Ranchi | झारखंड के प्रशासनिक और कानूनी हलके से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) पद पर एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता रोहितश्य रॉय को झारखंड का नया महाधिवक्ता नियुक्त किया गया है।
विधि विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, निवर्तमान महाधिवक्ता राजीव रंजन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। राजीव रंजन ने 14 जून 2026 को अचानक अपने पद से त्यागपत्र सौंप दिया था, जिसके बाद से ही कानूनी गलियारों में नए नाम को लेकर कयासबाजी तेज थी।
इस नए बदलाव में सरकार ने अच्युत केशव को प्रमोट करते हुए अपर महाधिवक्ता से वरीय अपर महाधिवक्ता (Senior Additional Advocate General) की जिम्मेदारी सौंपी है। राज्यपाल के आदेश से जारी इस अधिसूचना के बाद रांची स्थित झारखंड हाई कोर्ट और सरकारी महकमों में हलचल बढ़ गई है।
अचानक क्यों हुआ यह बड़ा उलटफेर?

रांची स्थित झारखंड उच्च न्यायालय परिसर में आज सुबह से ही इस बात को लेकर सुगबुगाहट तेज थी कि सरकार कानूनी मोर्चे पर अपनी टीम में कुछ बड़ा बदलाव करने जा रही है। दोपहर होते-होते विधि विभाग की अधिसूचना ने इस पर मुहर लगा दी।
संविधान के अनुच्छेद 165(1) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल ने राजीव रंजन का इस्तीफा मंजूर किया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील कानूनी मामलों में कोर्ट के भीतर अपनी पैरवी को और अधिक आक्रामक और मजबूत बनाना चाहती है। यही वजह है कि रोहितश्य रॉय जैसे तजुर्बेकार और वरिष्ठ चेहरे पर भरोसा जताया गया है।
कोर्ट रूम से लेकर मंत्रालय तक चर्चाओं का बाजार गर्म
हाई कोर्ट के बार एसोसिएशन से जुड़े एक वरिष्ठ वकील ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:
”राजीव रंजन जी का कार्यकाल काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कई बड़े मामलों में उन्होंने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। लेकिन मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य को देखते हुए, सरकार को कोर्ट में एक नई और अचूक रणनीति की जरूरत थी। रोहितश्य रॉय की नियुक्ति इसी का हिस्सा लगती है।”
रोहितश्य रॉय और अच्युत केशव: नई टीम के सामने क्या हैं चुनौतियाँ?

रोहितश्य रॉय झारखंड कानूनी जगत का एक बड़ा और सम्मानित नाम हैं। हाई कोर्ट में जटिल संवैधानिक मामलों में उनकी पकड़ बेजोड़ मानी जाती है। पदभार ग्रहण करने की तिथि से अगले आदेश तक वह राज्य सरकार के मुख्य कानूनी सलाहकार के रूप में काम करेंगे।
दूसरी तरफ, अच्युत केशव को वरीय अपर महाधिवक्ता बनाना यह साफ करता है कि सरकार पुरानी टीम के अनुभव को पूरी तरह दरकिनार नहीं कर रही है, बल्कि उन्हें प्रमोट कर नई ऊर्जा के साथ काम पर लगा रही है।
सरकार के सामने खड़ी हैं ये तात्कालिक चुनौतियां:
- लंबित नियुक्तियों के मामले: राज्य में युवाओं की नौकरियों और परीक्षा नियमावली से जुड़े कई मामले हाई कोर्ट में लंबित हैं।
- जमीन और राजस्व विवाद: झारखंड में जमीन से जुड़े कई बड़े मामलों पर सरकार को कोर्ट में जवाब देना है।
- नीतिगत फैसले: सरकार के हालिया नीतिगत फैसलों को कानूनी रूप से सुरक्षित रखना नई टीम की पहली प्राथमिकता होगी।
विधि विभाग ने इस नियुक्ति और इस्तीफे की प्रतिलिपि राजभवन, उच्च न्यायालय, सभी संबंधित विभागों और राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों को भेज दी है। अब सभी की नजरें रोहितश्य रॉय के पदभार ग्रहण करने पर टिकी हैं। नए महाधिवक्ता के सामने सबसे पहली चुनौती सरकार के खिलाफ चल रहे संवेदनशील मुकदमों की लिस्ट तैयार कर, कोर्ट में राज्य का पक्ष मजबूती से रखने की होगी। आने वाले दिनों में महाधिवक्ता कार्यालय के तहत कुछ और सरकारी वकीलों के पैनल में भी फेरबदल देखने को मिल सकता है।











