New Delhi | दिल्ली का मंथन जिम्नास्टिक्स स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा था। हर किसी की नजरें पोडियम पर खड़े उस 18 साल के लड़के पर टिकी थीं, जिसने कुछ देर पहले दर्द को मात देकर इतिहास रचा था।
थर्ड ऑल इंडिया मंथन जिम्नास्टिक्स कप 2026 में झारखंड के पृथ्वी देव भट्टाचार्य ने वह कर दिखाया, जिसकी उम्मीद डॉक्टरों को भी नहीं थी। गंभीर इंजरी (चोट) के बावजूद पृथ्वी ने इंडिविजुअल मेन यूथ वर्ग में न सिर्फ हिस्सा लिया, बल्कि देश के दिग्गजों को पछाड़कर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
झारखंड के धनबाद (निरसा) से निकलकर रांची में पसीना बहा रहे इस लाल की इस कामयाबी ने राज्य के खेल जगत में एक नया जोश भर दिया है। इस ऑल इंडिया ओपन नेशनल जिम्नास्टिक चैंपियनशिप में केवल पृथ्वी ही नहीं, बल्कि झारखंड की पूरी पलटन ने पदकों की झड़ी लगा दी है।
दर्द पर भारी पड़ी जीत की जिद
जब ग्राउंड पर पृथ्वी से हमारी बात हुई, तो उनकी आंखों में जीत की चमक और चेहरे पर कड़े संघर्ष की लकीरें साफ दिख रही थीं। अमूमन ऐसी इंजरी में खिलाड़ी महीनों का रेस्ट लेते हैं, लेकिन पृथ्वी के इरादे कुछ और ही थे।
चैंपियन पृथ्वी देव भट्टाचार्य ने भावुक होते हुए कहा: “मैं बुरी तरह इंजर्ड था, लेकिन मेरी जिद थी कि इस चैंपियनशिप में जरूर खेलूं। मैं इस मौके को किसी भी हाल में खोना नहीं चाहता था। जब दर्द बढ़ता था, तो बस देश और राज्य के लिए मेडल जीतने का सपना सामने आ जाता था। मेरे कोच विकास कुमार गोप ने मेरी इस जिद को टूटने नहीं दिया। उन्होंने नियमित रूप से मेरी स्पेशल प्रैक्टिस कराई और मेरा हौसला बढ़ाया। यह गोल्ड मेडल मेरी नहीं, बल्कि मेरे कोच के भरोसे और मेरी जिद की जीत है।”
[तस्वीर: दिल्ली के स्टेडियम में गोल्ड मेडल के साथ तिरंगा लहराते पृथ्वी देव भट्टाचार्य और उनके कोच विकास कुमार गोप]

पृथ्वी देव भट्टाचार्य और उनके कोच विकास कुमार गोपझारखंड के रणबांकुरों ने दिल्ली में गाड़ा झंडा, जीते दर्जनों मेडल
इस चैंपियनशिप में झारखंड का दबदबा ऐसा था कि हर दूसरी स्पर्धा के बाद मंच पर झारखंड के खिलाड़ियों का नाम गूंज रहा था। टीम के शानदार प्रदर्शन पर रांची के खेल गलियारों में जश्न का माहौल है।
महिला विंग में चंदा और ऋष्टि का ट्रिपल धमाका
- चंदा कुमारी: इंडिविजुअल विमेन, एक्रोबैटिक रॉक एंड रोल और एरो डांस में कुल 3 गोल्ड मेडल जीतकर प्रतियोगिता की सबसे सफल खिलाड़ी बनीं।
- ऋष्टि राज: एक्रोबैटिक रॉक एंड रोल और एरोबिक जिम्नास्टिक्स में स्वर्ण और इंडिविजुअल विमेन में कांस्य पदक झटका।
- दिशा माहेश्वरी: इंडिविजुअल विमेन में रजत जबकि एक्रोबैटिक रॉक एंड रोल और एरोबिक जिम्नास्टिक्स में गोल्ड मेडल पर कब्जा किया।
जुगलबंदी में भी दिखा दम (एक्रो स्विंग और एरो डांस)
प्रतियोगिता के कपल और ग्रुप इवेंट्स में भी झारखंड के खिलाड़ियों ने समां बांध दिया। प्रिया यादव, रितिका जोशी, रिधिका यादव, नंदिनी कुमारी और तनुश्री कुमारी ने अपने-अपने इवेंट्स में स्वर्णिम सफलता हासिल की।
वहीं, अलेक्जेंडर लीला मुंडा और पूनम हांसदा की जोड़ी ने एक्रोसिंग में स्वर्ण जीता, जबकि जेम्स कंडुलना और आराध्या पांडेय ने जूनियर एक्रोसिंग में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। लड़कों के वर्ग में अथर्व गुप्ता (रजत) और आदित्य राज (स्वर्ण) ने भी शानदार खेल दिखाया।
[वीडियो: एक्रोबैटिक रॉक एंड रोल इवेंट में झारखंड की महिला टीम का वो शानदार परफॉर्मेंस जिसने जजों को हैरान कर दिया]

“अगला लक्ष्य इंटरनेशनल”: कोच विकास कुमार गोप
इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ टीम के मुख्य कोच विकास कुमार गोप का है। रांची के खेलगांव में इन बच्चों को दिन-रात तराशने वाले विकास कुमार अपनी टीम के इस प्रदर्शन से बेहद गदगद हैं।
कोच विकास कुमार गोप ने कहा: “दिल्ली में हमारे बच्चों ने जो किया, वह चमत्कार से कम नहीं है। पृथ्वी ने चोट के बावजूद जिस जज्बे के साथ गोल्ड जीता, उसने पूरी टीम में करंट दौड़ा दिया। चंदा, ऋष्टि, दिशा समेत सभी 19-20 खिलाड़ियों ने महीनों तक बिना छुट्टी लिए पसीना बहाया है। हमारा अगला मिशन सिर्फ नेशनल नहीं है। यदि सरकार और प्रशासन से इसी तरह का सपोर्ट मिलता रहा, तो यही खिलाड़ी बहुत जल्द अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और ओलंपिक तक जाएंगे।”
क्या बदलेगी झारखंड में जिम्नास्टिक की सूरत?
झारखंड को आमतौर पर हॉकी और तीरंदाजी का गढ़ माना जाता है, लेकिन दिल्ली में जिम्नास्टों ने जो धमाका किया है, उसने खेल निदेशालय को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।
आगे का रास्ता: इस बड़ी जीत के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य सरकार इन खिलाड़ियों के लिए स्पेशल स्कॉलरशिप और रांची में इंटरनेशनल लेवल के जिम्नास्टिक इक्विपमेंट्स (उपकरणों) की व्यवस्था जल्द करेगी। खेल प्रेमियों का मानना है कि अगर इन युवाओं को सही डाइट और इंफ्रास्ट्रक्चर मिल जाए, तो झारखंड जिम्नास्टिक का नया हब बन सकता है।











