Ranchi | झारखंड में मौसम ने अचानक करवट बदल ली है, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची ने अगले 24 घंटे के लिए राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। दक्षिण झारखंड के ऊपर बने एक गहरे डिप्रेशन (Depression) के कारण मौसम विभाग ने वज्रपात और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की गंभीर चेतावनी दी है।
इस मानसूनी सिस्टम का सबसे बड़ा असर हजारीबाग, चतरा, लातेहार और पलामू जैसे जिलों में देखने को मिल सकता है, जहां ‘आइसोलेटेड हैवी टू वेरी हैवी रेन’ यानी 64.5 मिमी से लेकर 204.4 मिमी तक मूसलाधार बारिश होने की आशंका जताई गई है। राजधानी रांची समेत गुमला, लोहर्दगा, गढ़वा, खूंटी और कोडरमा में भी भारी बारिश (64.5 से 115.5 मिमी) को लेकर ‘वॉच’ यानी सतर्क रहने को कहा गया है।
पब्लिक सेफ्टी और खेतों में काम कर रहे किसानों के लिए मौसम विभाग ने विशेष रूप से वज्रपात (Lightning) की चेतावनी जारी की है। पिछले 24 घंटों में सरायकेला-खरसावां के नीमडीह में सबसे अधिक 79.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि डाल्टनगंज में अधिकतम तापमान 35.4°C और लातेहार में सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.7°C दर्ज हुआ है।
डिप्रेशन का असर: आसमान में छाए काले बादल और तेज हवाएं
मौसम केंद्र रांची के वैज्ञानिकों के मुताबिक, दक्षिण झारखंड और उससे सटे उत्तरी आंतरिक ओडिशा के ऊपर बना डिप्रेशन 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह सिस्टम रांची से लगभग 70 किमी दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में केंद्रित है।
मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद (Scientist-D, मौसम केंद्र रांची) का आधिकारिक बयान:
“दक्षिण झारखंड के ऊपर सक्रिय डिप्रेशन के चलते अगले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में तीव्र मानसूनी गतिविधियां देखी जाएंगी। हजारीबाग, पलामू और चतरा संभाग में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही, पूरे राज्य में 40-50 किमी/घंटे की गति से झोंकेले हवाएं चलने और वज्रपात की प्रबल संभावना है। आम जनता को खराब मौसम के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।”
बारिश के आंकड़ों में भारी कमी, क्या यह अलर्ट राहत लाएगा?
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान यह बात भी सामने आई है कि इस साल 1 जून 2026 से 6 जुलाई 2026 की अवधि में झारखंड में सामान्य से 42% कम बारिश दर्ज की गई है। राज्य में सामान्यतः इस अवधि तक 246.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 142.6 मिमी ही हुई है। सबसे खराब स्थिति गढ़वा (-89%) और चतरा (-74%) की है। ऐसे में इस भारी बारिश के अलर्ट से जहां एक तरफ किसानों के चेहरे खिले हैं, वहीं दूसरी तरफ शहरी इलाकों में जलजमाव और वज्रपात का डर भी सता रहा है।
| प्रमुख स्टेशन / जिला | पिछले 24 घंटे की वर्षा (मिमी) | 1 जून से अब तक कुल वर्षा (मिमी) |
| रांची (Ranchi) | 37.0 मिमी | 299.1 मिमी |
| जमशेदपुर (Jamshedpur) | 17.1 मिमी | 134.4 मिमी |
| चाईबासा (Chaibasa) | 48.7 मिमी | 266.6 मिमी |
| नीमडीह (सरायकेला) | 79.8 मिमी | (सर्वाधिक २४ घंटे में) |
स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर: आम जनता के लिए गाइडलाइन
इस हाई-इम्पैक्ट मानसूनी सिस्टम को देखते हुए विभिन्न जिलों के स्थानीय प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया है। वज्रपात की चेतावनी को देखते हुए ग्रामीण इलाकों में मुनादी कराई जा रही है कि खराब मौसम में कोई भी किसान या मवेशी चराने वाले खुले खेतों या पेड़ों के नीचे शरण न लें।
निष्कर्ष और सिस्टम की तैयारी
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 7 से 11 जुलाई के बीच भी राज्य के लगभग सभी स्थानों पर हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश और मेघ गर्जन का सिलसिला जारी रहेगा। तापमान में अगले 3 दिनों तक कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन उसके बाद अधिकतम तापमान में 2-4°C की बढ़ोतरी देखी जा सकती है। फिलहाल, बिजली विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें मुस्तैद हैं ताकि भारी हवाओं के कारण गिरने वाले पेड़ों या उखड़े बिजली के पोल से सप्लाई बाधित न हो। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम की लाइव अपडेट्स देखकर ही घरों से बाहर निकलें।











