दिल्ली में 94 अवैध ढांचे जमींदोज, 114 प्रॉपर्टीज सील!

Subhash Shekhar
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New Delhi | दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के निर्देश पर राजधानी में अवैध निर्माण और नियमों को ताक पर रखकर बनी इमारतों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा हंटर चला है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार की ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति के तहत पूरी दिल्ली में हड़कंप मचा हुआ है।

प्रशासन की इस ताबड़तोड़ छापेमारी से अवैध बिल्डरों और भ्रष्ट अधिकारियों की नींद उड़ गई है। सरकार ने साफ कर दिया है कि राजधानी की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

दो सबसे बड़े एक्शन:

  • 94 अवैध ढांचे पूरी तरह जमींदोज: नियमों को ताक पर रखकर खड़ी की गई 94 इमारतों और अवैध ढांचों को बुलडोजर चलाकर पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ करने वाले ऐसे किसी भी ढांचे को बख्शा नहीं जाएगा।
  • 114 प्रॉपर्टीज पर जड़ा ताला (सील): इस बड़े एक्शन के अंतर्गत 114 कमर्शियल और रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। इन सभी संपत्तियों के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

इस महा-अभियान के तहत अब तक कुल 124 संदेहास्पद प्रॉपर्टीज की गहन जांच की गई थी, जिसमें से यह बड़ी कार्रवाई निकलकर सामने आई है।

बुलडोजर का एक्शन और मौके पर पसरा सन्नाटा

वहां का नजारा किसी युद्ध स्तर की तैयारी जैसा था। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में निगम के बुलडोजर अवैध निर्माणों को ढहा रहे थे। स्थानीय लोगों में डर और उत्सुकता दोनों का माहौल है।

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दिल्ली CMO के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ग्राउंड पर मौजूद मीडिया से कहा: “यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के स्पष्ट निर्देश हैं कि दिल्ली को कंक्रीट का अवैध जंगल नहीं बनने दिया जाएगा। जो भी ढांचा सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करेगा, उसका यही हश्र होगा।”

[यहाँ सीलिंग और बुलडोजर एक्शन की लाइव वीडियो/तस्वीर एम्बेड करें]

सीलिंग और बुलडोजर एक्शन

दोषी आर्किटेक्ट्स होंगे ब्लैकलिस्ट, छिनेगा लाइसेंस

इस बार दिल्ली सरकार सिर्फ इमारतों को गिराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस पूरे खेल के पीछे के ‘दिमाग’ पर भी वार कर रही है। जिन आर्किटेक्ट्स ने पैसों के लालच में गलत नक्शे पास किए या अवैध निर्माण को बढ़ावा दिया, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है। सरकार ऐसे सभी दोषी आर्किटेक्ट्स को ब्लैकलिस्ट करने जा रही है और उनके लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

सुरक्षा के लिए नया मास्टरप्लान: थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस और डिजिटल सिस्टम

भविष्य में ऐसी घटनाओं और हादसों को रोकने के लिए दिल्ली सरकार एक दूरगामी नीति पर काम कर रही है। इसके तहत दो बड़े कदम उठाए जा रहे हैं:

  • डिजिटल फायर रिस्पॉन्स सिस्टम: किसी भी आपातकालीन स्थिति में आग पर तुरंत काबू पाने और सूचना तंत्र को मजबूत करने के लिए इसे लागू किया जा रहा है।
  • थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस: बहुमंजिला और व्यावसायिक इमारतों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस को अनिवार्य करने की योजना है, ताकि किसी भी हादसे की स्थिति में पीड़ितों को तुरंत मुआवजा मिल सके और जवाबदेही तय हो।

दिल्ली सरकार का यह एक्शन मोड बता रहा है कि आने वाले दिनों में अवैध निर्माण करने वालों की खैर नहीं है। प्रशासन का अगला कदम उन सरकारी कर्मचारियों पर गाज गिराना हो सकता है, जिनकी शह पर ये अवैध इमारतें खड़ी हुईं। बहरहाल, इस कार्रवाई ने दिल्ली के रियल एस्टेट मार्केट और रसूखदारों के बीच यह कड़ा संदेश दे दिया है कि नियम तोड़ने पर अब सीधे बुलडोजर का सामना करना पड़ेगा।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।