New Delhi: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर के बाद राजधानी दिल्ली की सियासत और छात्र राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है। इस्तीफा सामने आने के बाद भी विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है, बल्कि अब युवाओं और ‘जेन जी’ (Gen Z) प्रदर्शनकारियों के तेवर और ज्यादा तल्ख हो गए हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने इस पूरे घटनाक्रम पर सीधा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यह महज शुरुआत है और जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, संघर्ष जारी रहेगा।
‘डरने की जरूरत नहीं, यह लोकतंत्र है’: अभिजीत दिपके
शिक्षा मंत्रालय और दिल्ली की सड़कों पर बने तनावपूर्ण माहौल के बीच अभिजीत दिपके ने बयान जारी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता और छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
“डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। यह लोकतंत्र है। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन हमारी दो और मांगें हैं…”
अभिजीत दिपके के इस बयान के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
क्या हैं 2 मुख्य मांगें?
- पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद: हालिया दुखद घटनाओं में जिन छात्रों की जान गई है, उनके परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
- लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई: 20 तारीख को छात्रों पर हुए एक्शन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया गया कि पुलिस प्रशासन ने बर्बरता की। इसके लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर तुरंत एक्शन लिया जाए।
चेतावनी या नया सियासी मोड़?
बयान के अंत में अभिजीत दिपके ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, “याद रखना कॉकरोच से पंगा मत लेना।”
जेन जी और युवा कार्यकर्ताओं के इस आक्रामक रुख के बाद प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। पुलिस के आला अधिकारी अब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नई रणनीति बना रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद केंद्र सरकार के सामने अब नए शिक्षा मंत्री का चयन करने के साथ-साथ छात्रों के इस आक्रोश को शांत करने की दोहरी चुनौती है। देखना होगा कि क्या प्रशासन मुआवजा राशि और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग पर कोई आधिकारिक फैसला लेता है या फिर दिल्ली की सड़कों पर यह प्रदर्शन और उग्र रूप धारण करेगा।










