61वें फेमिना मिस इंडिया में दिखा भारत का दम: क्या ‘विश्व सूत्रा’ बदल देगा भारतीय हैंडलूम की वैश्विक तकदीर? जानिए पूरी सच्चाई

61वें फेमिना मिस इंडिया में दिखा भारत का दम: क्या 'विश्व सूत्रा' बदल देगा भारतीय हैंडलूम की वैश्विक तकदीर? जानिए पूरी सच्चाई

Mumbai | क्या आपने कभी सोचा है कि सदियों पुराने भारतीय करघों की गूँज पेरिस या मिलान के रैंप पर इतनी मजबूती से सुनाई देगी? 61वें फेमिना मिस इंडिया के ग्रैंड फिनाले में कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने न केवल फैशन जगत को चौंका दिया बल्कि पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति की ताकत का अहसास करा दिया। ‘विश्व सूत्रा – वीव्स ऑफ इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ के भव्य प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि भारत की पारंपरिक बुनाई अब केवल गांवों तक सीमित नहीं, बल्कि ग्लोबल लग्जरी का नया चेहरा है।

इस मेगा इवेंट में देश भर की 30 राज्य विजेताओं ने जब अपने-अपने राज्यों की खास हैंडलबूम विरासत को पहनकर रैंप वॉक किया, तो वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया। KIIT भुवनेश्वर द्वारा प्रस्तुत और रजनीगंधा पर्ल्स के सहयोग से सजे इस मंच ने भारतीय बुनकरों की उंगलियों के जादू को एक नई पहचान दी है।

वैशाली एस और वस्त्र मंत्रालय की जुगलबंदी: परंपरा का मॉडर्न अवतार

इस पूरी पहल के पीछे भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय (हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय) और मशहूर डिजाइनर वैशाली एस का विजन था। वैशाली एस, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कपड़ों को पहचान दिलाने के लिए जानी जाती हैं, उन्होंने हर राज्य की बुनाई को एक ‘समकालीन’ टच दिया।

वैशाली एस और वस्त्र मंत्रालय की जुगलबंदी: परंपरा का मॉडर्न अवतार

30 राज्य, 30 कहानियां और एक मंच

  • विविधता का संगम: कश्मीर की पश्मीना से लेकर दक्षिण की कांजीवरम और ओडिशा के संबलपुरी सिल्क तक, हर परिधान एक अलग कहानी कह रहा था।
  • मॉडर्न डिजाइन: यह केवल साड़ी या सूट का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उन कपड़ों को आधुनिक गाउन और कंटेम्परेरी ड्रेप्स में बदला गया था, जो आज की ग्लोबल पीढ़ी को आकर्षित करते हैं।
  • बुनकरों को सम्मान: इस आयोजन का सबसे बड़ा असर ग्राउंड लेवल पर उन लाखों बुनकरों पर पड़ेगा, जिनकी कला को अक्सर गुमनाम मान लिया जाता था।

आम आदमी और भारतीय बाजार पर क्या होगा इसका असर?

यह आयोजन महज एक फैशन शो नहीं है, बल्कि एक बड़ा आर्थिक संकेत है। जब फेमिना मिस इंडिया जैसे बड़े मंच पर हैंडलूम को प्रमोट किया जाता है, तो इसके सीधे प्रभाव देखने को मिलते हैं:

  1. लोकल इकोनॉमी को बूस्ट: डिमांड बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों के बुनकरों को बेहतर दाम और सीधा बाजार मिलेगा।
  2. युवाओं का रुझान: ‘विश्व सूत्रा’ ने साबित किया है कि खादी या हैंडलूम ‘पुराने जमाने’ की चीज नहीं, बल्कि ‘अल्ट्रा-मॉडर्न’ फैशन है। इससे स्वदेशी कपड़ों की बिक्री में भारी उछाल आने की उम्मीद है।
  3. चीन और सिंथेटिक कपड़ों को चुनौती: भारतीय प्राकृतिक धागों और बुनाई को बढ़ावा मिलने से सस्ते सिंथेटिक इम्पोर्टेड कपड़ों का बाजार कमजोर होगा।
आम आदमी और भारतीय बाजार पर क्या होगा इसका असर?

क्यों चर्चा में है KIIT और रजनीगंधा की यह पार्टनरशिप?

KIIT भुवनेश्वर ने शिक्षा के साथ-साथ कला और संस्कृति के संरक्षण में जो भूमिका निभाई है, वह काबिले तारीफ है। जानकारों का मानना है कि जब शैक्षणिक संस्थान और कॉर्पोरेट जगत (Rajnigandha Pearls) हाथ मिलाते हैं, तभी ऐसी बड़ी पहल को जमीन पर उतारा जा सकता है। इस शोकेस ने यह संदेश दिया है कि भारतीय फैशन का भविष्य ‘सस्टेनेबिलिटी’ में है, और सस्टेनेबिलिटी भारत के डीएनए में बसी है।

‘विश्व सूत्रा’ ने एक ऐसी लकीर खींच दी है जिसे पार करना अब अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के लिए भी चुनौती होगा। प्रशासन और सरकार का अगला कदम इन डिजाइनों को ग्लोबल रिटेल स्टोर्स तक पहुंचाना होना चाहिए। क्या हम आने वाले समय में न्यूयॉर्क या लंदन की सड़कों पर भारतीय ‘विश्व सूत्रा’ के चर्चे देखेंगे? मौजूदा उत्साह को देखकर तो यही लगता है कि भारतीय हैंडलूम का स्वर्णिम युग शुरू हो चुका है।

इसे भी पढ़ें: क्वीन दीपिका का नया मुकाम: LVMH प्राइज़ 2025 की एंबेसडर और ज्यूरी मेंबर

इसे भी पढ़ें: बॉलीवुड के दबंग सलमान खान: 60 की उम्र में भी 40 जैसे दिखने वाले सुपरस्टार का नया अवतार

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment