Ranchi | झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बीच एक बड़े विवाद ने तूल पकड़ लिया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखकर चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जेएमएम ने वोटर्स की गोपनीयता और मोबाइल ऐप के इस्तेमाल को लेकर तुरंत स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
पार्टी के महासचिव विनोद कुमार पाण्डेय द्वारा जारी इस पत्र के बाद अब राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वाकई चुनाव आयोग के नए नियमों से वोटर्स की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं?
ग्रामीण इलाकों में कम साक्षरता और तकनीकी जानकारी के अभाव को देखते हुए जेएमएम ने वोटर्स के लिए एक और खास मांग रखी है। पार्टी का कहना है कि अगर इस प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं बनाया गया, तो कई योग्य नागरिकों के नाम मतदाता सूची से छूट सकते हैं।
ECINet ऐप और वोटर्स की फोटो: आखिर JMM को क्या है आपत्ति?
जेएमएम द्वारा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को भेजे गए आधिकारिक पत्र (पत्रांक JMM/477/F-54/2026-2027) में सीधे तौर पर बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLOs) और मतदाताओं के सामने आ रही व्यावहारिक दिक्कतों का जिक्र किया गया है। ग्राउंड से मिल रही खबरों के मुताबिक, राज्य के अलग-अलग जिलों में गृह-गणना (Enumeration) के दौरान ‘ECINet मोबाइल ऐप’ से मतदाताओं की लाइव तस्वीरें खींचे जाने की बातें सामने आ रही हैं।
जेएमएम महासचिव विनोद कुमार पाण्डेय ने पत्र में लिखा: “राज्य के विभिन्न जिलों से यह जानकारी मिल रही है कि गणना प्रपत्र भरने के दौरान ECINet ऐप के माध्यम से मतदाताओं के फोटोग्राफ लिए जा रहे हैं। चुनाव आयोग को तुरंत स्पष्ट करना चाहिए कि क्या गृह-गणना चरण में इस ऐप द्वारा मतदाताओं की फोटो लेना अनिवार्य है या अनुमत है? इस संबंध में सभी अधिकारियों के लिए एक समान दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।”
[झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा चुनाव आयोग को भेजा गया पत्र यहाँ देखें]

ग्रामीण क्षेत्रों में त्रुटियों का डर, अतिरिक्त फॉर्म देने की मांग
पार्टी ने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग का हवाला देते हुए कहा कि गणना प्रपत्र (Enumeration Form) भरते समय आम वोटर्स, खासकर ग्रामीण और कम साक्षरता वाले क्षेत्रों के लोगों से अनजाने में गलतियां हो सकती हैं। एक बार फॉर्म में गलती हो जाने पर उसे सुधारने का कोई दूसरा मौका नहीं मिल पा रहा है।
इस समस्या के समाधान के लिए जेएमएम ने चुनाव आयोग से मांग की है कि प्रत्येक मतदाता को मूल गणना प्रपत्र के साथ एक अतिरिक्त (फोटोकॉपी या जेरॉक्स) प्रपत्र भी उपलब्ध कराया जाए। इससे अगर पहली बार में कोई गलती होती है, तो मतदाता नया प्रपत्र भरकर सही जानकारी दर्ज करा सकेगा।
क्या होगा इसका स्थानीय प्रभाव?
झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों में तकनीकी नेटवर्क और डिजिटल साक्षरता हमेशा से एक चुनौती रही है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया में किसी भी नए मोबाइल ऐप का असमंजस भरा इस्तेमाल वोटर्स के बीच डर पैदा कर सकता है। अगर निर्वाचन आयोग इस पर तुरंत सफाई नहीं देता है, तो BLOs के लिए भी घर-घर जाकर डेटा कलेक्ट करना मुश्किल हो जाएगा, जिससे पूरी पुनरीक्षण प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की इस आपत्ति के बाद अब गेंद पूरी तरह से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पाले में है। निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए आयोग को जल्द ही एक स्पष्ट परिपत्र (Circular) जारी करना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आयोग जेएमएम की मांग को स्वीकार करते हुए वोटर्स को अतिरिक्त प्रपत्र मुहैया कराता है या फिर ECINet ऐप के नियमों को लेकर जारी भ्रम को दूर करने के लिए कोई नया कदम उठाता है।











