प्रेस क्लब में पत्रकारों पर हमला, कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गुंडई चरम पर

प्रेस क्लब में पत्रकारों पर हमला, कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गुंडई चरम पर

Dhanbad: धनबाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार को ऐसा हंगामा किया जिसने पूरे पत्रकारिता जगत को हिला कर रख दिया। पहले तो आपस में ही भिड़े, और फिर जब पत्रकारों ने उनकी करतूतों को कैमरे में कैद करना चाहा, तो उन्हीं पर टूट पड़े। लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया।

रणधीर वर्मा चौक पर शुरू हुआ यह बवाल जल्द ही धनबाद प्रेस क्लब तक पहुँच गया। कार्यकर्ताओं ने न सिर्फ क्लब में घुसकर पत्रकारों से मारपीट की, बल्कि उनके मोबाइल फोन भी छीन लिए। हालाँकि बाद में मोबाइल लौटा दिए गए, पर तब तक मामला काफी बिगड़ चुका था।

पत्रकारों के साथ की गई हिंसा पर मचा बवाल

इस घटना में दैनिक जागरण के एक छायाकार को गंभीर चोटें आई हैं। बताया जा रहा है कि उनकी नाक से ब्लीडिंग हुई और कैमरे भी क्षतिग्रस्त हो गए। धनबाद के पत्रकारों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है और उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

धनबाद प्रेस क्लब के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि इस हमले में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राशीद रजा अंसारी के बेटे सैफ अंसारी, कैफ अंसारी और उनके दोनों भाइयों का नाम सामने आ रहा है। उन्होंने क्लब के अधिकारियों से भी धक्का-मुक्की की।

धरना के नाम पर बवाल, राहुल-सोनिया के समर्थन में जुटे थे कार्यकर्ता

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस कार्यकर्ता आयकर चौक पर राहुल गांधी और सोनिया गांधी के समर्थन में धरना दे रहे थे। ईडी की पूछताछ से नाराज ये कार्यकर्ता यह मांग कर रहे थे कि उन्हें बार-बार तलब न किया जाए।

लेकिन इसी बीच कुछ नेता रणधीर वर्मा चौक की ओर निकल पड़े और वहां आपसी झगड़े में उलझ गए। स्थिति तब और बिगड़ गई जब उन्होंने आसपास मौजूद पत्रकारों पर हमला बोल दिया।

कांग्रेस नेताओं ने मांगी माफी, लेकिन पत्रकार नहीं माने

घटना के बाद कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस क्लब पहुंचकर माफी मांगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन पत्रकार समुदाय इस माफी से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला हैं।

धनबाद पत्रकार संघ और प्रेस क्लब ने संयुक्त रूप से इस हमले की निंदा की है और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जाए।

धनबाद की यह घटना यह दर्शाती है कि राजनीतिक कार्यकर्ता जब कानून को हाथ में लेते हैं, तो लोकतंत्र की नींव हिलने लगती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितना सख्त कदम उठाता है, ताकि भविष्य में प्रेस की स्वतंत्रता पर कोई आंच न आए।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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