Ranchi | झारखंड में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हुई हाई-लेवल बैठक में What’s में सूखा संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग की है।
मौसम विभाग के चौंकाने वाले आंकड़ों के बीच हुई इस ऑनलाइन समीक्षा बैठक में झारखंड सरकार ने अपना पूरा कंटीजेंसी प्लान देश के सामने रखा। राज्य ने साफ कर दिया है कि अगर केंद्र से समय पर मदद नहीं मिली, तो खेतों में दरारें पड़ना तय है।
दरअसल, 1 जून से 17 जून के बीच देश में जहां 74 मिमी बारिश होनी थी, वहां महज 37 मिमी पानी गिरा है। यानी सीधे तौर पर 40 फीसदी की कमी। मौसम विभाग की इस चेतावनी ने झारखंड के किसानों के माथे पर बल ला दिए हैं, जिसके बाद राज्य सरकार पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गई है।
’मई में ही तैयार था कंटीजेंसी प्लान’—ग्राउंड से लाइव रिपोर्ट
रांची और आसपास के ग्रामीण इलाकों का दौरा करने पर साफ दिखता है कि किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं। इस बीच, बैठक में अपनी बात रखते हुए कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा:
“झारखंड सरकार ने संभावित अलनीनो प्रभाव को भांपते हुए मई महीने में ही राज्यव्यापी कंटीजेंसी प्लान तैयार कर लिया था। हम जिला और प्रखंड स्तर पर लगातार किसान कार्यशालाएं कर रहे हैं ताकि बदलते मौसम के हिसाब से खेती को ढाला जा सके।”
[यहाँ खेतों में कम बारिश के कारण खड़ी चुनौतियों को दर्शाती तस्वीर/वीडियो एम्बेड करें]
मक्का, मड़ुवा और मधुमक्खी पालन: सरकार का ‘प्लान बी’
धरातल पर स्थिति यह है कि पारंपरिक धान की खेती पर इस बार संकट के बादल हैं। ऐसे में झारखंड सरकार ‘क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर’ यानी जलवायु-अनुकूल फसलों की तरफ रुख कर रही है।
- वैकल्पिक फसलें: सरकार किसानों को कम पानी में उगने वाले मड़ुवा, मक्का और दलहनी फसलों की बुवाई के लिए प्रेरित कर रही है।
- कमाई के नए साधन: नुकसान की भरपाई के लिए ग्रामीण इलाकों में मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, लाह उत्पादन और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
खाद की किल्लत पर भी तकरार, केंद्र से मांगी पूरी सप्लाइ
संकट सिर्फ आसमान से नहीं, सिस्टम से भी है। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने खाद की कमी का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया। झारखंड ने केंद्र से 3 लाख 90 हजार मीट्रिक टन उर्वरक की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने केवल 3 लाख 20 हजार मीट्रिक टन पर ही सहमति दी है। कृषि मंत्री ने साफ कहा कि इस संकट काल में किसानों को पूरी खाद समय पर मिलनी ही चाहिए।
आगे क्या? (What Next)
झारखंड सरकार की मुस्तैदी और ‘प्लान बी’ कागजों पर मजबूत दिख रहा है, लेकिन सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि आगामी दो हफ्तों में मानसून क्या रुख अपनाता है। यदि केंद्र सरकार विशेष राहत पैकेज को मंजूरी देती है और उर्वरकों की कमी को दूर करती है, तो झारखंड में सूखा संकट की मार को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। अब देखना यह है कि दिल्ली दरबार से रांची को कितनी जल्दी और कितनी बड़ी राहत मिलती है।











