प्रकाशित:1 hour पहले | शाम 3:06अपडेटेड:Sep 24, 2026 | शाम 3:06⏱️ पढ़ने का समय:4 मिनट
Ranchi | झारखंड की राजधानी रांची में चिकित्सा जगत का अब तक का सबसे बड़ा राष्ट्रीय समागम शुरू होने जा रहा है। ऑल इंडिया ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी (AIOS) की 5वीं मिड-टर्म राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की मेजबानी पहली बार रांची को मिली है।
25 से 27 सितंबर तक होटल चाणक्य बीएनआर में आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से 1,000 से अधिक शीर्ष नेत्र रोग विशेषज्ञ, शोधकर्ता और शिक्षाविद जुटेंगे।
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कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल के सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोजकों ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक आयोजन से राज्य के दूर-दराज के मरीजों को भी विश्वस्तरीय नेत्र उपचार की सुविधा मिल सकेगी।
रांची बनी देश की ‘विजन कैपिटल’: 1000 से ज्यादा नेत्र विशेषज्ञों का जमावड़ा
राजधानी के होटल चाणक्य बीएनआर में तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में आधुनिक नेत्र चिकित्सा, रोबोटिक्स, उन्नत डायग्नोस्टिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों पर गहन विमर्श होगा। राज्य के चिकित्सा इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब राष्ट्रीय स्तर के नेत्र सर्जनों का इतना बड़ा महासंगम झारखंड की धरती पर आयोजित किया जा रहा है।
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”अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा विश्वस्तरीय इलाज”: आयोजकों के बड़े बोल
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आयोजन समिति की सेक्रेटरी डॉ. भारती कश्यप ने कहा:
“AIOS की 5वीं मिड-टर्म कॉन्फ्रेंस का रांची में होना झारखंड के लिए ऐतिहासिक है। हमारा उद्देश्य रांची को राष्ट्रीय अकादमिक और वैज्ञानिक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इससे आधुनिक चिकित्सा और सर्जिकल तकनीकों के आदान-प्रदान से स्थानीय डॉक्टरों की दक्षता बढ़ेगी, जिसका सीधा फायदा राज्य के मरीजों को मिलेगा। अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।”
वहीं, आयोजन के चेयरमैन डॉ. बी. पी. कश्यप ने रेखांकित किया:
“यह सम्मेलन झारखंड में नेत्र चिकित्सा के नए युग की शुरुआत है। हमारा मुख्य फोकस देश के शीर्ष विशेषज्ञों के अनुभवों को स्थानीय और युवा डॉक्टरों तक पहुंचाना है, ताकि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विश्वस्तरीय नेत्र चिकित्सा पहुंच सके।”
जटिल विकारों और अंधापन निवारण पर सीधी चर्चा
सम्मेलन की तकनीकी रूपरेखा साझा करते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का ब्योरा दिया:
सर्जिकल बारीकियों का अनुभव:डॉ. प्रीतेश प्रणॉय के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के विख्यात सर्जनों से रूबरू होकर स्थानीय चिकित्सकों को जटिलतम मामलों से निपटने का प्रत्यक्ष व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
युवा डॉक्टरों के लिए बड़ा मंच:डॉ. निलेंदु मिश्रा ने बताया कि पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों और युवा नेत्र डॉक्टरों के लिए विशेष वैज्ञानिक सत्र और केस डिस्कशन आयोजित होंगे, जिससे आधुनिक शोध व क्लीनिकल गाइडलाइंस को समझने में मदद मिलेगी।
एआई और आधुनिक लेजर का दखल:डॉ. सुजेत समंता ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत लेजर तकनीकों के समावेश से राज्य में अंधापन निवारण अभियान को एक नई दिशा मिलेगी।
झारखंड के आम मरीजों के लिए इसके क्या मायने हैं?
इस राष्ट्रीय महासम्मेलन का सबसे बड़ा लाभ राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली और आम जनता को मिलने वाला है। अब तक कॉर्निया, रेटिना और जटिल मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए मरीजों को दिल्ली, हैदराबाद या चेन्नई जैसे शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था। इस ऐतिहासिक सम्मेलन के जरिए आधुनिक क्लिनिकल प्रोटोकॉल और एआई-संचालित तकनीकों के स्थानीय डॉक्टरों तक पहुंचने से झारखंड खुद नेत्र चिकित्सा के एक प्रमुख हब के रूप में उभरेगा।
सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।