Ranchi | झारखंड में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR 2026) को लेकर सियासी दलों के बीच हलचल तेज हो गई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने साफ कर दिया है कि राज्य में अब कोई भी अयोग्य व्यक्ति वोटर लिस्ट में जगह नहीं बना पाएगा।
गुरुवार को निर्वाचन सदन में हुई एक हाई-लेवल बैठक में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के सामने नया मास्टर प्लान जारी किया गया। चुनाव आयोग इस बार ‘ह्यूमन-फर्स्ट’ अप्रोच के साथ काम कर रहा है, जिसके तहत 30 जून से बीएलओ (BLO) सीधे आपके दरवाजे पर दस्तक देंगे।
घर-घर पहुंचेंगे बीएलओ: बंद घरों के लिए ‘थ्री-स्ट्राइक’ नियम
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने ग्राउंड स्तर की कार्ययोजना साझा करते हुए बताया कि आगामी 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर इन्यूमरेशन फॉर्म भरेंगे। इस दौरान कोई पोलिंग स्टेशन कैंप नहीं लगेगा, बल्कि पूरी प्रक्रिया डोर-टू-डोर होगी।
बंद घरों के लिए क्या है गाइडलाइन?
- 3 बार का नियम: अगर सर्वे के दौरान किसी का घर बंद मिलता है, तो बीएलओ को डेटा जुटाने के लिए कम से कम तीन बार उस पते पर जाना अनिवार्य होगा।
- पहले से भरा फॉर्म: नागरिकों को आंशिक रूप से पहले से भरा हुआ इन्यूमरेशन फॉर्म दो प्रतियों में दिया जाएगा ताकि उनका समय बच सके।
[यहाँ घर-घर सर्वे करते बीएलओ या निर्वाचन सदन की बैठक की तस्वीर एम्बेड करें]
5 श्रेणियों के वोटर्स लिस्ट से होंगे बाहर, ASDD पर कड़ा रुख

चुनाव आयोग ने इस बार पारदर्शी और शुद्ध वोटर लिस्ट बनाने के लिए बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार 15 प्रकार की विसंगतियों को दूर करने के लिए जमीनी स्तर पर अधिकारियों को विशेष ट्रेनिंग दी गई है।
इन लोगों के कटेंगे नाम:
बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, प्ररूप मतदाता सूची से 5 विशेष श्रेणियों के लोगों के नाम हटा दिए जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से:
- अनुपस्थित (Absent) मतदाता
- मृत (Dead) नागरिक
- डुप्लिकेट (Duplicate) एंट्रीज
- स्थायी रूप से स्थानांतरित (Shifted) लोग
- फॉर्म पर हस्ताक्षर से इनकार करने वाले
ग्राउंड जीरो से नोट: इन पांचों श्रेणियों (ASDD) के वोटर्स की पहचान कर बूथ स्तर पर राजनीतिक दलों के एजेंटों (BLA-2) की मंजूरी और हस्ताक्षर के बाद ही अंतिम सूची से नाम हटाए जाएंगे।
दस्तावेज का झंझट खत्म: ‘सेल्फ’ और ‘पैरेंटल’ मैपिंग लागू
आम जनता को राहत देते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि जिन मतदाताओं का नाम पिछले एसआईआर रोल में दर्ज है, उन्हें किसी नए दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। आयोग इसके लिए ‘सेल्फ’ या ‘पैरेंटल’ मैपिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इसके अलावा, सांसद, विधायक, पूर्व जनप्रतिनिधियों और सिविल व सैन्य क्षेत्र के सीनियर अफसरों की पहचान प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी।
नए वोटर्स के लिए क्या है व्यवस्था?
जो युवा 1 अक्टूबर 2026 तक वोटर बनने की योग्यता रखते हैं, उनके लिए हर बीएलओ को 30 ‘फॉर्म-6’ दिए जाएंगे। हालांकि, इनका नाम 5 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट रोल में नहीं दिखेगा, क्योंकि इनका डिजिटलाइजेशन प्रारूप प्रकाशन के बाद होना तय हुआ है।
विदेशी नागरिकों और फर्जी जानकारी पर जेल की तैयारी
के. रवि कुमार ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यह पूरी प्रक्रिया केवल भारतीय नागरिकों के लिए है। अगर किसी गैर-नागरिक या नागरिकता छोड़ चुके व्यक्ति ने गलत जानकारी देकर फॉर्म जमा किया, तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत यह एक गंभीर और दंडनीय अपराध माना जाएगा।
कमजोर वर्गों, बुजुर्गों और विशेषकर SC, ST व PVTG (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) आबादी की मदद के लिए हर मतदान केंद्र पर विशेष स्वयंसेवक मुस्तैद रहेंगे।
What Next: अब आगे क्या होगा? (महत्वपूर्ण तारीखें)
चुनाव आयोग के शेड्यूल के अनुसार, राज्य में यह महाअभियान इन चरणों में पूरा होगा:
- 20 जून से 29 जून 2026: प्रशिक्षण और मुद्रण का कार्य।
- 30 जून से 29 जुलाई 2026: बीएलओ का घर-घर दौरा और एन्यूमरेशन।
- 29 जुलाई 2026: मतदान केंद्रों का युक्तिकरण (रेशनलाइजेशन)।
- 05 अगस्त 2026: प्रारूप मतदाता सूची (Draft Roll) का प्रकाशन।
- 05 अगस्त से 04 सितंबर 2026: दावों और आपत्तियों का निपटारा।
- 07 अक्टूबर 2026: अंतिम त्रुटिहीन मतदाता सूची (Final Voter List) का प्रकाशन।
प्रशासन 30 जून को सुबह 11 बजे चुनाव पाठशाला और वोटर अवेयरनेस फोरम के जरिए राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहा है। भ्रामक खबरों पर लगाम कसने के लिए सोशल मीडिया की चौबीसों घंटे मॉनिटरिंग की जाएगी।











