निकाय चुनावों पर BJP का ‘मास्टरस्ट्रोक’: बंद कमरे में फाइनल हुए नाम, अब विरोधियों की नींद उड़ाने वाली है ये लिस्ट

निकाय चुनावों पर BJP का 'मास्टरस्ट्रोक': बंद कमरे में फाइनल हुए नाम, अब विरोधियों की नींद उड़ाने वाली है ये लिस्ट

Ranchi | झारखंड में स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मी के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी बिसात बिछा दी है। शनिवार को प्रदेश कार्यालय में घंटों चली कोर ग्रुप की मैराथन बैठक में फूंक-फूंक कर कदम रखते हुए हर सीट पर दो-दो संभावित नामों का पैनल तैयार कर लिया गया है। बड़ी खबर यह है कि रविवार शाम या सोमवार तक पार्टी अपने ‘खास’ चेहरों के नामों पर मुहर लगाकर उनकी अनौपचारिक घोषणा कर देगी, जिससे राज्य का सियासी पारा चढ़ना तय है।

चूंकि चुनाव गैरदलीय आधार पर हो रहे हैं, इसलिए भाजपा सीधे सिंबल देने के बजाय “समर्थित प्रत्याशी” के फॉर्मूले पर काम कर रही है। पार्टी का लक्ष्य न केवल जीत हासिल करना है, बल्कि जमीन पर अपनी पकड़ को और मजबूत करना है।

दिग्गजों का जमावड़ा: बंद कमरे में बनी जीत की रणनीति

शनिवार को हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में झारखंड भाजपा के तमाम दिग्गज एक छत के नीचे जुटे। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडामधु कोड़ा जैसे कद्दावर नेताओं ने घंटों माथापच्ची की। संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह और दीपक प्रकाश की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि पार्टी इस चुनाव को 2029 के विधानसभा चुनावों के सेमीफाइनल के तौर पर देख रही है।

इन चेहरों पर दांव खेलने की तैयारी (Inside Report)

सूत्रों के हवाले से जो नाम छनकर सामने आ रहे हैं, वे चौंकाने वाले और रणनीतिक हैं:

  • रांची: मेयर पद के लिए पूर्व वार्ड पार्षद रोशनी खलको का नाम सबसे आगे चल रहा है, लेकिन अशोक बड़ाइक को बड़े नेताओं का साथ मिलना मुकाबले को दिलचस्प बना रहा है।
  • धनबाद: कोयलांचल की इस हॉट सीट पर शेखर अग्रवाल के नाम की गूंज सबसे ज्यादा है।
  • देवघर: बाबा नगरी में बाबा बलियासे और रीता चौरसिया के बीच कड़ी टक्कर है, जहाँ जिला गुटबाजी को सुलझाना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती होगी।

बगावत रोकने के लिए ‘प्लान-बी’ तैयार

निकाय चुनावों में सबसे बड़ा डर अपनों की नाराजगी का होता है। कोर कमेटी ने इस पर विशेष चर्चा की है। यदि किसी सक्रिय कार्यकर्ता को पार्टी का समर्थन नहीं मिलता है और वह निर्दलीय मैदान में उतरने की सोचता है, तो उसे मनाने के लिए वरिष्ठ नेताओं की एक विशेष टीम तैनात की गई है।

ग्राउंड रिपोर्ट: भाजपा का मानना है कि अगर कार्यकर्ता आपस में भिड़े, तो इसका सीधा फायदा सत्ताधारी दल को मिल सकता है। इसलिए, ‘एक सीट-एक नाम’ के मंत्र पर जोर दिया जा रहा है।

आम जनता और राज्य की सियासत पर क्या होगा असर?

निकाय चुनाव सीधे तौर पर शहर की सफाई, सड़क, पानी और ड्रेनेज जैसे मुद्दों से जुड़े होते हैं। भाजपा का इन चुनावों में आक्रामक होना यह दर्शाता है कि वह शहरी वोट बैंक पर अपनी पकड़ ढीली नहीं होने देना चाहती। यदि भाजपा समर्थित उम्मीदवार बड़ी संख्या में जीतते हैं, तो यह वर्तमान राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ एक बड़ा जनादेश माना जाएगा।

आगे क्या?

अब सबकी निगाहें रविवार शाम पर टिकी हैं। भाजपा की यह ‘अनौपचारिक लिस्ट’ न केवल प्रत्याशियों का भविष्य तय करेगी, बल्कि झारखंड की स्थानीय राजनीति में एक नया मोड़ भी लाएगी। क्या पार्टी भीतरघात को रोक पाएगी? यह देखना दिलचस्प होगा।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment