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झारखंड: 4449 हाईस्कूल शिक्षकों की सेवा अब तक ‘अस्थायी’, 2 साल पूरे होने के बाद भी जिला स्तर पर अटकी फाइलें

Ranchi: झारखंड के सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 2023 में नियुक्त हुए 4449 शिक्षकों के लिए मानसिक और वित्तीय परेशानी खड़ी हो गई है। नियुक्ति के 24 महीने बीत जाने और प्रोबेशन अवधि (परिवीक्षा काल) समाप्त होने के बावजूद, तकनीकी रूप से इन्हें अब तक ‘स्थायी’ नहीं किया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के निर्देशों के बाद भी जिला स्तर से रिपोर्ट न भेजे जाने के कारण शिक्षकों में भारी आक्रोश है।

24 महीने का सफर पूरा, फिर भी स्थायी आदेश का इंतजार

झारखंड के रांची समेत सभी जिलों में नियुक्त इन शिक्षकों की सेवा शर्त के अनुसार, नियुक्ति के बाद अधिकतम दो साल की प्रोबेशन अवधि होती है। नियमतः कार्य संतोषजनक पाए जाने पर इस अवधि के बाद सेवा कंफर्म (स्थायी) कर दी जानी चाहिए।

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हैरानी की बात यह है कि इन शिक्षकों के खिलाफ न तो कोई विभागीय जांच लंबित है और न ही किसी प्रकार का कानूनी स्थगन (Stay) है। इसके बावजूद, प्रशासनिक सुस्ती के कारण सैकड़ों शिक्षक आज भी कागजों पर अस्थायी माने जा रहे हैं।

तीन चरणों में हुई थी नियुक्ति: आंकड़ों की जुबानी

झारखंड में इन शिक्षकों की बहाली अलग-अलग चरणों में पूरी हुई थी। आंकड़ों पर गौर करें तो सेवा स्थायीकरण की यह समस्या सीधे तौर पर निम्नलिखित बैच के शिक्षकों को प्रभावित कर रही है:

  • 18 मई 2023: प्रथम चरण में 3459 शिक्षकों की नियुक्ति हुई।
  • 16 अक्टूबर 2023: दूसरे चरण में 827 शिक्षक बहाल किए गए।
  • 10 दिसंबर 2023: तीसरे चरण में 163 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिला।

इनमें से पहले बैच के शिक्षकों की अनिवार्य दो साल की अवधि पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य बैच भी समय सीमा के करीब हैं।

निदेशालय सक्रिय, लेकिन जिलों की सुस्ती पड़ रही भारी

इस मामले में राज्य माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने अपनी ओर से पहल की थी। निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र लिखकर उन शिक्षकों की सूची मांगी थी, जिनका सेवा स्थायीकरण होना है।

सूत्रों के अनुसार, अधिकांश जिलों ने अब तक यह सूची मुख्यालय को नहीं भेजी है। फाइलों का जिला स्तर पर ही अटक जाना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की भारी कमी है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर शिक्षक भुगत रहे हैं।

सेवा कंफर्म न होने से शिक्षकों के सामने खड़ी हुईं 3 बड़ी चुनौतियां

शिक्षकों का कहना है कि सेवा स्थायीकरण केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण फैसले जुड़े हुए हैं:

  1. तबादला प्रक्रिया में बाधा: नियम के अनुसार, केवल स्थायी शिक्षक ही तबादला प्रक्रिया (Transfer Process) का हिस्सा बन सकते हैं। सेवा कंफर्म न होने से शिक्षक सालों से अपने घर से दूर दूसरे जिलों में जमे हुए हैं, जिससे उनके पारिवारिक जीवन और बच्चों की पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
  2. बैंक लोन और वित्तीय दिक्कतें: अधिकांश राष्ट्रीयकृत और निजी बैंक स्थायी नौकरी के आधार पर ही होम लोन या पर्सनल लोन प्रदान करते हैं। ‘प्रोबेशनर’ टैग लगे होने के कारण इन शिक्षकों को वित्तीय सहायता प्राप्त करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
  3. करियर ग्रोथ और एनओसी की समस्या: यदि कोई शिक्षक उच्च पदों के लिए आवेदन करना चाहता है या किसी अन्य प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होना चाहता है, तो उसे विभाग से एनओसी (NOC) लेने में कठिनाई आती है। बिना सेवा स्थायीकरण के करियर में प्रमोशन की राह भी बाधित हो रही है।

क्या कहता है स्थायीकरण का नियम?

सरकारी सेवा नियमावली के अनुसार, किसी भी नवनियुक्त कर्मचारी या शिक्षक को अधिकतम 2 साल के लिए प्रोबेशन पर रखा जाता है। इस दौरान उनके कार्य और आचरण का मूल्यांकन होता है।

यदि कार्य संतोषजनक है, तो जिला स्थापना समिति के माध्यम से कंफर्मेशन आदेश जारी करना अनिवार्य है। जानकारों का मानना है कि बिना किसी ठोस कारण के इस प्रक्रिया में देरी करना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही की श्रेणी में आता है।

आगे क्या? शिक्षकों ने दी आंदोलन की चेतावनी

शिक्षकों के विभिन्न संगठनों ने अब इस मुद्दे पर एकजुट होना शुरू कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि यदि अगले कुछ हफ्तों के भीतर जिला स्तर से सूचियां निदेशालय को नहीं भेजी गईं और सेवा स्थायीकरण का पत्र जारी नहीं हुआ, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन को मजबूर होंगे।

फिलहाल, गेंद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के पाले में है। अब देखना यह होगा कि निदेशालय की सख्ती के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी इस फाइल को कितनी जल्दी आगे बढ़ाते हैं।


निष्कर्ष: 4449 शिक्षकों का भविष्य और उनकी मानसिक शांति अब प्रशासनिक तत्परता पर टिकी है। सेवा स्थायीकरण में हो रही देरी न केवल शिक्षकों के मनोबल को गिरा रही है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के सुचारू संचालन में भी बाधा बन रही है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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