झारखंड में ‘डायन’ के नाम पर खूनी खेल: क्या कानून बचा पाएगा उन बेगुनाह महिलाओं की जान, जो अपनों के ही निशाने पर हैं?

झारखंड में 'डायन' के नाम पर खूनी खेल: क्या कानून बचा पाएगा उन बेगुनाह महिलाओं की जान, जो अपनों के ही निशाने पर हैं?

Ranchi | झारखंड की माटी पर आज भी एक ऐसी कालिख पुती है, जिसे मिटाने की कोशिशें तो जारी हैं, लेकिन जख्म गहरे हैं। ‘डायन-बिसाही’—यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि उन सैकड़ों महिलाओं के लिए मौत का फरमान है, जिन्हें कभी जमीन हड़पने के लिए तो कभी आपसी रंजिश में इस कुप्रथा की आग में झोंक दिया जाता है। शनिवार को रांची के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में जब देश के बड़े न्यायविदों ने इन पीड़ितों की सिसकियां सुनीं, तो सिस्टम की कमियां और समाज की क्रूरता दोनों बेनकाब हो गईं।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की दो टूक: सजा काफी नहीं, सम्मान जरूरी

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) और महिला बाल विकास विभाग के इस बड़े कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट कर दिया कि न्याय की परिभाषा सिर्फ अपराधी को जेल भेजना नहीं है। उन्होंने कहा, “न्याय तब पूरा होता है, जब समाज द्वारा प्रताड़ित महिला दोबारा सिर उठाकर जी सके।”

मंच पर जब जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद जैसे दिग्गज बैठे थे, तब ऑडिटोरियम में मौजूद उन महिलाओं की आंखों में उम्मीद और खौफ दोनों थे, जिन्होंने ‘डायन’ का दंश झेला है।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की दो टूक: सजा काफी नहीं, सम्मान जरूरी

अंधविश्वास का चोला, साजिश का असली चेहरा

डायन कहना महज एक अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक संगठित हिंसा है।

  • जमीन विवाद: अक्सर विधवा या अकेली महिलाओं को डायन बताकर उनकी जमीन हड़पने की साजिश रची जाती है।
  • बीमारी का बहाना: गांव में किसी बच्चे या जानवर की मौत होने पर सारा दोष एक कमजोर महिला पर मढ़ दिया जाता है।
  • कानूनी ढाल की कमी: जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने संविधान के अनुच्छेदों (14, 15, 21) का हवाला देते हुए कहा कि कागज पर बराबरी और जमीन पर बराबरी के बीच एक गहरी खाई है, जिसे पाटना होगा।

JHALSA की नई पहल: अब चैटबॉट से मिलेगा न्याय

इस कार्यक्रम में सिर्फ चर्चा नहीं हुई, बल्कि जमीनी बदलाव के लिए ठोस कदम भी उठाए गए:

  1. JHALSA चैटबॉट: अब तकनीक के जरिए कानूनी मदद पीड़ितों के मोबाइल तक पहुंचेगी।
  2. 90 दिनों का महाभियान: झारखंड के हर गांव में जागरूकता फैलाने के लिए तीन महीने का सघन अभियान शुरू किया गया है।
  3. प्रोजेक्ट सुरक्षा: पुलिस और प्रशासन को पीड़ितों के पुनर्वास के लिए जवाबदेह बनाया जा रहा है।

तीन सत्रों में खिंचा गया भविष्य का रोडमैप

कोलोक्वियम के दौरान तीन तकनीकी सत्रों में घरेलू हिंसा, मानव तस्करी और डायन प्रथा पर गहन मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने माना कि झारखंड विचक्राफ्ट प्रिवेंशन एक्ट को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है। झारखंड के मुख्यमंत्री और प्रशासन के लिए अब चुनौती यह है कि इन योजनाओं का लाभ सुदूर जंगलों में रहने वाली उन महिलाओं तक कैसे पहुंचे, जो आज भी समाज के डर से चुप हैं।

तीन सत्रों में खिंचा गया भविष्य का रोडमैप
झारखंड में 'डायन' के नाम पर खूनी खेल: क्या कानून बचा पाएगा उन बेगुनाह महिलाओं की जान, जो अपनों के ही निशाने पर हैं? 3

क्या बदलेगी झारखंड की तस्वीर?

रांची का यह आयोजन एक संदेश है कि सिस्टम अब जाग चुका है। लेकिन सवाल वही है—जब तक गांव की चौपाल पर बैठने वाला हर व्यक्ति इस कुप्रथा के खिलाफ खड़ा नहीं होगा, तब तक क्या ये अदालतें और कानून काफी होंगे? असली लड़ाई अदालत के कमरे में नहीं, बल्कि उन बंद दिमागों के खिलाफ है जो आज भी औरतों को ‘डायन’ कहकर उनकी गरिमा को कुचलते हैं।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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