राज्यसभा चुनाव: परिमल नाथवानी का नामांकन होल्ड, क्यों मचा हड़कंप?

Subhash Shekhar
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Ranchi | झारखंड राज्यसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र में गंभीर त्रुटियां मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। रिटर्निंग अफसर ने उनके पर्चे को फिलहाल होल्ड पर रख दिया है।

इस बीच विपक्षी खेमे ने इस मुद्दे को लेकर सीधे भाजपा और प्रत्याशी पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ, झामुमो प्रत्याशी बैजनाथ राम और कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के नामांकन जांच में बिल्कुल सही पाए गए हैं।

नामांकन में गड़बड़ी की यह शिकायत कांग्रेस विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने रिटर्निंग अफसर सह विधानसभा के प्रभारी सचिव रंजीत प्रसाद से लिखित रूप में की है। इसके बाद से ही झारखंड के सियासी गलियारों में यह सवाल तैर रहा है कि क्या परिमल नाथवानी का पर्चा खारिज हो जाएगा या वे रेस में बने रहेंगे?

नाम के हेरफेर से लेकर क्रिमिनल रिकॉर्ड तक, इन 5 बिंदुओं पर फंसा पेंच

कांग्रेस की ओर से दर्ज कराई गई लिखित शिकायत में परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र पर कई गंभीर तकनीकी और कानूनी सवाल खड़े किए गए हैं। विधानसभा परिसर से मिल रही ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई है:

  • नाम का विरोधाभास: वर्ष 2008 के राज्यसभा चुनाव में इनका नाम ‘परिमल नाथवानी’ दर्ज था, तो साल 2026 के इस नामांकन में यह ‘नाथवानी परिमल’ कैसे हो गया? दिलचस्प बात यह है कि स्टांप ड्यूटी के कागजातों में नाम परिमल नाथवानी ही लिखा है।
  • अधूरी व्यक्तिगत जानकारी: फॉर्म 26 के नियमों का उल्लंघन करते हुए प्रत्याशी ने अपने अविभाजित परिवार (HUF) और धर्म से जुड़ी जानकारियां अधूरी छोड़ी हैं।
  • कॉर्पोरेट क्रेडेंशियल छुपाने का आरोप: नाथवानी जिस कंपनी में डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं, उसके बारे में हलफनामे में कोई जिक्र नहीं किया गया है।
  • आपराधिक मामलों का कॉलम खाली: प्रत्याशी के खिलाफ दर्ज मामलों या किसी मामले में हुई सजा और व्यावसायिक गतिविधियों की जानकारी को भी अधूरा रखने का आरोप है।
शिकायत मिलते ही विधानसभा पहुंचे नाथवानी

शिकायत मिलते ही विधानसभा पहुंचे नाथवानी, दिल्ली तक दौड़ी सरगर्मी

जैसे ही नामांकन होल्ड पर जाने की खबर फैली, रांची से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज हो गई। खुद परिमल नाथवानी आनन-फानन में विधानसभा पहुंचे और अपनी तरफ से सफाई पेश की। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रिटर्निंग अफसर रंजीत प्रसाद ने अंतिम फैसला सुरक्षित रखते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) से तत्काल परामर्श मांगा है।

मौके पर मौजूद पत्रकारों से बात करते हुए परिमल नाथवानी ने कहा:

“हमने अपनी तरफ से सभी आपत्तियों का कानूनी और तार्किक जवाब दे दिया है। हमारे वकील रिटर्निंग अफसर के समक्ष एक बार फिर से सारी सही और जरूरी सूचनाएं उपलब्ध करा रहे हैं। हमें पूरा भरोसा है।”

बता दें कि रिटर्निंग अफसर ने कांग्रेस की इस आपत्ति पर परिमल नाथवानी को आज सुबह 11 बजे तक का वक्त दिया था, जिसके तहत उनके वकीलों ने दस्तावेज जमा किए हैं।

‘भाजपा का सुरक्षा कवच बचाएगा या नियम चलेंगे?’ भूपेश बघेल का सीधा हमला

इस पूरे घटनाक्रम पर पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर सीधे प्रधानमंत्री और भाजपा को कटघरे में खड़ा किया है। बघेल ने लिखा कि नाथवानी के नामांकन में बड़ी त्रुटियां हैं और इस पर सुनवाई जारी है।

क्या वे इसलिए चुनाव मैदान में बने रहेंगे क्योंकि उन्हें भाजपा का सुरक्षा कवच प्राप्त है, या फिर उन पर भी वही नियम लागू होंगे जो आम उम्मीदवारों पर होते हैं? अगर नियमों का निष्पक्ष पालन हुआ तो अनैतिकता की हार तय है।

गौरतलब है कि 8 जून को जब परिमल नाथवानी ने एनडीए के समर्थन से अपना पर्चा दाखिल किया था, तब उनके साथ एनडीए खेमे के तमाम दिग्गज विधायक एकजुटता दिखाने पहुंचे थे। अब देखना यह है कि चुनाव आयोग इस तकनीकी खामी पर क्या रुख अपनाता है।

झारखंड राज्यसभा चुनाव का यह मुकाबला अब पूरी तरह से कानूनी और तकनीकी लड़ाई में तब्दील हो चुका है। रिटर्निंग अफसर इस समय केंद्रीय चुनाव आयोग के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। यदि चुनाव आयोग नाम के इस हेरफेर और फॉर्म 26 के अधूरे कॉलम को ‘गंभीर चूक’ मानता है, तो नाथवानी का नामांकन रद्द भी हो सकता है, जो एनडीए के लिए एक बड़ा झटका होगा। वहीं, अगर वकीलों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को स्वीकार कर लिया जाता है, तो नाथवानी राहत की सांस लेंगे। अगले कुछ घंटे झारखंड की इस राज्यसभा सीट का भविष्य तय करने वाले हैं।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।