Ranchi | झारखंड में जब साल 2020 में पूरी दुनिया घरों में कैद थी, तब राज्य के जंगलों में ‘कुल्हाड़ियां’ चल रही थीं। लॉकडाउन की खामोशी के बीच सैकड़ों कीमती पेड़ काटकर 200 से अधिक ट्रकों में भरकर ठिकाने लगा दिए गए। इस महालूट पर अब झारखंड हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत की नाराजगी के बाद सीआईडी (CID) की जांच में अचानक तेजी आई है और बड़े अधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है।
लॉकडाउन में हुई थी जंगलों की ‘सफाई’, रक्षक ही बने भक्षक!
झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सरकारी रिपोर्ट में खुद स्वीकार किया गया है कि इस वन संपदा की लूट में कोई बाहरी नहीं, बल्कि वन विभाग के ही रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO), रेंजर और वन रक्षक शामिल थे। पलामू, जामताड़ा, चाईबासा और रांची जैसे जिलों में जिस तरह से संगठित तरीके से पेड़ों की कटाई हुई, उसने व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
एडीजी सीआईडी ने कोर्ट को बताया कि मामले के एक नामजद आरोपी महाराज सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी मोहाफिज अंसारी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मिल गई है।
अदालत की सख्ती: “6 साल से सिर्फ जांच ही चल रही है?”
हाईकोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में डीजीपी (DGP) और पीसीसीएफ (PCCF) के जवाबों पर गहरी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने मौखिक रूप से यहाँ तक कह दिया था कि यह अवमानना (Contempt of Court) का स्पष्ट मामला बनता है।
अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि आखिर 6 साल बीत जाने के बाद भी सीआईडी की जांच किसी तार्किक अंत तक क्यों नहीं पहुंची? सरकारी महकमों द्वारा दस्तावेज न मिलने का बहाना बनाने पर कोर्ट ने इसे जांच को भटकाने की कोशिश करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
- समय: वर्ष 2020 (कोविड लॉकडाउन का दौर)।
- स्थान: रांची, पलामू, जामताड़ा और चाईबासा के सुरक्षित वन क्षेत्र।
- क्या हुआ: सैकड़ों साल पुराने पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया और 200 से ज्यादा ट्रकों के जरिए तस्करी की गई।
- जांच का पेच: संलिप्तता बड़े अधिकारियों की थी, इसलिए फाइलें दबाने की कोशिश हुई।
PCCF और DGP से मांगा गया जवाब, 15 जून को अगली पेशी
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखते हुए कोर्ट को आश्वस्त किया कि अब जांच पटरी पर है। कोर्ट ने अब सरकार से लेटेस्ट स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और अगली सुनवाई की तारीख 15 जून तय की है।
इस मामले ने झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है क्योंकि अगर सीआईडी ने ईमानदारी से जांच की, तो कई बड़े ‘सफेदपोश’ चेहरे बेनकाब हो सकते हैं जिन्होंने आपदा के समय को अवसर में बदलकर राज्य की प्राकृतिक संपदा को बेच खाया।
अगला कदम: क्या गिरेगी बड़ी गाज?
अब सबकी नजरें 15 जून की सुनवाई पर टिकी हैं। क्या सीआईडी उन ‘मगरमच्छों’ तक पहुंच पाएगी जिनके इशारे पर सैकड़ों ट्रकों में लकड़ी पार की गई? झारखंड की जनता और पर्यावरण प्रेमी इस इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं ताकि भविष्य में राज्य के फेफड़ों (जंगलों) पर कोई हाथ डालने की हिम्मत न कर सके।
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