Ranchi | झारखंड में मतदाता सूची (Voter List) को त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने अब कमर कस ली है। राज्य में जल्द ही ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR – Special Intensive Revision) अभियान शुरू होने वाला है। खबर है कि 8 जनवरी को चुनाव आयोग की एक उच्च स्तरीय टीम तैयारियों की समीक्षा करने झारखंड आ रही है। सबसे बड़ी खबर यह है कि इस अभियान के तहत हर घर में गणना फॉर्म भेजा जाएगा, जिसे भरना सभी मतदाताओं के लिए अनिवार्य होगा।
फरवरी में एसआईआर (SIR) की औपचारिक घोषणा संभव
राज्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में काम युद्धस्तर पर जारी है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची को आधार बनाकर अब तक 78% पैरेंटल मैपिंग (Parental Mapping) का काम पूरा कर लिया गया है।
आयोग की टीम 8 जनवरी को रांची पहुंचकर अब तक हुए कार्यों की समीक्षा करेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि 10 फरवरी के बाद कभी भी राज्य में एसआईआर (SIR) की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से अवैध नामों को हटाना और पात्र नागरिकों को जोड़ना है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान? (Why is SIR Important)
चुनाव आयोग हर साल मतदाता सूची का संक्षिप्त पुनरीक्षण (Summary Revision) करता है, लेकिन आयोग का मानना है कि यह प्रक्रिया उतनी गहन नहीं होती, जिससे कई खामियां रह जाती हैं।
- 12 लाख संदिग्ध नाम: अब तक की जांच में करीब 12 लाख ऐसे मतदाताओं के नाम चिह्नित किए गए हैं, जो या तो मृत पाए गए हैं, लंबे समय से अपने पते से गायब हैं, या फिर उनके नाम दो अलग-अलग जगहों पर दर्ज हैं।
- नये सिरे से तैयारी: एसआईआर (SIR) के जरिए पूरी मतदाता सूची को नए सिरे से तैयार किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी वैध मतदाता सूची से बाहर न हो और कोई भी अवैध व्यक्ति इसमें शामिल न हो।
घर-घर पहुंचेंगे बीएलओ, भरना होगा फॉर्म
इस अभियान का सबसे अहम हिस्सा ‘डोर-टू-डोर सर्वे’ है। एसआईआर के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) प्रत्येक घर तक गणना फॉर्म पहुंचाएंगे।
महत्वपूर्ण नोट: यह फॉर्म भरना सभी मतदाताओं के लिए अनिवार्य होगा, भले ही उनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में पहले से दर्ज क्यों न हो।
हालांकि, जिन मतदाताओं का नाम 2003 की सूची में है, उन्हें किसी प्रकार के अतिरिक्त दस्तावेज देने की बाध्यता नहीं होगी। लेकिन जिनका नाम सूची में नहीं है, उन्हें अपनी नागरिकता सिद्ध करनी होगी।
ये हैं वो 11 दस्तावेज, जो नागरिकता करेंगे सिद्ध
जिन मतदाताओं का नाम 2003 की सूची में नहीं है, उन्हें फॉर्म के साथ आयोग द्वारा निर्धारित 11 दस्तावेजों में से कोई एक जमा करना होगा। यह नियम नए जुड़ने वाले नामों पर भी सख्ती से लागू होगा।
मान्य दस्तावेजों की सूची:
- सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी का पहचान पत्र।
- 1 जुलाई 1987 से पहले जारी बैंक, डाकघर, एलआईसी या स्थानीय प्रशासन के दस्तावेज।
- जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)।
- पासपोर्ट।
- शैक्षणिक प्रमाण पत्र (Educational Certificate)।
- निवास प्रमाण पत्र।
- वन अधिकार पत्र।
- जाति प्रमाण पत्र।
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से जुड़े दस्तावेज (यदि लागू हो)।
- परिवार रजिस्टर।
- जमीन या मकान से जुड़े दस्तावेज।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं
एक महत्वपूर्ण अपडेट यह भी है कि पहचान के रूप में आधार कार्ड दिखाया जा सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, आधार कार्ड के आधार पर नागरिकता का दावा नहीं किया जा सकता।
आधार कार्ड केवल पहचान सत्यापित करने के लिए उपयोग किया जा सकेगा। सूची में नाम दर्ज कराने के लिए ऊपर दिए गए 11 दस्तावेजों में से किसी एक का होना अनिवार्य होगा। यदि इन दस्तावेजों के अलावा कोई अन्य वैध दस्तावेज आपकी नागरिकता सिद्ध करता है, तो आयोग उस पर भी विचार कर सकता है।
आगे क्या? (What Next)
8 जनवरी को आयोग की टीम के दौरे के बाद राज्य प्रशासन इस अभियान को जमीन पर उतारने की तैयारी तेज कर देगा। आम जनता के लिए यह सलाह है कि वे अपने पुराने दस्तावेज तैयार रखें और बीएलओ के आने पर सही जानकारी उपलब्ध कराएं। झारखंड के पत्रकारों और जागरूक नागरिकों के लिए यह एक बड़ा अपडेट है, क्योंकि यह सीधे तौर पर राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे को प्रभावित करेगा।
Disclaimer: यह जानकारी प्रभात खबर (2 जनवरी 2026) में प्रकाशित समाचार रिपोर्ट पर आधारित है।









