रांची। झारखंड के डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट अब 8 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। अगली सुनवाई में राज्य सरकार को अपनी डीजीपी नियुक्ति नियमावली की वैधता पर पक्ष रखना है। इसलिए अदालत में बहस का केंद्र नियमावली और उसके आधार पर उठाए गए कदम होंगे।
मंगलवार की सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने नियमावली पर आपत्ति जताते हुए जल्द सुनवाई का आग्रह किया। उन्होंने 30 सितंबर की तारीख मांगी, लेकिन झारखंड सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उस दिन उपलब्ध नहीं होने की बात कही।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने झारखंड से जुड़े मुद्दे पर न्याय मित्र की सहायता जरूरी बताई। न्याय मित्र राजू रामचंद्रन ने अगले सप्ताह उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी। इसके बाद सुनवाई 8 अक्टूबर के लिए तय हुई।
नियमावली पर झारखंड सरकार को रखना होगा पक्ष
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार करीब छह महीने पहले अपनी रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। उनके अनुसार, रिपोर्ट में झारखंड सरकार की कार्रवाई को गलत माना गया है। यह रिपोर्ट में दर्ज पक्ष है; अदालत का अंतिम फैसला नहीं।
मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य सरकार अगली सुनवाई में नियुक्ति नियमावली की वैधता पर जवाब देगी। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार नियम बनाने और उसके आधार पर की गई कार्रवाई के समर्थन में क्या दलीलें रखती है।
विवाद का व्यापक संदर्भ
डीजीपी नियुक्ति की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले के निर्देश पहले से मौजूद हैं। अदालत के रिकॉर्ड में वरिष्ठ अधिकारियों में से चयन और न्यूनतम कार्यकाल से जुड़े निर्देश दर्ज हैं। झारखंड की नियमावली इन निर्देशों के अनुरूप है या नहीं, यह मौजूदा मामले में पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत तय करेगी।
8 अक्टूबर को क्या होगा?
अगली तारीख पर झारखंड सरकार अपना जवाब रखेगी। केंद्र की रिपोर्ट और न्याय मित्र की सहायता भी सुनवाई में अहम रहेंगी। फिलहाल अदालत ने नियमावली की वैधता पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। 8 अक्टूबर की सुनवाई से साफ हो सकता है कि इस विवाद पर आगे किस तरह विचार होगा।












