Ranchi | देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में रांची के प्रबुद्धजनों ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित करने की मांग उठाई है। अपर बाजार स्थित महेश्वरी धर्मशाला में आयोजित प्रबुद्धजनों के सम्मेलन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी निष्पक्षता को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में शामिल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी को आरोप लगाने के बजाय ठोस तथ्यों और प्रमाणों के साथ सामने आना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार के कार्यों की प्रबुद्धजनों ने की सराहना
सम्मेलन में उपस्थित प्रबुद्धजनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और कानून के अनुसार कर रहे हैं।
सम्मेलन में प्रबुद्धजनों ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल अपने राजनीतिक हितों के कारण मुख्य चुनाव आयुक्त पर निराधार आरोप लगा रहे हैं। उनके अनुसार, इस प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी से संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित होती है।
प्रबुद्धजनों ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष और निर्भीक तरीके से काम करने का अवसर मिलना चाहिए।
इसी क्रम में उन्होंने ज्ञानेश कुमार को देश के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किए जाने की मांग रखी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी विशिष्ट सम्मान का नाम नहीं बताया गया है।
कांग्रेस को चुनाव आयोग पर आरोप लगाने की आदत : आदित्य साहू
सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है।
साहू ने कहा कि जब चुनाव आयोग कानून और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियां निभाता है, तब भी कांग्रेस उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने दावा किया कि देश के प्रबुद्ध नागरिक और आम जनता कांग्रेस की ओर से फैलाए जा रहे कथित भ्रम को समझ रहे हैं।

मतदाता सूची पुनरीक्षण पर कांग्रेस से पूछे सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण और संशोधन को लेकर भी कांग्रेस को निशाने पर लिया।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में भी मतदाता सूची के पुनरीक्षण और संशोधन की प्रक्रिया 10 बार हुई थी, लेकिन तब इस तरह के सवाल नहीं उठाए गए।
साहू ने कहा कि वर्तमान में चुनाव आयोग संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत अपनी जिम्मेदारियां निभा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को आयोग की प्रक्रिया से नहीं, बल्कि उसके अपने अनुसार काम नहीं करने से आपत्ति है।
मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर साहू के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री से नहीं होती है।
मतदाता का नाम कटा है तो प्रमाण दे कांग्रेस : साहू
आदित्य साहू ने कहा कि यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूटा है, तो कांग्रेस को संबंधित व्यक्ति का विवरण और प्रमाण चुनाव आयोग के सामने रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
साहू ने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि किसी मतदाता का नाम सूची से हटाया गया है, तो संबंधित व्यक्ति का नाम और प्रमाण आयोग के समक्ष क्यों नहीं रखा गया।
उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से मतदाताओं की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। कांग्रेस को प्रभावित लोगों को सामने लाकर मतदाता सूची में उनका नाम जुड़वाने की प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए।
सम्मेलन में भाजपा नेताओं और विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्धजनों की भागीदारी
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी, महानगर अध्यक्ष वरुण साहू, जितेंद्र कुमार, नीरज चौधरी और मुकेश काबरा शामिल हुए।
सम्मेलन में प्रबुद्धजनों की ओर से प्रदीप चौरसिया, ओ.पी. कश्यप, जितेंद्र साहा, अरविंद पांडे, कुमार विमल, अजीत कुमार, मुकेश अग्रवाल, सतीश शाहदेव, संजीत कुमार, अजीत ओझा, अमितेश कुमार, अमित चौधरी, अशोक पुरोहित, जवाहर तनेजा, मुकेश पांडे, नरेंद्र लाखोटिया, शिव शंकर साबू, प्रकाश धोलिया, राजीव वर्मा, राम बगड़िया, मनोज कल्याणी और गोवधन माला सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
इसके अलावा डॉ. अभिषेक कुमार रामाधीन, डॉ. शंभू प्रसाद, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. निशांत भारद्वाज, डॉ. अत्रि गंगोपाध्याय, डॉ. शिवालिक, सीए जेपी शर्मा, सीए राज कुमार, सीए धर्मेंद्र कुमार, सीए प्रदीप झालुका, सीए सुरेंद्र विश्वकर्मा, सीए नवीन डोकानिया, सीए उदय जायसवाल, विनोद बख्शी, चंद्र प्रकाश धोलिया, अनिल गोयल, शुभम मित्तल, मुरारी लाल बजाज, रमेश अग्रवाल, राकेश गिरधर, संजय अग्रवाल और भाविन राठौर सहित कई लोगों की भागीदारी रही।
सम्मेलन में मुख्य चुनाव आयुक्त के समर्थन के साथ संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
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