Ranchi | लंबित ई-कल्याण छात्रवृत्ति के भुगतान और आवेदन संबंधी समस्याओं को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (AISF) ने गुरुवार को रांची में प्रदर्शन किया। संगठन की विज्ञप्ति के अनुसार, छात्र नेता अफजल दुर्रानी के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने मोरहाबादी स्थित कल्याण विभाग का घेराव किया और मांग-पत्र सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने भुगतान में देरी का आरोप लगाते हुए कल्याण मंत्री चामरा लिंडा के इस्तीफे की मांग की।
AISF के मुताबिक, विभागीय पदाधिकारियों के साथ वार्ता में नवंबर के भीतर मांगों पर पहल करने का आश्वासन मिला है। विज्ञप्ति में सभी लंबित भुगतानों को पूरा करने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है।
करमटोली से मार्च, निदेशक को सौंपा मांग-पत्र
विज्ञप्ति के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत करमटोली चौक स्थित प्रेस क्लब से हुई। वहां से छात्र-छात्राएं मार्च करते हुए कल्याण विभाग पहुंचे। संगठन ने प्रदर्शन में सैकड़ों विद्यार्थियों के शामिल होने का दावा किया है।
छात्र अपने साथ छात्रवृत्ति आवेदन की स्वीकृति रसीदें और मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर पहुंचे थे। प्रदर्शन के बाद अफजल दुर्रानी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय पदाधिकारियों से बातचीत की और निदेशक को 12 सूत्री मांग-पत्र सौंपने की जानकारी दी।
तीन सत्रों की लंबित छात्रवृत्ति का भुगतान करने की मांग
AISF ने शैक्षणिक सत्र 2023–24, 2024–25 और 2025–26 की लंबित छात्रवृत्ति का अविलंब भुगतान करने की मांग की। संगठन का कहना है कि सत्र 2025–26 के कई आवेदन शिक्षण संस्थानों के स्तर पर लगभग छह महीने पहले स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर उनका निष्पादन और भुगतान लंबित है।
संगठन ने सभी स्वीकृत आवेदनों का भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने की मांग भी रखी। यह प्रदर्शनकारियों की मांग है; उपलब्ध सामग्री में विभाग की ओर से इसे स्वीकार करने का अलग लिखित आदेश नहीं है।
विद्यार्थियों से जुड़ी अन्य प्रमुख मांगें हैं:
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के अनुरूप चार वर्षों का बोनाफाइड प्रमाण-पत्र सत्यापित और स्वीकृत करना।
- सत्र 2026–27 की छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाना।
- लंबित आय प्रमाण-पत्र शीघ्र जारी करना और SIR कार्यों का हवाला देकर हो रही कथित देरी दूर करना।
- ई-कल्याण पोर्टल तथा आधार और बैंक खाते से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण रुके भुगतान शुरू करना।
- दूसरे राज्यों में पढ़ रहे झारखंड के विद्यार्थियों के आवेदनों का सत्यापन और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना।
- प्रत्येक जिले में हेल्पलाइन जारी करना तथा लंबित आवेदनों, स्वीकृति और भुगतान की साप्ताहिक स्थिति सार्वजनिक करना।

अफजल दुर्रानी ने सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल
विज्ञप्ति में दिए बयान के अनुसार, अफजल दुर्रानी ने आरोप लगाया कि छात्रवृत्ति में देरी से गरीब मजदूर-किसान परिवारों के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने आदिवासी, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान की मांग की।
दुर्रानी ने कहा कि केंद्र सरकार का हवाला देकर राज्य का कल्याण विभाग अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। उन्होंने विभागीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए मंत्री चामरा लिंडा से नैतिक जिम्मेदारी लेने और इस्तीफा देने की मांग की।
मंईयां सम्मान योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को महिलाओं की आर्थिक सहायता के साथ उनके बच्चों की शिक्षा और छात्रवृत्ति पर भी ध्यान देना चाहिए। विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कहा, “छात्रवृत्ति कोई सरकारी एहसान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का अधिकार है।”
कार्रवाई नहीं होने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
AISF ने कहा कि वह नवंबर में मांगों पर पहल के आश्वासन के बाद विभाग की कार्रवाई पर नजर रखेगा। निर्धारित समय के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर संगठन ने राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।
विज्ञप्ति में प्रमुख प्रतिभागियों के तौर पर एहतेशाम परवीन, जमीर अहमद, तेजू मिर्धा, राकेश कुमार, खुशबू वहाब चौधरी, अवंतिका कुमारी, रितिका कुमारी, रंजन कुमार और नुसरत जहां के नाम दिए गए हैं।

स्रोत: AISF की उपलब्ध कराई गई विज्ञप्ति। मंत्री और विभाग की अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है।
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