Ranchi: झारखंड में शराब बिक्री को लेकर हाल ही में शुरू हुई ई-लॉटरी प्रक्रिया ने एक बार फिर शराब व्यवसायियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। 8 अगस्त से शुरू हुई यह प्रक्रिया 20 अगस्त तक चलेगी और 22 अगस्त को इसके परिणाम घोषित होंगे। सरकार का दावा है कि कर में 5% की कटौती से शराब सस्ती होगी, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि वास्तविकता इससे अलग है।
मंत्री के दावे और हकीकत
राज्य के माननीय मंत्री ने घोषणा की थी कि कर घटने के बाद झारखंड में शराब सस्ती हो जाएगी। लेकिन झारखंड शराब व्यापारी संघ के महासचिव सुबोध कुमार जायसवाल के मुताबिक, लोकप्रिय ब्रांड जैसे ब्लेंडर प्राइड की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जो पहले ₹1250 में मिल रही थी, अब भी उसी दाम पर उपलब्ध होगी। वहीं, महंगे ब्रांड जैसे ब्लैक लेवल में ₹900 की कमी आई है, लेकिन इसका लाभ केवल चुनिंदा ग्राहकों को होगा। देसी शराब के दाम जरूर घटे हैं, मगर बड़े शहरों में इसकी मांग सीमित है।
ई-लॉटरी और लाइसेंस की शर्तें
इस बार का लाइसेंस 5 साल के लिए होगा और व्यापारियों का मानना है कि साधारण दुकान भी ₹1 करोड़ से कम लागत में चलाना मुश्किल है। साथ ही एमजीआर (Monthly Guarantee Revenue) बहुत अधिक तय किया गया है, जिससे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ गया है। यदि तय तारीख तक पूरी राशि जमा नहीं होती, तो बकाया राशि पर प्रतिदिन 1% का जुर्माना लगेगा, जिसे व्यापारी अनुचित बता रहे हैं।
नोटिफिकेशन और लागत निर्धारण में देरी
व्यापारियों के अनुसार, अभी तक सेल टैक्स विभाग की ओर से आधिकारिक नोटिफिकेशन और ईडीपी (Ex-Distillery Price) जारी नहीं हुआ है। ईडीपी के तहत कंपनियों को नए रेट का कॉस्ट कार्ड जारी करना होता है, जिससे प्रिंटिंग और सप्लाई की प्रक्रिया समय पर हो सके। इस देरी से 1 सितंबर से दुकानों के समय पर खुलने में बाधा आ सकती है।
वीडियो में और ज्यादा जानें
व्यापारियों की मुख्य चिंताएं
- एमजीआर की उच्च दर से वित्तीय दबाव।
- बकाया पर 1% प्रतिदिन जुर्माना।
- नए रेट और कॉस्ट कार्ड जारी होने में देरी।
- पहले महीने में बिक्री घाटे में रहने की आशंका।
- देसी और इंग्लिश शराब की एक साथ बिक्री से छवि पर असर।
संभावित असर
व्यापारियों का कहना है कि शुरुआती एक सप्ताह माल की कमी रहेगी और पुराने रेट के स्टॉक को नए रेट में बेचने को लेकर ग्राहकों से विवाद हो सकता है। सरकार को सलाह दी गई है कि प्रक्रिया और नोटिफिकेशन समय से जारी करे ताकि व्यापारियों को तैयारी का पर्याप्त समय मिल सके।
झारखंड में शराब व्यवसाय इस समय संक्रमण काल से गुजर रहा है। सरकार के दावे और ज़मीनी हकीकत के बीच का यह अंतर आने वाले दिनों में व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।









