Ranchi: राजधानी रांची की खस्ताहाल सड़कों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम की लापरवाही पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश एसएम रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। यह याचिका शुभम कटारुका द्वारा दायर की गई थी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि रांची की प्रमुख सड़कों को छोड़कर अन्य इलाकों की सड़कें मामूली बारिश में भी तालाब बन जाती हैं। सेवा सदन और तपोवन मंदिर के पास की सड़कें बरसात में पूरी तरह से जलमग्न हो जाती हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
डालसा की रिपोर्ट से खोली सरकार की पोल
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा सड़कों की मरम्मत के दावों और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की रिपोर्ट में विरोधाभास को गंभीरता से लिया है। अदालत ने साफ कहा कि डालसा की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि याचिका में जिन सड़कों की बात की गई है, वे बदहाल स्थिति में हैं और तत्काल मरम्मत की जरूरत है।
अदालत ने निर्देश दिया कि बारिश से पहले इन सड़कों की मरम्मत पूरी होनी चाहिए, ताकि नागरिकों को आने-जाने में दिक्कत न हो। इससे पहले सरकार ने कोर्ट को बताया था कि सड़कों की मरम्मत हो चुकी है और फोटो भी प्रस्तुत किए थे।
लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि सरकार ने जिन सड़कों की तस्वीरें दीं, वे याचिका में उल्लिखित सड़कों से भिन्न थीं। इसके बाद हाईकोर्ट ने डालसा को स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। रिपोर्ट में प्रार्थी के आरोपों को सही पाया गया।
कोर्ट ने नगर निगम को दी सख्त हिदायत
राज्य सरकार ने दावा किया कि उसने रांची नगर निगम को मरम्मत के लिए फंड जारी कर दिया है। नगर निगम की ओर से भी कहा गया कि मरम्मत का काम जल्द शुरू होगा। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कार्य अब और टालने योग्य नहीं है और इसे बरसात से पहले हर हाल में पूरा करना होगा।
कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि वह डालसा की रिपोर्ट पर विस्तृत जवाब दाखिल करे और मरम्मत कार्य में तेजी लाए। अदालत ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि: हाईकोर्ट का स्पष्ट संदेश
हाईकोर्ट की यह टिप्पणी राजधानी रांची के लाखों नागरिकों के लिए राहत का संदेश लेकर आई है। वर्षों से उपेक्षित इन सड़कों पर अब न्यायालय की निगरानी में मरम्मत कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
सड़क की बदहाली के कारण होने वाले हादसों और जान-माल के नुकसान को रोकना अब प्राथमिकता में आ गया है। हाईकोर्ट का यह सख्त रुख सरकार को जवाबदेह बनाने के साथ-साथ जनता को भी न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।









