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Jharkhand News

सुप्रीम कोर्ट से बेजुबानों को मिला न्याय, नन्‍ही कायरा ने दिया समाज को नया मैसेज

रांची : सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने इंसान और जानवरों के रिश्ते को एक नई दिशा दी है। कोर्ट ने इस्ट्रे डॉग्स यानी आवारा कुत्तों की सुरक्षा को लेकर ऐसा निर्णय दिया, जिसे बेजुबान जानवरों की जीत माना जा रहा है। इस फैसले का जश्न राजधानी रांची में एक अनोखे अंदाज़ में मनाया गया।

आठ साल की बच्ची कायरा मिश्रा ने पहाड़ी मंदिर में बाबा को 101 नारियल अर्पित कर अपनी खुशी जाहिर की। उनका कहना है कि यह फैसला उन सभी जानवरों के लिए नई उम्मीद है, जिनकी तकलीफ को अक्सर समाज नज़रअंदाज़ करता है।

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कायरा का जानवरों से रिश्ता

कायरा का बेजुबानों से लगाव किसी सामान्य बच्चे जैसा नहीं है। चार साल की उम्र से ही उन्होंने घायल और लाचार जानवरों को घर लाकर उनकी देखभाल शुरू कर दी थी। धीरे-धीरे कई कुत्ते उनके परिवार का हिस्सा बन गए।

हर रक्षाबंधन पर कायरा इन जानवरों को राखी बांधती हैं और उन्हें अपने भाई की तरह मानती हैं। उनके इस छोटे से प्रयास ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे इलाके को जानवरों की सेवा के प्रति जागरूक किया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न सिर्फ कायरा के लिए बल्कि पूरे देश के पशु-प्रेमियों के लिए जीत जैसा है। अब जानवरों पर अत्याचार और हिंसा के मामलों में कानूनी सुरक्षा मजबूत होगी। यह निर्णय समाज को यह संदेश देता है कि बेजुबानों के अधिकार भी उतने ही अहम हैं जितने इंसानों के।

कायरा कहती हैं कि “जानवरों को नफ़रत नहीं, प्यार चाहिए। हमें अपने बच्चों को सिखाना चाहिए कि पत्थर मारने की बजाय रोटी खिलाएं।” उनकी यह अपील समाज में इंसानियत की एक नई मिसाल पेश करती है।

समाज को दिया संदेश

कायरा की मासूम yet गहरी सोच आज पूरे समाज के लिए सबक है। जब एक बच्ची इतनी संवेदनशील हो सकती है तो हम सभी को भी बेजुबानों के दर्द को समझना चाहिए। उनका कहना है कि जानवर हमारी तरह बोल नहीं सकते, इसलिए हमें उनकी आवाज़ बनना होगा।

रांची की गलियों में घायल कुत्तों और लाचार जानवरों को सहारा देने वाली यह छोटी बच्ची बड़ी सोच रखती है। उन्होंने समाज से अपील की है कि हर इंसान अपनी क्षमता के अनुसार किसी एक बेजुबान की मदद करे।

आगे की राह

सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से उम्मीद है कि भविष्य में जानवरों के प्रति हिंसा कम होगी और उनकी देखभाल को लेकर समाज में सकारात्मक सोच विकसित होगी। कायरा जैसी बच्चियां आने वाले समय में संवेदनशील भारत की तस्वीर को और मजबूत बनाएंगी।

यह कहानी सिर्फ न्याय की जीत नहीं बल्कि इंसानियत और करुणा की मिसाल भी है। रांची की कायरा ने दिखा दिया कि छोटे दिलों में भी बड़े ख्वाब और गहरी सोच छिपी होती है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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