Ranchi | झारखंड की राजधानी रांची के चुटिया इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जिला प्रशासन की टीम ने रिहायशी इलाकों में चल रहे ‘मौत के कारखाने’ पर धावा बोल दिया। उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री के कड़े निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में गैस सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग और कालाबाजारी के एक बड़े नेक्सस का भंडाफोड़ हुआ है। प्रशासन ने मौके से 265 गैस सिलेंडर जब्त किए हैं, जो घनी आबादी के बीच किसी बड़े धमाके का इंतजार कर रहे थे।
यह कार्रवाई केवल एक छापेमारी नहीं है, बल्कि उन सिंडिकेट्स के लिए चेतावनी है जो चंद पैसों के लिए आम जनता की जान जोखिम में डाल रहे हैं। चुटिया थाना क्षेत्र के अलग-अलग ठिकानों पर हुई इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक‘ ने यह साफ कर दिया है कि राजधानी में अब गैस माफिया की खैर नहीं है।
रिहायशी इलाकों में छिपा था ‘बमों’ का जखीरा: ग्राउंड रिपोर्ट
प्रशासन को पिछले काफी समय से गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं कि चुटिया के रिहायशी इलाकों में घरेलू सिलेंडरों से गैस चोरी कर उन्हें छोटे सिलेंडरों में भरा जा रहा है। SDO सदर के नेतृत्व में जब टीम उत्तम कुमार साहु और अमन सिंह के ठिकानों पर पहुंची, तो नजारा चौंकाने वाला था।
कहाँ-कहाँ हुई छापेमारी और क्या मिला?
- उत्तम कुमार साहु का परिसर: यहाँ से 10 सिलेंडर और रिफिलिंग पाइप बरामद हुए।
- साई कॉलोनी (अमन सिंह का मकान): किराए के कमरे में चल रहे इस खेल में 85 सिलेंडर मिले। यहाँ कमर्शियल और घरेलू दोनों तरह के सिलेंडरों का अवैध स्टॉक था।
- शारदा कॉलोनी: यहाँ सबसे बड़ी खेप मिली, जहाँ 110 सिलेंडर ठूस-ठूस कर रखे गए थे।
कुल मिलाकर 265 सिलेंडर जब्त कर गैस एजेंसियों को सौंप दिए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत FIR दर्ज कर ली है।

बड़ा सवाल: आपकी रसोई तक पहुँचने वाली गैस कितनी सुरक्षित?
अवैध रिफिलिंग का यह खेल केवल कालाबाजारी तक सीमित नहीं है। जब एक बड़े सिलेंडर से छोटे सिलेंडर में गैस ट्रांसफर की जाती है, तो सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं।
- कम वजन का खेल: कालाबाजारी करने वाले लोग घरेलू सिलेंडर से 2-3 किलो गैस निकालकर उसे ऊंचे दामों पर बेच देते हैं। यानी आप पूरे पैसे देकर भी कम गैस पा रहे हैं।
- ब्लास्ट का डर: बिना किसी सेफ्टी वाल्व और घटिया पाइपों के इस्तेमाल से रिफिलिंग के दौरान आग लगने का खतरा 200% बढ़ जाता है। चुटिया जैसी घनी आबादी में एक छोटी सी चिंगारी सैकड़ों घरों को राख कर सकती थी।
प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति: अगला कदम क्या?
उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान थमने वाला नहीं है। प्रशासन अब उन कड़ियों को जोड़ रहा है जो इन अवैध सेंटर्स तक बल्क में सिलेंडर पहुँचाते थे।
अधिकारी का बयान: “हम गैस एजेंसियों की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं। बिना मिलीभगत के इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडर एक जगह जमा नहीं हो सकते। दोषियों को जेल भेजा जाएगा।”
आम जनता के लिए ज़रूरी सलाह
प्रशासन ने अपील की है कि नागरिक केवल अधिकृत वेंडर्स से ही गैस लें। अगर कोई वेंडर सील टूटी हुई या कम वजन का सिलेंडर दे, या कहीं अवैध रिफिलिंग दिखे, तो तुरंत जिला प्रशासन या नजदीकी थाने को सूचित करें। आपकी एक सूचना बड़े हादसे को टाल सकती है।










