“पाकिस्तान में समलैंगिकता एक ओपन सीक्रेट है”: एक्टिविस्ट हिना बलोच के खुलासे ने मचाया हड़कंप, सुनाई अपनी आपबीती

"पाकिस्तान में समलैंगिकता एक ओपन सीक्रेट है": एक्टिविस्ट हिना बलोच के खुलासे ने मचाया हड़कंप, सुनाई अपनी आपबीती

नई दिल्ली: पाकिस्तान में मानवाधिकारों और पहचान की लड़ाई लड़ रहीं मशहूर ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हिना बलोच का एक होलिया इंटरव्यू इंटरनेट पर तूफ़ान ले आया है। हिना ने न केवल पाकिस्तानी समाज के दोहरे मानदंडों पर सवाल उठाए हैं, बल्कि वहां की ‘अदृश्य’ हकीकत को ‘ओपन सीक्रेट’ करार दिया है।

लंदन में शरण ले चुकीं हिना का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पड़ोसी देश में जेंडर पहचान और रूढ़िवादी सोच के बीच संघर्ष चरम पर है।

Quick Takeaways: हिना बलोच के इंटरव्यू की 5 बड़ी बातें

मुख्य बिंदुविवरण
बड़ा दावापाकिस्तान में समलैंगिकता व्यापक है, लेकिन समाज इसे स्वीकार नहीं करता।
संघर्ष का कारणधार्मिक दबाव और पारिवारिक हिंसा के डर से लोग अपनी पहचान छिपाते हैं।
सीमित विकल्पट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भीख मांगना, नाचना या सेक्स वर्क ही मुख्य रास्ते बचे हैं।
उत्पीड़नकराची में प्राइड झंडा उठाने पर पुलिसिया हिंसा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
वर्तमान स्थितिसुरक्षा कारणों से पाकिस्तान छोड़कर अब लंदन में शरण ली है।

“पहचान छिपाना मजबूरी है”: हिना की जुबानी सच्चाई

हिना बलोच ने अपने इंटरव्यू में बहुत ही मार्मिक तरीके से जेंडर एक्सप्रेशन के डर को साझा किया। उन्होंने बताया कि कराची की गलियों में रहते हुए, उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं थी कि वह कौन हैं, बल्कि यह थी कि वह अपनी पहचान को कैसे ज़ाहिर करें।

“हमें इस बात का डर सताता था कि अगर हमने अपनी पसंद के कपड़े पहने या मेकअप किया, तो क्या हम सुरक्षित घर लौट पाएंगे? पाकिस्तान में समलैंगिकता के बारे में सब जानते हैं, यह एक ‘ओपन सीक्रेट’ है, लेकिन चर्चा करना वर्जित है।”

सिंध मूरत मार्च से लंदन तक का सफर

हिना केवल एक पीड़ित नहीं, बल्कि एक जुझारू चेहरा रही हैं। वह सिंध मूरत मार्च की सह-संस्थापक हैं और पाकिस्तान के औरत मार्च का प्रमुख हिस्सा रही हैं। उन्होंने बताया कि कैसे अधिकारों के लिए आवाज उठाने पर उन्हें निशाना बनाया गया।

हमारे विश्लेषण में यह साफ़ दिखता है कि हिना जैसी एक्टिविस्ट का देश छोड़ना पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आज़ादी और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। हिना के अनुसार, पुलिस प्रशासन का व्यवहार अक्सर सुरक्षा देने के बजाय मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का कारण बनता है।

ब्रिटेन की शरण प्रणाली पर भी उठाए सवाल

दिलचस्प बात यह है कि हिना ने केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन की रिफ्यूजी सिस्टम की भी आलोचना की है। स्कॉलरशिप पर लंदन पहुँचने के बाद उन्होंने पाया कि वहां भी शरणार्थियों को ‘निरंतर निगरानी’ (Surveillance) के बीच रहना पड़ता है, जो एक अलग तरह का मानसिक दबाव पैदा करता है।

हिना बलोच कौन हैं?

हिना बलोच पाकिस्तान की एक प्रमुख ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट और ‘सिंध मूरत मार्च’ की सह-संस्थापक हैं। वे वर्तमान में लंदन में रह रही हैं।

हिना बलोच ने पाकिस्तान क्यों छोड़ा?

हिना का दावा है कि उनके काम और पहचान के कारण उन्हें पुलिस उत्पीड़न, सामाजिक हिंसा और जान से मारने की धमकियों का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उन्हें शरण लेनी पड़ी।

पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर अधिकारों की वर्तमान स्थिति क्या है?

हालाँकि पाकिस्तान में ‘ट्रांसजेंडर पर्सन्स एक्ट 2018’ जैसे कानून हैं, लेकिन हिना के अनुसार ज़मीनी हकीकत में समुदाय को आज भी गरिमापूर्ण रोजगार के बजाय भीख मांगने या सेक्स वर्क जैसे रास्तों पर धकेला जाता है।

‘ओपन सीक्रेट’ से हिना का क्या तात्पर्य है?

उनका आशय उन व्यवहारों और पहचानों से है जो समाज में मौजूद तो हैं, लेकिन धर्म और लोक-लाज के डर से उन्हें बंद कमरों तक सीमित रखा जाता है।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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