ब्रेकिंग न्यूज़
लोड हो रहा है... ताज़ा खबरों के लिए बने रहें...
Advertisement
Jharkhand News

आदिवासी एकता महाजुटान रैली पर बवाल, कांग्रेस और चर्च पर बरसे संगठन

रांची। झारखंड की सियासत में ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ को लेकर भारी घमासान शुरू हो गया है। सामाजिक स्तर पर बुलाई गई इस रैली के महज़ 12 घंटे के भीतर कांग्रेस और गठबंधन सरकार के शक्ति प्रदर्शन में तब्दील होने से आदिवासी समाज में तीव्र आक्रोश देखा जा रहा है।

तमाम आदिवासी संगठनों ने इस पूरे घटनाक्रम पर मोर्चा खोल दिया है। संगठनों का सीधा आरोप है कि चर्च प्रायोजित इस आयोजन को राजनीतिक ढाल बनाकर आदिवासी समाज की पहचान और नेतृत्व को हाईजैक करने की सोची-समझी साजिश रची गई।

Advertisement

परंपरागत आदिवासी प्रतिनिधियों ने संयुक्त बयान जारी कर इस आयोजन को पूरी तरह ‘विफल और राजनीतिक स्टंट’ करार दिया है। इस विरोध के बाद राज्य की सियासत और सामाजिक समीकरणों में बड़ा भूचाल आ गया है।

[इस घटना से जुड़ी तस्वीर/वीडियो यहाँ देखें: संयुक्त प्रेस वार्ता करते विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि]

12 घंटे में बदला मंच का मिजाज: सामाजिक एकता से कांग्रेस गठबंधन का शक्ति प्रदर्शन

ग्राउंड से मिल रही सीधी रिपोर्ट के मुताबिक, जिस कार्यक्रम की नींव ‘आदिवासी एकता’ के नाम पर रखी गई थी, तारीख नजदीक आते ही उसका स्वरूप पूरी तरह बदल गया। स्थानीय संगठनों ने आरोप लगाया कि जैसे ही पर्दे के पीछे से चर्च की सक्रियता सामने आई, अंदरूनी विरोध तेज हो गया।

विरोध से बचने के लिए रातों-रात रणनीति बदली गई और 30 तारीख आते-आते महज 12 घंटे में इस सामाजिक मंच को कांग्रेस-गठबंधन सरकार की आधिकारिक रैली का रूप दे दिया गया। इससे पारंपरिक आदिवासी समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

बंधु तिर्की पर फूटा गुस्सा: ‘चर्च और सत्ता के सहारे नेतृत्व हथियाने की चाल’

झारखंड के प्रमुख आदिवासी संगठनों ने संयुक्त प्रेस बयान जारी कर पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता बंधु तिर्की पर तीखा हमला बोला है।

“पूर्व मंत्री बंधु तिर्की इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड हैं और चर्च का सबसे बड़ा चेहरा हैं। उनकी मंशा है कि आदिवासियों का पूरा नेतृत्व केवल उनके और चर्च के हाथों में सिमट कर रह जाए। हमारे सीधे-सादे आदिवासी समाज को बरगलाने की यह चाल अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”संयुक्त बयान, आदिवासी संगठन

संगठनों ने दो टूक चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया:

  • भविष्य में चर्च समर्थित समूह अपने मसीही, ईसाई, ख्रीस्तीय या विश्वासी समाज के नाम पर जो चाहें आंदोलन करें, उस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी।
  • मूल आदिवासी पहचान और पारंपरिक रूढ़िवादी समाज के नाम पर राजनीतिक या धार्मिक अजेंडा चलाने की कोशिश हुई, तो पूरे राज्य में इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

[इस घटना से जुड़ी तस्वीर/वीडियो यहाँ देखें: रैली ग्राउंड और विरोध प्रदर्शन के विजुअल्स]

विरोध में एकजुट हुए प्रमुख संगठन

इस संयुक्त प्रेस वार्ता में झारखंड के कई शीर्ष सामाजिक अगुआ एक मंच पर नजर आए। विरोध दर्ज कराने वालों में मुख्य रूप से शामिल रहे:

  • जगलाल पहान (मुख्य पहान)
  • बबलू मुंडा (अध्यक्ष, केंद्रीय सरना समिति)
  • अशोक मुंडा (प्रधान महासचिव, केंद्रीय सरना समिति)
  • संदीप उरांव (क्षेत्रीय संयोजक, जनजाति सुरक्षा मंच)
  • मेघा उरांव (अध्यक्ष, झारखंड आदिवासी विकास समिति, धुर्वा)
  • सोमा उरांव (अध्यक्ष, मुखिया संघ)
  • सन्नी टोप्पो

What Next: सामाजिक तनाव और सियासी नफा-नुकसान

इस विवाद ने राज्य के पारंपरिक सरना समाज और ईसाई मिशनरी समर्थित समूहों के बीच पुरानी खाई को एक बार फिर गहरा कर दिया है। सरकार के लिए भी यह स्थिति असहज हो चुकी है, क्योंकि पारंपरिक ग्राम प्रधानों और पहान व्यवस्था का सीधा विरोध सीधे तौर पर आगामी चुनावों में वोट बैंक के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। देखना होगा कि इस तीखे विरोध के बाद कांग्रेस और गठबंधन के नेता क्या सफाई पेश करते हैं।

Related Stories & Ads

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now