ताज़ा खबरें
लोड हो रहा है... ताज़ा खबरों के लिए बने रहें...
विज्ञापन
LIVE

LIVE UPDATES लाइव कवरेज

1 सक्रिय
Jharkhand News
यह खबर कहाँ की हैझारखंड

गढ़वा के इस अस्पताल में डॉक्टर नहीं, ‘मौत’ बांट रहे थे झोलाछाप? एसडीएम की छापेमारी में खुला वो खौफनाक राज, जिसे जानकर कांप उठेगी रूह!

Garhwa | झारखंड के गढ़वा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की चूलें हिला दी हैं। चिनिया रोड स्थित ‘आशा किरण अस्पताल’ में इलाज के नाम पर मरीजों की जिंदगी के साथ जो ‘खूनी खेल’ खेला जा रहा था, उसका पर्दाफाश सदर एसडीएम संजय कुमार की औचक छापेमारी में हुआ है। सोचिए, ऑपरेशन थियेटर में मरीज भर्ती हैं, सर्जरी की तैयारी है, लेकिन अस्पताल से डॉक्टर ही गायब हैं!

यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर मरीजों को मौत के मुंह में धकेलने की साजिश है। एसडीएम की जांच में जो तथ्य निकलकर आए हैं, वे किसी हॉरर फिल्म की पटकथा से कम नहीं हैं। बिना डिग्री वाले ‘कागजी’ डॉक्टरों के भरोसे चल रहे इस अस्पताल को अब सील करने की तैयारी है, लेकिन सवाल वही है—क्या चंद रुपयों के लिए किसी की जान इतनी सस्ती है?

Advertisement

बिना डॉक्टर के हो रही थी सर्जरी: मौत का ‘ऑपरेशन थियेटर’ चालू

जब एसडीएम संजय कुमार अपनी टीम के साथ आशा किरण अस्पताल पहुंचे, तो नजारा देख उनके भी होश उड़ गए। अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर (OT) पूरी तरह चालू हालत में था, बेड पर मरीज लेटे हुए थे जिनकी सर्जरी की जा चुकी थी, लेकिन पूरे परिसर में एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक (Specialist Doctor) मौजूद नहीं था।

हैरान करने वाला खुलासा: अस्पताल का रजिस्ट्रेशन जिस डॉक्टर के नाम पर है, वे खुद सरकारी सेवा में हैं और श्री वंशीधर नगर उंटारी ट्रॉमा सेंटर में ड्यूटी कर रहे हैं। यानी अस्पताल सिर्फ उनके नाम के बोर्ड पर चल रहा था, जबकि भीतर का काम ‘भगवान भरोसे’ या शायद उन झोलाछापों के हाथ में था जिनके पास कोई वैध डिग्री ही नहीं है।

फर्जी नाम, फर्जी डिग्री: लेटर पैड पर ‘बी. कुमार’ और ‘एम. सिंह’ का रहस्य

जांच के दौरान एसडीएम को कई ऐसे लेटर पैड मिले जिन पर ‘बी. कुमार’ और ‘एम. सिंह’ जैसे संदिग्ध नाम लिखे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इन कथित डॉक्टरों की डिग्रियों का कोई अता-पता नहीं है। अस्पताल प्रशासन यह बताने में नाकाम रहा कि ये लोग कौन हैं और किस योग्यता के आधार पर मरीजों का भविष्य लिख रहे थे।

ये भी पढ़ें:  रांची में हाई अलर्ट! नगर निगम चुनाव नामांकन से पहले धारा-163 लागू, क्या आपकी गाड़ी और रैली पर भी लगेगी रोक?

अस्पताल की 3 बड़ी अनियमितताएं: जो आपको डरा देंगी

  1. रिकॉर्ड का गायब होना: फरवरी महीने के बाद से अस्पताल ने कोई आधिकारिक रिकॉर्ड ही नहीं रखा। कितने मरीज आए, किसका ऑपरेशन हुआ और कौन ठीक होकर गया या ‘गायब’ हो गया, इसका कोई डेटा मौजूद नहीं है।
  2. अवैध मेडिकल स्टोर: अस्पताल के परिसर के भीतर चल रही दवा दुकान के पास कोई वैध लाइसेंस नहीं पाया गया। बिना लाइसेंस के बेची जा रही ये दवाएं असली थीं या नकली, इसकी जांच अब बड़ा मुद्दा है।
  3. आपराधिक लापरवाही: पोस्ट-ऑपरेटिव केयर (ऑपरेशन के बाद की देखभाल) के लिए वहां कोई क्वालिफाइड स्टाफ नहीं था। गंभीर स्थिति में मरीज तड़पते रहे, तो उन्हें देखने वाला कोई नहीं था।

प्रशासन का कड़ा रुख: “बख्शे नहीं जाएंगे गुनहगार”

सदर एसडीएम संजय कुमार ने इस मामले को ‘आपराधिक लापरवाही’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट का सीधा उल्लंघन है।

“मरीजों की सुरक्षा के साथ ऐसा खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने सिविल सर्जन को कठोरतम कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।” — संजय कुमार, सदर एसडीएम, गढ़वा

क्या अब सुधरेगी गढ़वा की स्वास्थ्य व्यवस्था?

गढ़वा में हुई इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य निजी अस्पतालों में हड़कंप मच गया है। शहर के लोग डरे हुए भी हैं और आक्रोशित भी। बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे इतने महीनों से यह ‘मौत का क्लिनिक’ कैसे फल-फूल रहा था? क्या प्रशासन की यह कार्रवाई केवल एक अस्पताल तक सिमट कर रह जाएगी या उन सभी ‘दुकानों’ पर ताला लगेगा जो मरीजों की मजबूरी का सौदा कर रहे हैं?

अगला कदम: जिला प्रशासन अब जिले के सभी निजी नर्सिंग होम की फाइलों को दोबारा खंगालने की योजना बना रहा है।

इसे भी पढ़ें: क्या अब रिक्शे से ब्लड पहुंचाएंगे इरफान अंसारी? झारखंड की ‘वेंटिलेटर’ पर स्वास्थ्य व्यवस्था देख भड़के प्रतुल शाहदेव, पूछा तीखा सवाल

ये भी पढ़ें:  Jharkhand Top 10 News: गिरिडीह में दो पुलिसकर्मी निलंबित, धालभूमगढ़ एयरपोर्ट पर पहल; पढ़ें राज्य की 10 खबरें
Related Stories & Ads

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment