Janmashtami 2026: देशभर में जन्माष्टमी का पर्व भारी उत्साह के साथ मनाया गया। रात के 12 बजते ही शंखनाद और घंटियों की गूंज के बीच कान्हा का जन्मोत्सव शुरू हुआ।
राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में इस बार आस्था के ऐसे अद्भुत रंग देखने को मिले, जिन्होंने हर किसी को हैरान कर दिया। कहीं भगवान को तोपों की सलामी दी गई तो कहीं आसमान 1100 ड्रोनों की रोशनी से जगमगा उठा।
परंपरा और आधुनिकता के इस संगम में लाखों श्रद्धालु शामिल हुए। जानिए देश के उन 5 मंदिरों के बारे में, जहां कान्हा का जन्मोत्सव सबसे अनोखे अंदाज में संपन्न हुआ।
नाथद्वारा: श्रीनाथजी को 21 तोपों की सलामी, 353 साल पुरानी रवायत
राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में आधी रात 12 बजे एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। घड़ी की सुइयां 12 पर पहुंचते ही ‘नर’ और ‘मादा’ नाम की दो ऐतिहासिक तोपों से ठाकुरजी को 21 तोपों की सलामी दी गई।
यह परंपरा पिछले 353 वर्षों से अनवरत चली आ रही है। तोपों की गूंज और मंदिर परिसर में उमड़े जनसैलाब ने इस पल को अविस्मरणीय बना दिया। यह वही धाम है, जिससे देश के प्रमुख उद्योगपति अंबानी परिवार की गहरी आस्था जुड़ी है।
सांवलियाजी मंदिर: आसमान में उड़े 1100 ड्रोन, जीवंत हुई लीलाएं
चित्तौड़गढ़ के सुप्रसिद्ध श्री सांवलियाजी मंदिर में 3 साल बाद आयोजित भव्य ड्रोन शो ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रात 8 बजे एक साथ 1100 ड्रोनों ने उड़ान भरी और पूरे आसमान को रोशनी से भर दिया।
हाई-टेक तकनीक के जरिए आसमान में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, माखन चोरी, गोवर्धन पर्वत उठाने और सांवरा सेठ की भव्य आकृतियां बनाई गईं। जमीन पर खड़े हजारों भक्त गर्दन उठाए इस आधुनिक भक्ति दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए।
जयपुर गोविंद देवजी: 425 लीटर दूध और 365 किलो दही से महाभिषेक
जयपुर की रियासतकालीन धरोहर और अराध्य देव श्री गोविंद देव जी मंदिर में जन्मोत्सव का नजारा देखते ही बनता था। रात ठीक 12 बजे भगवान का विशेष महाभिषेक शुरू हुआ, जिसमें प्रचुर मात्रा में पंचामृत सामग्री का उपयोग किया गया:
- 425 लीटर ताजा दूध
- 365 किलो शुद्ध दही
- 85 किलो बूरा
- 11 किलो गाय का शुद्ध घी
- 11 किलो शहद
महाभिषेक संपन्न होने के बाद ठाकुरजी को पारंपरिक रबड़ी, लड्डू और पंजीरी का विशेष भोग अर्पित किया गया। पूरा चारदीवारी क्षेत्र ‘राधे-गोविंदा’ के जयकारों से गुंजायमान रहा।
मथुरा-वृंदावन: बांके बिहारी के लिए बना 31 किलो पाग का स्पेशल केक
कान्हा की पावन भूमि मथुरा-वृंदावन में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में साल में सिर्फ एक बार होने वाली दुर्लभ मंगला आरती रात 1:55 बजे संपन्न हुई, जिसके साक्षी लगभग 600 श्रद्धालु बने।
जन्माष्टमी के इस अवसर पर भगवान के लिए 31 किलो पाग का विशेष केक तैयार किया गया। आगरा के प्रसिद्ध हलवाइयों द्वारा बनाए गए इस केक में शुद्ध मेवा (ड्राई फ्रूट्स), चॉकलेट और जेली का बेहतरीन मिश्रण शामिल किया गया था, जो आकर्षण का केंद्र बना रहा।
ग्वालियर: 120 करोड़ के गहनों से सजा कन्हैया का दरबार
मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित प्राचीन गोपाल मंदिर में सुरक्षा के कड़े घेरे के बीच भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया। सिंधिया राजवंश के समय के ऐतिहासिक आभूषणों से भगवान को सजाया गया, जिनकी कुल कीमत लगभग 120 करोड़ रुपये आंकी गई है।
श्रीकृष्ण को हीरा, पन्ना, माणिक, नीलम और पुखराज जड़ित दुर्लभ आभूषण पहनाए गए। इस दौरान आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र रहा लगभग 1.25 करोड़ रुपये की लागत वाला रत्नजड़ित स्वर्ण मुकुट।
परंपरा और आधुनिकता का संतुलन
जन्माष्टमी के इन आयोजनों से स्पष्ट है कि सनातन परंपराएं समय के साथ तकनीकी रूप से समृद्ध हो रही हैं। ड्रोन शो और आधुनिक प्रबंधन ने ऐतिहासिक रवायतों को युवा पीढ़ी तक आकर्षक रूप में पहुंचाया है। अब मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन आने वाले त्योहारों के लिए भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के और बेहतर मॉडल तैयार करने पर ध्यान दे रहे हैं।












