सिसई (गुमला): झारखंड के गुमला जिले से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है जिसने सामाजिक ताने-बाने और धार्मिक स्वतंत्रता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सिसई थाना क्षेत्र के बसिया रोड निवासी शिवकुमार साहू ने अपनी ही पत्नी और ससुराल वालों पर जबरन धर्मांतरण का दबाव बनाने और प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित का दावा है कि उसकी आस्था पर प्रहार किया गया और घर में लगे धार्मिक प्रतीकों को अपमानित कर उखाड़ फेंका गया।
यह मामला महज एक घरेलू विवाद नहीं, बल्कि प्रलोभन और मानसिक दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन के उस कथित ‘सिंडिकेट’ की ओर इशारा करता है, जो अब परिवारों के भीतर तक पहुंच चुका है।
2015 में हुआ था प्रेम विवाह, अब खुला ‘ससुराल’ का असली चेहरा
पीड़ित शिवकुमार साहू की कहानी 2015 में शुरू हुई थी, जब उन्होंने खूंटी जिले के पिपराटोली की खुशबू कुमारी के साथ हिंदू रीति-रिवाज और कोर्ट मैरिज के जरिए सात फेरे लिए थे। शिवकुमार का आरोप है कि शादी के वक्त उन्हें अंधेरे में रखा गया। कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि उनके ससुराल वाले पहले से ईसाई धर्म को मानते हैं। आरोप है कि उनकी पत्नी और साली सक्रिय रूप से धर्म प्रचारक के रूप में जुड़ी हुई हैं।
नौकरी का लालच और बच्चों की दुहाई: “धर्म बदलो वरना…”
शिवकुमार ने पुलिस को दी गई शिकायत में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया:
- प्रलोभन का खेल: सास ने कथित तौर पर वादा किया कि यदि वह ईसाई धर्म अपना लेते हैं, तो मिशन अस्पताल में उनकी पक्की नौकरी लगवा दी जाएगी।
- मानसिक टॉर्चर: उन्हें जबरन तीन दिनों तक चर्च ले जाया गया और बाइबिल पढ़ने का दबाव बनाया गया।
- भावनात्मक ब्लैकमेल: धर्म न बदलने पर उन्हें उनके ही बच्चों से न मिलने देने की धमकी दी गई।
बीती रात जो हुआ उसने माहौल गरमाया
दबाव से तंग आकर शिवकुमार अपने बच्चों को लेकर सिसई लौट आए थे, लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। पीड़ित के अनुसार, बीती रात उनकी पत्नी सिसई स्थित घर पहुंची। वहां उसने न केवल हंगामा किया, बल्कि घर में स्थापित हिंदू देवी-देवताओं के चित्र, बजरंगबली का झंडा और आंगन में लगी पवित्र तुलसी के पौधे को उखाड़कर फेंक दिया।
“मेरी आस्था का अपमान किया गया है। मुझे डर है कि यह दबाव मुझे किसी गलत कदम की ओर धकेल सकता है। मैं न्याय चाहता हूं।”
— शिवकुमार साहू, पीड़ित

प्रशासनिक रुख और कानूनी पहलू
सिसई थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत दर्ज कर ली है। झारखंड में ‘धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम’ लागू है, जिसके तहत जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराना एक गंभीर अपराध है। स्थानीय पुलिस अब इस मामले की कड़ियों को जोड़ रही है कि क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है।
एक्सप्लेनर: क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले?
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में धर्मांतरण को लेकर तनाव की खबरें बार-बार सामने आई हैं। अक्सर नौकरी, मुफ्त इलाज और शिक्षा का लालच देकर कमजोर आर्थिक वर्ग को निशाना बनाया जाता है। सिसई की यह घटना इसलिए अलग है क्योंकि यहाँ मामला सीधे तौर पर वैवाहिक जीवन और घर की दहलीज के भीतर तक पहुंच गया है।
शिवकुमार साहू ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है और अपनी जान का खतरा बताया है। इस घटना के बाद सिसई में हिंदूवादी संगठनों और स्थानीय लोगों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है। क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर पीड़ित को सुरक्षा देगा? यह सवाल अब पूरे गुमला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।








