दिल्‍ली में छाया घना स्मॉग, AQI लगातार ‘बहुत खराब’ श्रेणी में

दिल्‍ली में छाया घना स्मॉग, AQI लगातार ‘बहुत खराब’ श्रेणी में

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का संकट एक बार फिर गहराता दिख रहा है। कई इलाकों में घने स्मॉग की परत छाई होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, कई स्थानों पर AQI खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। सुबह और शाम के समय दृश्यता बेहद घट गई है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

दिल्ली के कई इलाकों में AQI खतरे की सीमा पार

आनंद विहार में प्रदूषण का स्तर सबसे गंभीर दर्ज किया गया है। यहां AQI 325 तक पहुंच गया, जिसे ‘बहुत खराब’ श्रेणी में माना जाता है। इसी तरह ITO क्षेत्र में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। निरंतर बढ़ रहे प्रदूषण के कारण यह इलाके धुंध की मोटी परत से ढके हुए दिखाई दे रहे हैं।

इंडिया गेट और कर्तव्य पथ के आसपास भी स्मॉग की मोटी चादर फैल गई है। पर्यटक स्थल होने के बावजूद, इन इलाकों में आने-जाने वालों की संख्या में कमी देखी जा रही है। CPCB के अनुसार, यहां AQI 267 दर्ज किया गया है, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि ‘बहुत खराब’ जैसी स्थिति नहीं, फिर भी यह स्तर स्वास्थ्य पर असर डालने के लिए काफी है।

अक्षरधाम परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भी हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है। यहां का AQI ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया है। इसी तरह धौला कुआं और AIIMS क्षेत्र में भी प्रदूषण का स्तर लगातार खराब स्थिति में बना हुआ है, जिसके कारण वहाँ मरीजों और अस्पताल आने-जाने वालों पर खतरा बढ़ रहा है।

संसद में भी उठी प्रदूषण पर गंभीर चर्चा की मांग

दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता अब संसद तक पहुंच गई है। शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने वायु प्रदूषण को “बेहद गंभीर मुद्दा” बताते हुए कहा कि इसके समाधान पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि AQI के बढ़ते स्तर के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं और सरकार को इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने अनुरोध किया कि स्मॉग और प्रदूषण पर संसद में कम से कम एक दिन की विशेष चर्चा हो ताकि साझा समाधान निकाला जा सके।

दिल्ली में स्मॉग की यह स्थिति न केवल मौसम परिवर्तन के कारण है, बल्कि बढ़ते वाहन, निर्माण कार्य, पराली जलाना और औद्योगिक उत्सर्जन भी इसके बड़े कारण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वायु प्रदूषण का यह संकट और गंभीर हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने, मास्क पहनने और एयर-प्यूरिफायर का उपयोग करने की सलाह दे रहे हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण स्तर ने सरकार के साथ-साथ नागरिकों के लिए भी चिंताओं को बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में AQI को लेकर और गिरावट की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में यह जरूरी है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर प्रदूषण के इस संकट से निपटने के लिए तत्काल और प्रभावी उपाय लागू करें।

Subhash Shekhar

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