी वार्षिक कैलेंडर लागू हो।
  • 5. परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर संसद में विशेष चर्चा कराई जाए।
  • 6. निष्पक्षता की विफलता और शिकायतों पर समयबद्ध सख्त कार्रवाई हो।
  • 7. प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन की स्वतंत्र न्यायिक जांच हो।
  • 8. पेपर लीक माफिया और उन्हें मिले राजनीतिक संरक्षण की गहन जांच की जाए।
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लाखों रुपए कोचिंग, फॉर्म और यात्रा पर खर्च करने वाले देश के करोड़ों युवाओं के पास अब सब्र का बांध टूट चुका है। यदि सरकार ने जल्द ही संसद में विशेष चर्चा कराकर NTA की जवाबदेही तय नहीं की, तो यह आंदोलन केवल दिल्ली या रांची तक सीमित नहीं रहेगा।

कांग्रेस द्वारा 100 प्रमुख शहरों में चलाए जा रहे इस राष्ट्रव्यापी अभियान से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में परीक्षा सुधार का यह मुद्दा सड़क से लेकर संसद के आगामी सत्रों तक केंद्र सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनने वाला है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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