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Jharkhand News

बिना बिजली जगमगाएगी रांची रिंग रोड, सरकार के इस फैसले से सब हैरान!

Ranchi | ​रांची से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राजधानी की रफ्तार को नई दिशा देने वाली रांची रिंग रोड अब केवल गाड़ियों के दौड़ने का रास्ता नहीं रहेगी, बल्कि इसे देश के सबसे आधुनिक ‘ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर’ के रूप में बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

​मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कड़े निर्देश के बाद पथ निर्माण विभाग (RCD) एक्शन मोड में आ गया है। विभाग की फील्ड सर्वे डिवीजन की टीम ने जमीन पर उतरकर रिंग रोड का विस्तृत मुआयना भी पूरा कर लिया है, जिससे इस मेगा प्रोजेक्ट की सुगबुगाहट अब ग्राउंड पर साफ दिखने लगी है।

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​इस हाई-टेक योजना के तहत रिंग रोड के दोनों किनारों पर सर्विस रोड से सटे करीब 40 किलोमीटर के दायरे का कायाकल्प होने जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि मानसून खत्म होते ही धरातल पर काम शुरू करा दिया जाए, जिसके लिए कंसल्टेंट के जरिए जमीन के आकलन का काम युद्ध स्तर पर जारी है।

​40 किलोमीटर का दायरा, जानिए क्या है सरकार का मेगा प्लान

​अगर आप रांची रिंग रोड से गुजरते हैं, तो आने वाले दिनों में आपको यहाँ का नजारा बिल्कुल बदला हुआ मिलेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर जब हमारी टीम ने अधिकारियों और ग्राउंड जीरो पर स्थिति का जायजा लिया, तो कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। विभाग का लक्ष्य अगले एक से डेढ़ महीने के भीतर इस प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का है।

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​विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:

​”मुख्यमंत्री की सोच बहुत स्पष्ट है। हम सिर्फ एक सड़क नहीं बना रहे, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए एक पर्यावरण-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं। कंसल्टेंट की सर्वे रिपोर्ट आते ही एलाइनमेंट फाइनल होगा और कैबिनेट की मंजूरी के बाद तुरंत टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।”

​साइकिल ट्रैक से लेकर सोलर रूफ तक; ये 3 बड़े बदलाव बदल देंगे रिंग रोड का चेहरा

​इस ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर के तहत मुख्य रूप से तीन बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, जो रांची को देश के चुनिंदा ‘सस्टेनेबल शहरों’ की कतार में खड़ा कर देंगे:

  • समर्पित साइकिल ट्रैक और सुरक्षित फुटपाथ: रिंग रोड के किनारे बिना मोटर वाले वाहनों (Non-Motorized Transport) को बढ़ावा देने के लिए एक डेडिकेटेड साइकिल ट्रैक और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ बनाया जाएगा। इससे सुबह की सैर करने वालों और साइकिल चालकों को बिना किसी हादसे के डर के एक सुरक्षित माहौल मिलेगा।
  • सौर ऊर्जा से जगमगाएगी सड़क: इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘सोलर रूफ और सोलर लाइटिंग सिस्टम’ है। सड़क किनारे बड़े-बड़े सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे पैदा होने वाली बिजली से ही पूरी रिंग रोड की स्ट्रीट लाइटें और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं चलेंगी, जिससे सरकार का बिजली खर्च न के बराबर हो जाएगा।
  • सघन हरित पट्टी (Green Verge): प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए पूरी 40 किलोमीटर की बेल्ट में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा, जिससे यह पूरा इलाका एक ऑक्सीजन हब की तरह काम करेगा।

​ट्रैफिक का दबाव होगा कम, इन 8 जिलों के मुसाफिरों को बड़ी राहत

​रांची रिंग रोड केवल राजधानी के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए लाइफलाइन है। यह सड़क रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, खूंटी, गुमला और पलामू की तरफ जाने वाले भारी और हल्के वाहनों के लिए बाईपास का काम करती है।

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​इस कॉरिडोर के आधुनिक हो जाने से बाहरी जिलों से आने वाले वाहनों को रांची शहर के भीतर दाखिल होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे सुजाता चौक, अल्बर्ट एक्का चौक और बूटी मोड़ जैसे मुख्य इलाकों में लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से आम जनता को हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

​विकास का नया मॉडल बनेगा रांची रिंग रोड

प्रशासन का अगला कदम: पथ निर्माण विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती मानसून से पहले सर्वे का काम पूरा कर सटीक एलाइनमेंट तैयार करने की है। सरकार की मंशा साफ है कि इस साल के अंत तक निर्माण कार्य पूरी रफ्तार पकड़ ले। अब देखना यह होगा कि कंसल्टेंट तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप पाते हैं या नहीं। लेकिन एक बात तो तय है, अगर यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा हुआ, तो रांची की यह रिंग रोड पूरे देश के लिए शहरी विकास का एक नया मॉडल बनेगी।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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