Hazaribagh | झारखंड में अफसरशाही, पेपर लीक और जयराम महतो विवाद पर BJP विधायक प्रदीप प्रसाद ने हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ तीखा मोर्चा खोल दिया है।
झारखंड की राजनीति में छात्र आंदोलन, कथित पेपर लीक और बेलगाम अफसरशाही को लेकर घमासान चरम पर पहुंच गया है। हजारीबाग से भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने राज्य की कानून-व्यवस्था और भर्ती प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रदीप प्रसाद ने खुलकर कहा कि राज्य में जनप्रतिनिधियों की सुनवाई नहीं हो रही है। अधिकारियों के बेलगाम रवैये के कारण विधायकों की मानसिक स्थिति खराब हो रही है और इसी वजह से जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
गाली नहीं देंगे तो ब्रेन हेमरेज हो जाएगा: प्रदीप प्रसाद
जेएलकेएम विधायक जयराम महतो और पुलिस एसोसिएशन के बीच चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने सिस्टम की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभद्र भाषा का इस्तेमाल सही नहीं है, लेकिन वर्तमान हालात ऐसे बन गए हैं कि अधिकारी सीधी बात सुनते ही नहीं हैं।
“अगर हम लोग जनता का काम कराने के लिए अधिकारियों पर दबाव न बनाएं और गाली न दें, तो हमारा ब्रेन हेमरेज हो जाएगा। जनता का दबाव इतना ज्यादा है और अधिकारी इतने बेखौफ हैं कि जनप्रतिनिधियों की बात कचरे के डिब्बे में डाल दी जाती है।” — प्रदीप प्रसाद, भाजपा विधायक
उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार में अधिकारियों के भीतर शासन का कोई डर नहीं बचा है। ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल के चलते ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक आम जनता त्रस्त है।
‘2 हजार सीट पर 2 लाख का खेल’, CBI जांच की मांग
राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन पर विधायक ने हेमंत सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज राज्य में हर परीक्षा के पदों की बोली लग रही है, जिससे गरीब और किसान परिवारों के मेधावी छात्र ठगे जा रहे हैं।
- CBI जांच जरूरी: भर्ती घोटालों की जांच सीआईडी के बजाय केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
- दोषियों पर एक्शन, मेधावियों को राहत: पूरी परीक्षा रद्द करने के बजाय गड़बड़ी करने वाले बिचौलियों और अफसरों पर कार्रवाई हो, जबकि मेहनत से पास हुए अभ्यर्थियों के भविष्य की रक्षा की जाए।
- बिचौलियों का नेटवर्क: सरकार के नाम पर 2 हजार सीटों की जगह दलाल बाजार में 2 लाख युवाओं से पैसे ऐंठ रहे हैं।
MMDR एक्ट और राजस्व पर भी घेरा
खनन क्षेत्र में केंद्र के MMDR संशोधन बिल के विरोध पर भाजपा विधायक ने सरकार की नीति को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने तर्क दिया कि 45 फीसदी खनिज संपदा होने के बावजूद झारखंड का राजस्व ओडिशा से काफी पीछे है। अनाप-शनाप उपकर (Cess) लगाने के कारण स्थानीय उद्योग ठप हो रहे हैं और अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है।
झारखंड में सुप्रीम कोर्ट के रुख और छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच यह देखना अहम होगा कि हेमंत सरकार विपक्षी हमलों और प्रशासनिक मनमानी पर क्या सुधारात्मक कदम उठाती है।











