राढू पुल को बालू माफियाओं से बचाने की गुहार, अबुआ अधिकार मंच ने सौंपी शिकायत

Subhash Shekhar
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रांची – राढू नदी पर बने ऐतिहासिक राढू पुल की संरचनात्मक सुरक्षा आज खतरे में है। सिल्ली प्रखंड के जामनगर क्षेत्र में इस पुल के नीचे अवैध बालू खनन जोरों पर है, जिससे पुल की नींव तक उजागर हो चुकी है। अबुआ अधिकार मंच ने इसे गंभीर पर्यावरणीय और जनसुरक्षा का मामला बताते हुए जिला प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

अबुआ अधिकार मंच का प्रतिनिधिमंडल हाल ही में रांची उपायुक्त से मिला और उन्हें एक लिखित ज्ञापन सौंपा। मंच के प्रमुख नीरज वर्मा ने बताया कि राढू नदी में लंबे समय से बड़े पैमाने पर बालू की अवैध तस्करी हो रही है, जिससे पुल के पिलरों की नींव तक दिखने लगी है। इस स्थिति को देखते हुए किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

अवैध खनन से पर्यावरण को भी खतरा

प्रतिनिधिमंडल में शामिल अभिषेक शुक्ला ने बताया कि राढू नदी एक जैविक आवास क्षेत्र है, जहां जलजीव, वनस्पतियां और अन्य जैव विविधताएं निवास करती हैं। लेकिन बालू खनन के कारण इनका अस्तित्व संकट में है। नदी की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो रही है, जिससे जलस्तर गिर रहा है और भूमि कटाव जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

इसके अलावा, राढू पुल से सटे क्षेत्रों में कई गांव बसे हैं, जिनकी सुरक्षा भी इस खनन से खतरे में पड़ गई है। यदि समय रहते खनन पर रोक नहीं लगी तो पुल के साथ-साथ आसपास की बस्तियों को भी बड़ा नुकसान हो सकता है।

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स्थायी समाधान की मांग

अबुआ अधिकार मंच ने मांग की है कि राढू पुल से 500 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का बालू खनन प्रतिबंधित किया जाए। साथ ही, दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। मंच ने यह भी प्रस्ताव दिया कि नदी और पुल की सुरक्षा के लिए एक स्थायी निगरानी तंत्र का गठन हो, जिसमें वन एवं पर्यावरण विभाग की भी भूमिका हो।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि प्रशासन केवल आश्वासन न दे, बल्कि जमीन पर ठोस कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई न जाएं।

प्रशासन का आश्वासन, कार्रवाई की उम्मीद

रांची के उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को मामले में शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उम्मीद की जा रही है कि जिला प्रशासन जल्द ही क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाएगा।

प्रतिनिधिमंडल में नीरज वर्मा, अभिषेक शुक्ला, आकाश नयन और सुमित कुमार शामिल थे, जिन्होंने एक स्वर में कहा कि राढू पुल को यदि समय रहते नहीं बचाया गया, तो इसका भारी खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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